चंडीगढ़ में सरोगेसी की लागत 2026: खर्च, पैकेज व पूरी जानकारी

चंडीगढ़ में सरोगेसी की लागत 2026: खर्च, पैकेज व पूरी जानकारी

चंडीगढ़ में सरोगेसी की लागत 2026: खर्च, पैकेज व पूरी जानकारी

चंडीगढ़ में सरोगेसी की कुल लागत 2026 में कितनी है?

Vinsfertility के इस विशेष गाइड में, हम आपको चंडीगढ़ में सरोगेसी की लागत 2026: खर्च, पैकेज व पूरी जानकारी देंगे। निःसंतानता से जूझ रहे दंपतियों के लिए सरोगेसी एक उम्मीद की किरण है, और इसकी लागत को समझना एक महत्वपूर्ण पहला कदम है। भारत में सरोगेसी केवल परोपकारी (altruistic) मॉडल पर आधारित है, जिसका अर्थ है कि इसमें सरोगेट माँ को कोई व्यावसायिक भुगतान शामिल नहीं होता, बल्कि केवल चिकित्सा, बीमा और अन्य आवश्यक व्यय कवर किए जाते हैं।

चंडीगढ़ में सरोगेसी की कुल लागत 2026 में आमतौर पर ₹14 लाख से ₹22 लाख के बीच अनुमानित की जा सकती है। यह खर्च सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम, 2021 के तहत निर्धारित परोपकारी सरोगेसी मॉडल पर आधारित है। इस अनुमानित लागत में इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF) प्रक्रिया, सरोगेट की गर्भावस्था से संबंधित चिकित्सा देखभाल, प्रसव व्यय, अनिवार्य बीमा कवर, कानूनी शुल्क और प्रशासनिक लागतें शामिल होती हैं। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि सरोगेट माँ को उसके श्रम, दर्द या बच्चे के बदले में कोई मौद्रिक मुआवज़ा नहीं दिया जाता, बल्कि केवल उसकी चिकित्सा ज़रूरतों और स्वास्थ्य बीमा का खर्च उठाया जाता है।

परोपकारी सरोगेसी: कानूनी ढाँचा और लागत पर प्रभाव

भारत में सरोगेसी की लागत को समझने के लिए, देश के कानूनी ढांचे को जानना आवश्यक है। 25 जनवरी 2022 से लागू हुए सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम, 2021 ने व्यावसायिक सरोगेसी (commercial surrogacy) को पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया है। इसका अर्थ है कि अब सरोगेसी केवल परोपकारी आधार पर ही की जा सकती है। इस अधिनियम के अनुसार, सरोगेट माँ को उसके चिकित्सा खर्च, दवाओं, गर्भावस्था के दौरान पोषण संबंधी सहायता और 36 महीने के अनिवार्य स्वास्थ्य बीमा के अलावा कोई अन्य वित्तीय लाभ नहीं दिया जा सकता है। यह प्रावधान सरोगेसी की कुल लागत को काफी हद तक प्रभावित करता है, क्योंकि इसमें सरोगेट को दिए जाने वाले व्यावसायिक मुआवजे का सबसे बड़ा हिस्सा हट जाता है। इच्छुक दंपति को सरोगेसी की प्रक्रिया शुरू करने से पहले अपनी पात्रता और कानूनी आवश्यकताओं को अच्छी तरह से समझ लेना चाहिए।

लागत को प्रभावित करने वाले मुख्य कारक

चंडीगढ़ में सरोगेसी की कुल लागत कई कारकों पर निर्भर करती है, जिससे इसकी अंतिम राशि में भिन्नता आ सकती है। इन कारकों में प्रमुख हैं:

  • IVF चक्रों की संख्या: सरोगेसी प्रक्रिया में अक्सर इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF) एक महत्वपूर्ण चरण होता है। यदि पहले IVF चक्र में सफलता नहीं मिलती है, और अतिरिक्त चक्रों की आवश्यकता होती है, तो कुल लागत बढ़ सकती है। प्रत्येक IVF चक्र की अपनी दवाइयाँ, प्रयोगशाला शुल्क और विशेषज्ञ की फीस होती है।
  • डोनर गेमेट्स की आवश्यकता: यदि इच्छुक दंपति को अंडे या शुक्राणु डोनर की आवश्यकता होती है, तो डोनर गेमेट्स की लागत भी कुल खर्च में जुड़ जाती है। यह असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (विनियमन) अधिनियम, 2021 के तहत विनियमित है।
  • सरोगेट माँ की चिकित्सा स्थिति: सरोगेट माँ के स्वास्थ्य की स्थिति और गर्भावस्था के दौरान उत्पन्न होने वाली किसी भी जटिलता (जैसे कि उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था, सिजेरियन डिलीवरी, या अतिरिक्त चिकित्सा देखभाल) से चिकित्सा खर्च बढ़ सकते हैं।
  • कानूनी और प्रशासनिक शुल्क: सरोगेसी के लिए कानूनी अनुबंध, अदालत के आदेश, और विभिन्न सरकारी अनुमतियों तथा पंजीकरणों में लगने वाले शुल्क भी कुल लागत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं।
  • बीमा प्रीमियम: सरोगेट माँ के लिए 36 महीने का अनिवार्य स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम भी कुल लागत में शामिल होता है, जैसा कि अधिनियम में अनिवार्य है।
  • नैदानिक ​​परीक्षण और दवाइयाँ: गर्भावस्था के दौरान आवश्यक नियमित नैदानिक ​​परीक्षण, अल्ट्रासाउंड और दवाइयाँ भी लागत में योगदान करती हैं।

इन सभी कारकों को ध्यान में रखते हुए, इच्छुक दंपतियों को सरोगेसी की यात्रा शुरू करने से पहले एक विस्तृत वित्तीय योजना बनाने की सलाह दी जाती है।

मुख्य बातें

  • चंडीगढ़ में 2026 में सरोगेसी की अनुमानित लागत ₹14 लाख से ₹22 लाख के बीच हो सकती है।
  • यह लागत भारत के परोपकारी सरोगेसी मॉडल पर आधारित है, जिसमें सरोगेट को केवल चिकित्सा, बीमा और आवश्यक खर्च मिलते हैं।
  • कुल लागत में IVF प्रक्रिया, सरोगेट की चिकित्सा देखभाल, प्रसव, अनिवार्य बीमा और कानूनी शुल्क शामिल हैं।
  • लागत पर IVF चक्रों की संख्या, डोनर गेमेट्स की आवश्यकता और सरोगेट की चिकित्सा जटिलताएँ जैसे कारक प्रभाव डालते हैं।
  • सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम, 2021 के अनुसार व्यावसायिक सरोगेसी प्रतिबंधित है।
  • वित्तीय नियोजन से पहले सभी कानूनी आवश्यकताओं और संभावित खर्चों को समझना आवश्यक है।

चंडीगढ़ में सरोगेसी खर्च का पूरा ब्रेकडाउन (मद-दर-मद)

भारत में सरोगेसी कानून के तहत, सरोगेसी एक परोपकारी प्रक्रिया है, जिसका अर्थ है कि सरोगेट माँ को गर्भधारण के लिए कोई मौद्रिक मुआवज़ा नहीं दिया जाता। चंडीगढ़ में सरोगेसी की लागत मुख्य रूप से इच्छुक माता-पिता द्वारा उठाए गए विभिन्न चिकित्सा, कानूनी और प्रशासनिक खर्चों से बनती है। इन खर्चों को समझना प्रक्रिया की बेहतर योजना बनाने में मदद करता है।

मद अनुमानित रेंज (₹) टिप्पणी
आईवीएफ चक्र (दवाइयाँ, प्रक्रियाएँ) ₹1,50,000 – ₹3,50,000 इसमें अंडाणु पुनर्प्राप्ति, शुक्राणु इंजेक्शन (ICSI), भ्रूण निर्माण और स्थानांतरण शामिल।
सरोगेट की स्क्रीनिंग और तैयारी ₹30,000 – ₹70,000 चिकित्सा मूल्यांकन, मनोवैज्ञानिक परामर्श, कानूनी दस्तावेज़ीकरण।
सरोगेट के चिकित्सा व देखभाल खर्च ₹3,00,000 – ₹5,00,000 गर्भावस्था के दौरान नियमित जाँच, दवाइयाँ, पोषण, प्रसव खर्च (सामान्य/सिजेरियन)।
सरोगेट के लिए अनिवार्य बीमा ₹60,000 – ₹1,00,000 सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम, 2021 के अनुसार 36 महीने का स्वास्थ्य बीमा अनिवार्य।
कानूनी शुल्क और दस्तावेज़ीकरण ₹1,00,000 – ₹2,00,000 सरोगेसी समझौता, सहमति पत्र, जिला मेडिकल बोर्ड और प्राधिकरण के पंजीकरण।
क्लीनिक/अस्पताल प्रशासनिक शुल्क ₹50,000 – ₹1,50,000 समन्वय, परामर्श, रिकॉर्ड कीपिंग और सामान्य सुविधा उपयोग।
अंडाणु/शुक्राणु डोनर (यदि आवश्यक हो) ₹50,000 – ₹1,50,000 डोनर के चयन, स्क्रीनिंग और दवाइयों का खर्च।
दवाइयाँ और सप्लीमेंट्स (इच्छुक माता-पिता के लिए) ₹30,000 – ₹70,000 आईवीएफ प्रक्रिया से संबंधित हार्मोनल दवाइयाँ, आदि।
प्रसव के बाद की सरोगेट की देखभाल ₹20,000 – ₹40,000 प्रसव के बाद सरोगेट की रिकवरी और चिकित्सकीय आवश्यकताएँ।
चंडीगढ़ में सरोगेसी से जुड़े अनुमानित खर्चों का ब्रेकडाउन (वर्ष 2026 के लिए सांकेतिक)।

आईवीएफ चक्र और संबंधित प्रक्रियाएँ

चंडीगढ़ में सरोगेसी की प्रक्रिया की शुरुआत आमतौर पर इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) से होती है। इस मद में इच्छुक माता-पिता के अंडाणु पुनर्प्राप्ति, शुक्राणु संग्रह, भ्रूण बनाने के लिए उनका फर्टिलाइजेशन (अक्सर इंट्रासाइटोप्लास्मिक स्पर्म इंजेक्शन या ICSI के साथ), और फिर तैयार भ्रूण को सरोगेट के गर्भाशय में स्थानांतरित करना शामिल है। इसमें उपयोग होने वाली हार्मोनल दवाइयाँ, अल्ट्रासाउंड मॉनिटरिंग और रक्त परीक्षण का खर्च भी शामिल होता है। कई बार, एक से अधिक आईवीएफ चक्र की आवश्यकता हो सकती है, जिससे कुल लागत बढ़ जाती है।

सरोगेट के चिकित्सा व बीमा संबंधी खर्च

सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम, 2021 के अनुसार, सरोगेट माँ को गर्भावस्था के दौरान सभी चिकित्सा खर्चों के साथ-साथ 36 महीने का स्वास्थ्य बीमा कवर प्रदान करना इच्छुक माता-पिता के लिए अनिवार्य है। इसमें सरोगेट की प्रारंभिक चिकित्सा और मनोवैज्ञानिक स्क्रीनिंग, गर्भावस्था के नौ महीने की नियमित जाँच, दवाइयाँ, पोषक सप्लीमेंट्स, अस्पताल में भर्ती, प्रसव (सामान्य या सिजेरियन) और प्रसव के बाद की देखभाल शामिल है। इस बीमा का उद्देश्य गर्भावस्था से जुड़ी किसी भी जटिलता या प्रसव के बाद की चिकित्सा ज़रूरतों को पूरा करना है। सरोगेट को इस अवधि के लिए कोई मौद्रिक 'मुआवज़ा' नहीं दिया जा सकता, केवल चिकित्सा और बीमा संबंधी खर्च ही कवर किए जाते हैं।

भारत सरकार के सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम, 2021 के तहत, परोपकारी सरोगेसी ही मान्य है, जहाँ सरोगेट को गर्भधारण के लिए कोई प्रत्यक्ष भुगतान नहीं मिलता।

क्लीनिक और प्रशासनिक फीस

सरोगेसी प्रक्रिया में विभिन्न प्रशासनिक और समन्वय शुल्क शामिल होते हैं। इसमें फर्टिलिटी क्लीनिक द्वारा प्रदान की जाने वाली परामर्श सेवाएँ, प्रयोगशाला शुल्क (जैसे भ्रूण विज्ञान लैब का उपयोग), स्टाफ का वेतन, और पूरी प्रक्रिया के दौरान समन्वय का खर्च शामिल होता है। यह फीस क्लीनिक की सेवाओं की गुणवत्ता, प्रतिष्ठा और प्रदान की जाने वाली अतिरिक्त सहायता के आधार पर भिन्न हो सकती है। इसमें इच्छुक माता-पिता और सरोगेट दोनों के लिए आवश्यक चिकित्सा दस्तावेज़ों का प्रबंधन भी शामिल होता है।

कानूनी और परामर्श संबंधी खर्च

सरोगेसी एक कानूनी रूप से विनियमित प्रक्रिया है, जिसके लिए विस्तृत कानूनी दस्तावेज़ीकरण की आवश्यकता होती है। इसमें इच्छुक माता-पिता और सरोगेट के बीच एक सरोगेसी समझौता तैयार करना शामिल है, जिसमें दोनों पक्षों के अधिकारों और कर्तव्यों का स्पष्ट उल्लेख होता है। इसके अतिरिक्त, जिला मेडिकल बोर्ड से 'ज़रूरी' (Essentiality) और 'पात्रता' (Eligibility) प्रमाण पत्र प्राप्त करना अनिवार्य है। सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी (विनियमन) अधिनियम, 2021 के तहत, क्लीनिक और बैंक के पंजीकरण से जुड़े शुल्क भी अप्रत्यक्ष रूप से लागत में जुड़ सकते हैं। इन कानूनी प्रक्रियाओं को पूरा करने के लिए वकीलों और अन्य विशेषज्ञों की फीस एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनती है।

दवाइयाँ और सप्लीमेंट्स

आईवीएफ चक्र और गर्भावस्था को बनाए रखने के लिए विभिन्न दवाइयों और हार्मोनल सप्लीमेंट्स की ज़रूरत पड़ती है। इसमें इच्छुक माता-पिता के लिए अंडाशय को उत्तेजित करने वाली दवाइयाँ, और सरोगेट के लिए भ्रूण के आरोपण और गर्भावस्था को बनाए रखने वाली दवाइयाँ शामिल होती हैं। दवाइयों के ब्रांड और उनकी अवधि के आधार पर यह लागत भिन्न हो सकती है। यह आमतौर पर कुल खर्च का एक छोटा लेकिन महत्वपूर्ण हिस्सा होता है।

छिपे/अतिरिक्त खर्च जो आमतौर पर अनदेखे रह जाते हैं

चंडीगढ़ में सरोगेसी की लागत का अनुमान लगाते समय, कुछ अतिरिक्त या अप्रत्याशित खर्चों को ध्यान में रखना महत्वपूर्ण है, जो अक्सर अनदेखे रह जाते हैं:

  • चिकित्सा जटिलताएँ: गर्भावस्था के दौरान सरोगेट या भ्रूण को कोई अप्रत्याशित चिकित्सा जटिलता होने पर अतिरिक्त जाँच, दवाइयाँ या उपचार की आवश्यकता हो सकती है।
  • अतिरिक्त आईवीएफ चक्र: यदि पहला आईवीएफ चक्र सफल नहीं होता है, तो एक या अधिक अतिरिक्त चक्रों की आवश्यकता हो सकती है, जिससे खर्च काफी बढ़ जाता है।
  • डोनर गैमेट्स का उपयोग: यदि इच्छुक माता-पिता को अंडाणु या शुक्राणु डोनर की आवश्यकता होती है, तो डोनर की स्क्रीनिंग, दवाइयों और संग्रह का खर्च अतिरिक्त रूप से जुड़ जाता है।
  • यात्रा और आवास: यदि इच्छुक माता-पिता चंडीगढ़ के बाहर रहते हैं, तो क्लीनिक के दौरे, कानूनी प्रक्रियाओं और बच्चे के जन्म के समय यात्रा और आवास का खर्च वहन करना पड़ सकता है। यह लागत कई बार समग्र बजट पर भारी पड़ सकती है।
  • मनोवैज्ञानिक परामर्श: सरोगेसी भावनात्मक रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकती है। इच्छुक माता-पिता और सरोगेट दोनों के लिए अतिरिक्त मनोवैज्ञानिक परामर्श सत्रों की आवश्यकता हो सकती है।
  • बच्चे की जन्म के बाद की देखभाल: बच्चे के जन्म के बाद शुरुआती चिकित्सा जाँच, टीकाकरण और नवजात शिशु की विशेष देखभाल के खर्च शामिल हो सकते हैं।

मुख्य बातें

  • चंडीगढ़ में सरोगेसी की लागत कई मदों का योग है, जिसमें आईवीएफ, सरोगेट की चिकित्सा देखभाल, बीमा और कानूनी शुल्क प्रमुख हैं।
  • सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम, 2021 के तहत परोपकारी सरोगेसी ही वैध है, इसलिए सरोगेट को केवल चिकित्सा खर्च और अनिवार्य बीमा कवर किया जाता है, कोई मौद्रिक मुआवज़ा नहीं।
  • सरोगेसी की कुल अनुमानित लागत को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक आईवीएफ चक्रों की संख्या, डोनर गैमेट्स की आवश्यकता और किसी भी अप्रत्याशित चिकित्सा जटिलताएँ हैं।
  • कानूनी और प्रशासनिक शुल्क, जिसमें सरोगेसी समझौता और सरकारी प्रमाणपत्र शामिल हैं, कुल खर्च का एक अनिवार्य हिस्सा हैं।
  • इच्छुक माता-पिता को यात्रा, आवास और अप्रत्याशित चिकित्सा ज़रूरतों जैसे छिपे हुए या अतिरिक्त खर्चों के लिए भी बजट बनाना चाहिए।

चंडीगढ़ में उपलब्ध सरोगेसी पैकेज और उसमें क्या-क्या शामिल होता है?

चंडीगढ़ में सरोगेसी की प्रक्रिया से गुजरने वाले इच्छुक माता-पिता के लिए उपलब्ध पैकेज और उनकी सेवाओं को समझना अत्यंत महत्वपूर्ण है। भारत में परोपकारी सरोगेसी (altruistic surrogacy) का कानूनी प्रावधान होने के कारण, ये पैकेज मुख्य रूप से चिकित्सा प्रक्रियाओं, सरोगेट की देखभाल और कानूनी आवश्यकताओं के खर्चों पर केंद्रित होते हैं। सरोगेट को कोई वित्तीय मुआवज़ा नहीं दिया जाता, केवल उनके चिकित्सा खर्च और अनिवार्य बीमा ही कवर किया जाता है।

बेसिक बनाम मल्टी-साइकिल सरोगेसी पैकेज

चंडीगढ़ में सरोगेसी पैकेज को दो मुख्य श्रेणियों में बांटा जा सकता है: बेसिक पैकेज और मल्टी-साइकिल पैकेज। इनका अंतर मुख्य रूप से इसमें शामिल IVF (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) प्रयासों की संख्या और वित्तीय जोखिम प्रबंधन से संबंधित है।

बेसिक सरोगेसी पैकेज: इस पैकेज में आमतौर पर सरोगेसी प्रक्रिया के लिए एक IVF चक्र शामिल होता है। इसमें इच्छुक माता-पिता के लिए अंडे निकालने, भ्रूण निर्माण और सरोगेट को एक भ्रूण स्थानांतरण जैसी मानक चिकित्सा प्रक्रियाएं शामिल होती हैं। इसके अतिरिक्त, सरोगेट के प्रारंभिक चिकित्सा मूल्यांकन, गर्भावस्था के दौरान नियमित जांचें, डिलीवरी के खर्च और अनिवार्य 36 महीने का स्वास्थ्य बीमा भी इसका हिस्सा होते हैं। कानूनी दस्तावेज़ीकरण और अदालत की मंजूरी की प्रक्रियाएं भी शामिल होती हैं। यह पैकेज उन लोगों के लिए उपयुक्त हो सकता है जिनकी पहली कोशिश में सफलता की उच्च संभावना है।

मल्टी-साइकिल या 'गारंटीड' सरोगेसी पैकेज: मल्टी-साइकिल पैकेज में एक से अधिक IVF चक्र या भ्रूण स्थानांतरण के प्रयास शामिल होते हैं, जो पैकेज के प्रकार पर निर्भर करता है। ‘गारंटीड’ शब्द यहां अक्सर एक निश्चित संख्या में IVF प्रयासों या भ्रूण स्थानांतरण को संदर्भित करता है, जिसके तहत यदि अपेक्षित परिणाम (जैसे क्लिनिकल गर्भावस्था) निर्धारित प्रयासों के बाद भी प्राप्त नहीं होता है, तो क्लीनिक कुछ सेवाओं के लिए आंशिक वापसी या अतिरिक्त चक्र की पेशकश कर सकता है। यह समझना महत्वपूर्ण है कि भारत में कोई भी पैकेज बच्चे के जन्म की 'गारंटी' नहीं दे सकता। ये पैकेज शुरुआती लागत में अधिक हो सकते हैं, लेकिन यदि पहली कोशिश विफल हो जाती है तो बार-बार होने वाले खर्चों से बचाते हैं। सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम, 2021 के प्रावधानों के अनुसार, सरोगेट को उनके चिकित्सा खर्च और बीमा के अलावा कोई भी 'गारंटीड' वित्तीय मुआवज़ा नहीं दिया जा सकता है।

पैकेज में शामिल और बाहर रहने वाली सेवाएँ

सरोगेसी पैकेज में शामिल और बाहर रहने वाली सेवाओं को समझना आवश्यक है ताकि कोई अप्रत्याशित खर्च न हो:

आमतौर पर पैकेज में शामिल सेवाएँ:

  • इच्छुक माता-पिता के लिए IVF/ART प्रक्रिया (दवाएं, हार्मोन इंजेक्शन, अंडाणु पुनर्प्राप्ति)।
  • भ्रूण विकास और प्रयोगशाला शुल्क।
  • सरोगेट के लिए प्रारंभिक चिकित्सा और मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन।
  • सरोगेट को भ्रूण स्थानांतरण।
  • सरोगेट की गर्भावस्था के दौरान नियमित जांचें और प्रसव-पूर्व देखभाल।
  • प्रसव के दौरान अस्पताल का खर्च (नॉर्मल डिलीवरी या सिजेरियन)।
  • कानून द्वारा अनिवार्य 36 महीने का सरोगेट स्वास्थ्य बीमा कवर।
  • कानूनी परामर्श और दस्तावेज़ तैयार करना (जैसे सरोगेसी समझौता, अदालत की मंजूरी)।
  • बच्चे के जन्म प्रमाण पत्र से संबंधित कानूनी सहायता।
  • सरोगेट के लिए पोषण संबंधी सहायता और गर्भावस्था से संबंधित अन्य आवश्यक चिकित्सा खर्च।

आमतौर पर पैकेज से बाहर रहने वाली सेवाएँ:

  • डोनर गेमेट्स (अंडाणु/शुक्राणु): यदि आवश्यक हो, तो इसका खर्च पैकेज में शामिल नहीं होता।
  • प्री-इम्प्लांटेशन जेनेटिक टेस्टिंग (PGT): यह विशेष जांच अक्सर पैकेज का हिस्सा नहीं होती।
  • चिकित्सा जटिलताएँ: यदि सरोगेट या नवजात शिशु को मानक बीमा कवरेज से अधिक गंभीर चिकित्सा जटिलताएँ होती हैं, तो अतिरिक्त खर्च वहन करना पड़ सकता है।
  • अतिरिक्त कानूनी फीस: असाधारण कानूनी मामलों के लिए अतिरिक्त शुल्क लग सकता है।
  • यात्रा और आवास: इच्छुक माता-पिता के यात्रा, ठहरने और भोजन का खर्च आमतौर पर पैकेज में शामिल नहीं होता है।
  • नवजात शिशु की विशेष देखभाल: यदि बच्चे को जन्म के बाद विशेष NICU की आवश्यकता होती है, तो इसका खर्च अक्सर पैकेज में शामिल नहीं होता।

गारंटी पैकेज लेते समय किन शर्तों को पढ़ना ज़रूरी है

भारत में सरोगेसी के कानूनी ढांचे को देखते हुए, 'गारंटी' पैकेज चुनते समय सभी शर्तों को बहुत सावधानी से पढ़ना चाहिए। निम्नलिखित बिंदुओं पर विशेष ध्यान दें:

  1. शामिल IVF चक्रों की संख्या: पैकेज में कितने भ्रूण स्थानांतरण या IVF चक्र शामिल हैं, यह स्पष्ट होना चाहिए।
  2. सफलता की परिभाषा: पैकेज में 'सफलता' का क्या अर्थ है (जैसे क्लिनिकल गर्भावस्था)? यह स्पष्ट होना चाहिए कि बच्चे के जन्म की कोई 'गारंटी' नहीं हो सकती।
  3. रिफंड नीति: यदि सफलता नहीं मिलती, तो रिफंड की शर्तें क्या हैं? किन परिस्थितियों में रिफंड लागू नहीं होगा?
  4. शामिल और बाहर की सेवाएँ: सुनिश्चित करें कि आप पैकेज के भीतर सभी सेवाओं और बाहर की सेवाओं को ठीक से समझते हैं।
  5. पात्रता मानदंड: क्या इच्छुक माता-पिता को अगले चक्र के लिए कुछ शर्तों को पूरा करना होगा यदि पहला असफल हो जाता है?
  6. समय-सीमा: पैकेज में शामिल सभी चक्रों को पूरा करने के लिए कोई समय-सीमा है या नहीं।
  7. कानूनी अनुपालन: सुनिश्चित करें कि पूरा पैकेज सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम, 2021 और संबंधित नियमों का पूरी तरह से पालन करता है, खासकर सरोगेट के अधिकारों के संबंध में।

चंडीगढ़ में सरोगेसी की लागत को समझने के लिए विभिन्न पैकेजों और उनकी शर्तों का गहन विश्लेषण महत्वपूर्ण है। यह सुनिश्चित करता है कि आप अपनी यात्रा के लिए एक सूचित और पारदर्शी निर्णय लें। अधिक जानकारी के लिए, आप जोधपुर में सरोगेसी की लागत और ग्वालियर में सरोगेसी की लागत से संबंधित जानकारी भी देख सकते हैं, क्योंकि कई बुनियादी पहलू समान रहते हैं।

मुख्य बातें

  • चंडीगढ़ में सरोगेसी पैकेज बेसिक और मल्टी-साइकिल (या 'गारंटीड') श्रेणियों में उपलब्ध हैं, जो IVF प्रयासों की संख्या में भिन्न होते हैं।
  • 'गारंटीड' पैकेज बच्चे के जन्म की नहीं, बल्कि विशिष्ट चिकित्सा प्रक्रियाओं या क्लिनिकल गर्भावस्था के लिए अतिरिक्त प्रयासों की गारंटी देते हैं, और यह कानूनी ढांचे के भीतर होता है।
  • पैकेजों में आमतौर पर IVF प्रक्रिया, सरोगेट की चिकित्सा देखभाल, 36 महीने का अनिवार्य बीमा, और कानूनी दस्तावेज़ीकरण शामिल होता है।
  • डोनर गेमेट्स, PGT, असाधारण चिकित्सा जटिलताएँ, और यात्रा/आवास जैसे खर्च अक्सर पैकेज से बाहर रहते हैं।
  • 'गारंटी' पैकेज चुनते समय, शामिल चक्रों की संख्या, सफलता की परिभाषा, रिफंड नीति और कानूनी अनुपालन जैसी शर्तों को ध्यान से पढ़ना महत्वपूर्ण है।

लागत को प्रभावित करने वाले मुख्य कारक चंडीगढ़ में

चंडीगढ़ में सरोगेसी की कुल लागत कई परस्पर जुड़े कारकों पर निर्भर करती है। Surrogacy (Regulation) Act, 2021 के तहत भारत में केवल परोपकारी (altruistic) सरोगेसी की अनुमति है, जिसका अर्थ है कि सरोगेट माता को चिकित्सा खर्च और अनिवार्य बीमा के अलावा कोई मौद्रिक मुआवज़ा नहीं दिया जा सकता। ऐसे में, लागत मुख्य रूप से चिकित्सीय प्रक्रियाओं, कानूनी औपचारिकताओं और संबंधित सेवाओं के इर्द-गिर्द केंद्रित होती है। इन कारकों को समझना इच्छित माता-पिता को बेहतर योजना बनाने में मदद कर सकता है।

1. IVF प्रयासों की संख्या, अंडाणु/शुक्राणु डोनर की ज़रूरत

सरोगेसी प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण हिस्सा इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF) होता है। यदि पहले IVF प्रयास में गर्भाधान सफल नहीं होता है, तो अतिरिक्त चक्रों की आवश्यकता हो सकती है, जिससे लागत में वृद्धि होती है। प्रत्येक IVF चक्र में हार्मोनल दवाएँ, अंडाणु पुनर्प्राप्ति, निषेचन, भ्रूण संवर्धन और भ्रूण स्थानांतरण जैसे चरण शामिल होते हैं, जिनमें से प्रत्येक का अपना खर्च होता है।

इसके अतिरिक्त, यदि इच्छित माता-पिता चिकित्सा कारणों से अपने स्वयं के अंडाणु या शुक्राणु का उपयोग करने में असमर्थ होते हैं, तो उन्हें डोनर अंडाणु या शुक्राणु की आवश्यकता पड़ सकती है। असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (रेगुलेशन) एक्ट, 2021 और उसके नियमों के अनुसार, डोनर गेमेट्स का उपयोग कुछ विशिष्ट स्थितियों में ही अनुमेय है। डोनर गेमेट्स के लिए डोनर की स्क्रीनिंग, गेमेट्स की खरीद और उनसे जुड़ी कानूनी व प्रशासनिक लागतें कुल खर्च में जुड़ जाती हैं। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) दिशानिर्देश ऐसे मामलों में पारदर्शिता और नैतिक आचरण सुनिश्चित करते हैं।

2. सरोगेट की आयु, स्वास्थ्य व चिकित्सा जटिलताएँ

सरोगेट माता की आयु, स्वास्थ्य स्थिति और गर्भावस्था के दौरान उत्पन्न होने वाली कोई भी चिकित्सा जटिलताएँ लागत को सीधे प्रभावित करती हैं। Surrogacy Act के अनुसार, सरोगेट की आयु 25 से 35 वर्ष के बीच होनी चाहिए और उसका अपना एक स्वस्थ बच्चा होना चाहिए। प्रक्रिया शुरू करने से पहले सरोगेट माता की व्यापक स्वास्थ्य जाँच की जाती है, जिसमें शारीरिक, मानसिक और प्रजनन स्वास्थ्य आकलन शामिल हैं।

यदि सरोगेट माता को कोई अंतर्निहित स्वास्थ्य समस्या है, या यदि गर्भावस्था के दौरान जटिलताएँ (जैसे गर्भकालीन मधुमेह, उच्च रक्तचाप, या प्रसव संबंधी समस्याएँ) उत्पन्न होती हैं, तो अतिरिक्त चिकित्सा देखभाल, परामर्श और विशिष्ट दवाओं की आवश्यकता हो सकती है। ये सभी खर्च, जो अनिवार्य 36 महीने के सरोगेट बीमा पॉलिसी के दायरे में नहीं आते, कुल लागत में वृद्धि कर सकते हैं। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि कानून सरोगेट के सभी चिकित्सा खर्चों और बीमा को कवर करना अनिवार्य करता है।

3. क्लीनिक की प्रतिष्ठा, सफलता दर और स्थान का प्रभाव

चंडीगढ़ में सरोगेसी क्लीनिक का चुनाव भी लागत पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालता है। एक स्थापित क्लीनिक जिसकी सफलता दर अधिक होती है, आमतौर पर उन्नत तकनीकों, अनुभवी फर्टिलिटी विशेषज्ञों और कुशल चिकित्सा कर्मचारियों के कारण अधिक शुल्क लेता है। उच्च सफलता दर वाले क्लीनिक अक्सर आधुनिक प्रयोगशाला सुविधाओं और कठोर गुणवत्ता नियंत्रण प्रक्रियाओं में निवेश करते हैं, जो संभावित रूप से सफल गर्भावस्था की संभावनाओं को बढ़ा सकते हैं और बार-बार IVF चक्रों की आवश्यकता को कम कर सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए, आप जोधपुर में सरोगेसी की लागत या कोच्चि में सरोगेसी की लागत से संबंधित जानकारी भी देख सकते हैं।

क्लीनिक का भौगोलिक स्थान भी लागत को प्रभावित करता है। चंडीगढ़ के प्रमुख शहरी क्षेत्रों में स्थित क्लीनिकों का किराया, परिचालन व्यय और स्टाफ वेतन अधिक हो सकता है, जिसका असर उनकी सेवाओं की कुल लागत पर पड़ता है। हालाँकि, प्रतिष्ठित क्लीनिकों का चयन करने से अक्सर बेहतर परिणाम मिलते हैं, जो कई बार शुरुआती उच्च लागत को उचित ठहराता है, क्योंकि यह प्रक्रिया की दोहराव की आवश्यकता को कम कर सकता है। क्लीनिक का चुनाव करते समय उसकी मान्यता, सफलता दरों और दी जाने वाली सेवाओं की गुणवत्ता पर ध्यान देना महत्वपूर्ण है।

मुख्य बातें

  • सरोगेसी लागत में IVF चक्रों की संख्या, डोनर गेमेट्स (यदि आवश्यक हो) और चिकित्सा जटिलताएँ महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
  • सरोगेट माता का स्वास्थ्य और गर्भावस्था के दौरान उत्पन्न होने वाली कोई भी अनपेक्षित चिकित्सा जटिलताएँ कुल खर्च को बढ़ा सकती हैं।
  • प्रतिष्ठित क्लीनिक, जो उच्च सफलता दर और विशेषज्ञता प्रदान करते हैं, उनकी फीस अधिक हो सकती है, लेकिन वे बेहतर परिणाम की संभावना देते हैं।
  • भारत में केवल परोपकारी सरोगेसी वैध है, जिसमें सरोगेट माता को केवल चिकित्सा खर्च और अनिवार्य बीमा कवर किया जाता है।

सरोगेसी की कानूनी लागत और बीमा (Surrogacy Act 2021 के तहत)

भारत में सरोगेसी प्रक्रिया अब सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम, 2021 और सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी (विनियमन) अधिनियम, 2021 द्वारा सख्ती से नियंत्रित होती है। इन कानूनों का प्राथमिक उद्देश्य परोपकारी सरोगेसी को बढ़ावा देना और व्यावसायिक सरोगेसी को प्रतिबंधित करना है। चंडीगढ़ में सरोगेसी प्रक्रिया के दौरान, इच्छुक दम्पति या महिला को केवल सरोगेसी से संबंधित चिकित्सा और कानूनी खर्च वहन करने होते हैं, सरोगेट माता को कोई मौद्रिक मुआवज़ा नहीं दिया जाता। इन कानूनी और बीमा संबंधी खर्चों को समझना कुल लागत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

अनिवार्य 36 महीने का सरोगेट बीमा खर्च

सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम, 2021 के अनुसार, इच्छुक दम्पति या महिला के लिए यह अनिवार्य है कि वे सरोगेट माता के लिए प्रसव के बाद 36 महीने की अवधि के लिए स्वास्थ्य बीमा कवर प्रदान करें। यह बीमा सरोगेट माता को गर्भावस्था के दौरान या प्रसव के बाद होने वाली किसी भी जटिलता या बीमारी को कवर करने के लिए होता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरोगेट माता को उसकी स्वास्थ्य आवश्यकताओं के लिए पर्याप्त चिकित्सा सहायता मिले, जिससे उसे कोई आर्थिक बोझ न पड़े।

  • बीमा की प्रकृति: यह एक व्यापक स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी होती है जो गर्भावस्था, प्रसव, प्रसवोत्तर जटिलताओं और अन्य संबंधित चिकित्सा स्थितियों को कवर करती है।
  • अनुमानित लागत: चंडीगढ़ में इस अनिवार्य 36 महीने के बीमा का खर्च आमतौर पर ₹1.5 लाख से ₹3 लाख तक हो सकता है, जो बीमा प्रदाता और पॉलिसी के कवरेज पर निर्भर करता है। यह लागत सरोगेसी के कुल खर्च का एक अभिन्न अंग है और इसे अलग से इच्छुक दम्पति/महिला द्वारा वहन किया जाता है।

कानूनी अनुबंध, सहमति व प्रमाणपत्र पर आने वाला खर्च

सरोगेसी प्रक्रिया शुरू करने से पहले, विभिन्न कानूनी औपचारिकताओं को पूरा करना आवश्यक होता है। इसमें इच्छुक दम्पति/महिला और सरोगेट माता के बीच एक कानूनी अनुबंध तैयार करना शामिल है। यह अनुबंध सभी नियमों और शर्तों, अधिकारों और जिम्मेदारियों को स्पष्ट रूप से परिभाषित करता है, ताकि भविष्य में कोई विवाद न हो। इसके अतिरिक्त, सरोगेसी प्रक्रिया के लिए 'अनिवार्यता प्रमाणपत्र' (Essentiality Certificate) और 'पात्रता प्रमाणपत्र' (Eligibility Certificate) प्राप्त करना भी आवश्यक है।

  • कानूनी अनुबंध और सहमति: इसमें वकीलों की फीस शामिल होती है जो अनुबंध का मसौदा तैयार करने, उसकी समीक्षा करने और उसे नोटरीकृत कराने का काम करते हैं। यह सुनिश्चित करता है कि दोनों पक्ष कानूनी रूप से सुरक्षित हैं।
  • प्रमाणपत्रों की प्रक्रिया: इन प्रमाणपत्रों में इच्छुक दम्पति की चिकित्सा स्थिति, सरोगेट की पात्रता और बच्चे के माता-पिता के रूप में उनकी इच्छानुसार पहचान की पुष्टि शामिल होती है। इस प्रक्रिया में दस्तावेज़ तैयार करने और उन्हें उचित अधिकारियों को प्रस्तुत करने का खर्च आता है।
  • अनुमानित लागत: चंडीगढ़ में कानूनी सेवाओं और दस्तावेज़ तैयार करने का खर्च आमतौर पर ₹50,000 से ₹1.5 लाख तक हो सकता है, जो वकील की विशेषज्ञता और आवश्यक दस्तावेज़ीकरण की जटिलता पर निर्भर करता है। भारत में सरोगेसी कानूनों के बारे में अधिक जानकारी के लिए, आप सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम, 2021 को देख सकते हैं।

District Magistrate व बोर्ड पंजीकरण से जुड़ी फीस

सरोगेसी प्रक्रिया को कानूनी रूप से मान्य बनाने के लिए, इच्छुक दम्पति/महिला को जिला चिकित्सा बोर्ड (District Medical Board) से 'अनिवार्यता प्रमाणपत्र' प्राप्त करना होता है। यह प्रमाणपत्र चिकित्सा आवश्यकता की पुष्टि करता है कि इच्छुक दम्पति को सरोगेसी की आवश्यकता क्यों है। इसके बाद, प्रक्रिया को राज्य सरोगेसी बोर्ड (State Surrogacy Board) के पास भी पंजीकृत किया जाता है, जो पूरी प्रक्रिया की निगरानी करता है।

  • जिला मजिस्ट्रेट की भूमिका: जिला मजिस्ट्रेट इस प्रक्रिया में शामिल होते हैं, खासकर आवश्यक प्रमाणपत्रों के सत्यापन और जारी करने में। इस प्रक्रिया से जुड़ी कुछ प्रशासनिक फीस और औपचारिकताओं को पूरा करने का खर्च आ सकता है।
  • बोर्ड पंजीकरण: एआरटी (विनियमन) अधिनियम, 2021 के तहत सभी एआरटी क्लीनिक और सरोगेसी क्लीनिकों को राष्ट्रीय और राज्य एआरटी और सरोगेसी बोर्डों के साथ पंजीकृत होना अनिवार्य है। जबकि क्लीनिक पंजीकरण शुल्क का भुगतान करते हैं, इच्छुक दम्पति/महिला के लिए आवेदन प्रक्रिया में कुछ मामूली सरकारी शुल्क या प्रशासनिक लागत शामिल हो सकती है। इन फीस का उद्देश्य प्रक्रिया की वैधता और विनियमन सुनिश्चित करना है। सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी (विनियमन) अधिनियम, 2021 इस पंजीकरण प्रक्रिया का विस्तार से वर्णन करता है।
  • अनुमानित लागत: जिला मजिस्ट्रेट और बोर्ड पंजीकरण से जुड़ी प्रशासनिक फीस और आवेदन शुल्क आमतौर पर ₹10,000 से ₹30,000 तक हो सकते हैं। ये शुल्क सरकारी प्रक्रियाओं और दस्तावेज़ सत्यापन से संबंधित होते हैं। चंडीगढ़ में सरोगेसी की लागत का आकलन करते समय इन सभी कानूनी और प्रशासनिक खर्चों को ध्यान में रखना महत्वपूर्ण है। आप सरोगेसी की कुल लागत के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

मुख्य बातें

  • सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम, 2021 के तहत चंडीगढ़ में केवल परोपकारी सरोगेसी ही कानूनी है, जिसमें सरोगेट माता को कोई मौद्रिक मुआवज़ा नहीं दिया जाता।
  • इच्छुक दम्पति/महिला के लिए सरोगेट माता को 36 महीने का अनिवार्य स्वास्थ्य बीमा कवर प्रदान करना आवश्यक है, जिसकी अनुमानित लागत ₹1.5 लाख से ₹3 लाख तक हो सकती है।
  • कानूनी अनुबंधों, सहमति पत्रों और 'अनिवार्यता' व 'पात्रता' प्रमाणपत्रों को तैयार करने और सत्यापित करने में ₹50,000 से ₹1.5 लाख तक का खर्च आ सकता है।
  • जिला चिकित्सा बोर्ड और राज्य सरोगेसी बोर्ड के साथ पंजीकरण और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में आमतौर पर ₹10,000 से ₹30,000 तक की फीस शामिल होती है।
  • ये सभी कानूनी और प्रशासनिक लागतें सरोगेसी प्रक्रिया के कुल खर्च का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होती हैं और प्रक्रिया की वैधता सुनिश्चित करने के लिए अनिवार्य हैं।

चंडीगढ़ में सरोगेसी पर पैसा खर्च करने से पहले पात्रता ज़रूर जाँचें

चंडीगढ़ में सरोगेसी की लागत और पैकेज को समझने के साथ-साथ, इस प्रक्रिया में आगे बढ़ने से पहले पात्रता मानदंडों को समझना सबसे महत्वपूर्ण कदम है। भारत में सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम, 2021, और उससे संबंधित नियम (जिनमें 2024 के संशोधन भी शामिल हैं) सरोगेसी के लिए इच्छुक दंपति, इच्छुक महिला और सरोगेट माँ के लिए कड़े पात्रता नियम निर्धारित करते हैं। इन शर्तों को पूरा करना कानूनी और चिकित्सकीय रूप से सफल सरोगेसी यात्रा के लिए अनिवार्य है। भारत में सरोगेसी की लागत से जुड़ी अन्य जानकारी के लिए आप हमारे ब्लॉग पोस्ट भी पढ़ सकते हैं। Vinsfertility का यह खंड आपको चंडीगढ़ में सरोगेसी के लिए आवश्यक पात्रता शर्तों की विस्तृत जानकारी प्रदान करेगा ताकि आप पूरी तैयारी के साथ इस ओर कदम बढ़ा सकें।

पक्ष (Party) आयु/शर्त (Age/Condition)
इच्छुक दंपति (Intending Couple)
  • आयु: पुरुष 26-55 वर्ष, महिला 25-50 वर्ष।
  • स्थिति: कानूनी रूप से विवाहित भारतीय नागरिक।
  • चिकित्सीय आवश्यकता: एक या दोनों भागीदारों की चिकित्सकीय रूप से सिद्ध बांझपन (infertility) की स्थिति, जिसे पंजीकृत चिकित्सा व्यवसायी द्वारा प्रमाणित किया गया हो।
  • अन्य: दंपति का कोई भी जीवित जैविक, गोद लिया या सरोगेसी से जन्मा बच्चा न हो (दिव्यांग या जानलेवा बीमारी से ग्रस्त बच्चों के अपवाद)।
इच्छुक महिला (Intending Woman)
  • आयु: 35-45 वर्ष।
  • स्थिति: भारतीय नागरिक, विधवा या तलाकशुदा।
  • चिकित्सीय आवश्यकता: पंजीकृत चिकित्सा व्यवसायी द्वारा प्रमाणित चिकित्सकीय स्थिति जो उन्हें बच्चे पैदा करने में असमर्थ बनाती हो।
  • अन्य: महिला का कोई भी जीवित जैविक, गोद लिया या सरोगेसी से जन्मा बच्चा न हो (दिव्यांग या जानलेवा बीमारी से ग्रस्त बच्चों के अपवाद)।
सरोगेट माता (Surrogate Mother)
  • आयु: 25-35 वर्ष।
  • स्थिति: विवाहित भारतीय महिला।
  • बच्चा: उसका अपना कम से कम एक जीवित जैविक बच्चा हो।
  • सरोगेसी अनुभव: जीवन में केवल एक बार सरोगेट माँ बन सकती है।
  • अन्य: चिकित्सकीय रूप से फिट और सरोगेसी प्रक्रिया के लिए सक्षम होनी चाहिए। सरोगेसी केवल परोपकारी होनी चाहिए।

स्रोत: सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम, 2021 एवं सरोगेसी (विनियमन) नियम, 2022 और 2024 संशोधन।

इच्छुक दंपति, अविवाहित महिला व सरोगेट के लिए कानूनी शर्तें

भारत में सरोगेसी कानून एक विस्तृत कानूनी ढाँचा प्रदान करता है जिसका उद्देश्य सरोगेसी प्रक्रिया को विनियमित करना और इसमें शामिल सभी पक्षों के अधिकारों की रक्षा करना है, यह सुनिश्चित करते हुए कि सरोगेसी केवल परोपकारी (altruistic) उद्देश्यों के लिए हो।

इच्छुक दंपति के लिए

इच्छुक दंपति को भारतीय नागरिक होना चाहिए और कानूनन विवाहित होना चाहिए। पुरुष की आयु 26 से 55 वर्ष और महिला की आयु 25 से 50 वर्ष के बीच होनी चाहिए। उन्हें चिकित्सकीय रूप से सिद्ध बांझपन से पीड़ित होना चाहिए। सामान्यतः, दंपति का कोई भी जीवित जैविक, गोद लिया या सरोगेसी के माध्यम से जन्मा बच्चा नहीं होना चाहिए, सिवाय अगर बच्चे को कोई गंभीर बीमारी या शारीरिक/मानसिक विकलांगता हो।

इच्छुक महिला (विधवा या तलाकशुदा) के लिए

अधिनियम एक अकेली भारतीय विधवा या तलाकशुदा महिला को भी सरोगेसी के माध्यम से बच्चा प्राप्त करने की अनुमति देता है, बशर्ते उसकी आयु 35 से 45 वर्ष के बीच हो। उसे भी चिकित्सकीय रूप से सिद्ध बांझपन की समस्या होनी चाहिए। इच्छुक दंपति की तरह, उसका भी कोई जीवित बच्चा नहीं होना चाहिए (उपर्युक्त अपवादों के साथ)।

सरोगेट माता के लिए

सरोगेट माँ भारतीय नागरिक, विवाहित और 25 से 35 वर्ष की आयु के बीच होनी चाहिए। यह अनिवार्य है कि उसका अपना कम से कम एक जीवित जैविक बच्चा हो। कानून यह भी कहता है कि एक महिला अपने जीवनकाल में केवल एक बार सरोगेट माँ बन सकती है। सरोगेट माँ को चिकित्सकीय रूप से फिट होना चाहिए और उसे अपनी स्वतंत्र और सूचित सहमति देनी चाहिए। सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम, 2021 के तहत, सरोगेट माँ को इच्छुक दंपति द्वारा कवर किए गए व्यापक बीमा पॉलिसी का लाभ मिलना अनिवार्य है। आप जबलपुर में सरोगेसी की लागत या अन्य शहरों में सरोगेसी से जुड़ी जानकारी भी हमारे ब्लॉग्स में पा सकते हैं।

Essentiality और Eligibility Certificate की अनिवार्यता

सरोगेसी की प्रक्रिया शुरू करने के लिए, भारत में दो प्रमुख प्रमाणपत्र प्राप्त करना अनिवार्य है: Essentiality Certificate (आवश्यकता प्रमाणपत्र) और Eligibility Certificate (पात्रता प्रमाणपत्र)। ये प्रमाणपत्र सुनिश्चित करते हैं कि सरोगेसी कानूनी और नैतिक दिशानिर्देशों के तहत की जा रही है, जिसका विनियमन सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम, 2021 और संबंधित नियमों के तहत होता है।

Essentiality Certificate (आवश्यकता प्रमाणपत्र)

यह प्रमाणपत्र इच्छुक दंपति या इच्छुक महिला की ओर से जिला मेडिकल बोर्ड द्वारा जारी किया जाता है, जो प्रमाणित करता है कि:

  1. इच्छुक दंपति या इच्छुक महिला को चिकित्सकीय रूप से सिद्ध बांझपन की स्थिति है जिसके लिए सरोगेसी आवश्यक है।
  2. सरोगेसी की प्रक्रिया राष्ट्रीय और राज्य सरोगेसी बोर्डों द्वारा मान्यता प्राप्त क्लीनिक में ही की जाएगी।
  3. सरोगेट माँ के लिए 36 महीने की अवधि की बीमा पॉलिसी ली गई है।
  4. इच्छुक दंपति/महिला ने जन्म लेने वाले बच्चे की देखभाल और पालन-पोषण का वचन दिया है।

Eligibility Certificate (पात्रता प्रमाणपत्र)

यह प्रमाणपत्र सरोगेट माँ के लिए जिला मेडिकल बोर्ड द्वारा जारी किया जाता है, जो प्रमाणित करता है कि:

  1. सरोगेट माँ भारतीय नागरिक, विवाहित, 25 से 35 वर्ष की आयु के बीच है और उसका अपना कम से कम एक जीवित बच्चा है।
  2. वह चिकित्सकीय रूप से सरोगेसी के लिए फिट है।
  3. उसने सरोगेसी के लिए अपनी स्वतंत्र और सूचित सहमति दी है।
  4. उसने अपने जीवन में केवल एक बार ही सरोगेसी की है।

ये दोनों प्रमाणपत्र सरोगेसी प्रक्रिया की वैधता और सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं। इनके बिना कोई भी सरोगेसी प्रक्रिया अवैध मानी जाएगी। अधिनियम का उद्देश्य यह भी सुनिश्चित करना है कि बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र इच्छुक दंपति/महिला के नाम पर जारी हो।

मुख्य बातें

  • चंडीगढ़ में सरोगेसी शुरू करने से पहले, इच्छुक दंपति, इच्छुक महिला और सरोगेट माँ को भारतीय सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम, 2021 के तहत निर्धारित सभी पात्रता शर्तों को पूरा करना अनिवार्य है।
  • इच्छुक दंपति के लिए आयु (पुरुष 26-55, महिला 25-50), वैवाहिक स्थिति (विवाहित भारतीय नागरिक), और चिकित्सकीय रूप से प्रमाणित बांझपन जैसी शर्तें आवश्यक हैं।
  • विधवा या तलाकशुदा इच्छुक महिला के लिए आयु (35-45) और चिकित्सकीय आवश्यकताएँ प्रमुख हैं, साथ ही कोई जीवित बच्चा न होने की शर्त भी लागू होती है (कुछ अपवादों के साथ)।
  • सरोगेट माँ को विवाहित भारतीय महिला (25-35 आयु वर्ग), जिसका कम से कम एक जीवित जैविक बच्चा हो, और जो चिकित्सकीय रूप से फिट हो, होना चाहिए। वह जीवन में केवल एक बार सरोगेट बन सकती है।
  • सरोगेसी प्रक्रिया को कानूनी रूप से आगे बढ़ाने के लिए जिला मेडिकल बोर्ड से Essentiality Certificate (इच्छुक पक्ष के लिए) और Eligibility Certificate (सरोगेट के लिए) प्राप्त करना अनिवार्य है।
  • यह सुनिश्चित करना कि सभी कानूनी और पात्रता आवश्यकताओं को पूरा किया गया है, एक सुरक्षित, नैतिक और कानूनी सरोगेसी यात्रा की नींव रखता है।

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Dr. Sunita Singh Rathore

Dr. Sunita Singh Rathore

Dr. Sunita Singh Rathore is a highly experienced fertility specialist with over 15 years of expertise in assisted reproductive techniques. She has helped numerous couples achieve their dream of parenthood with a compassionate and patient-centric approach.