विशाखापट्टनम में सरोगेसी की लागत 2026 कितनी है?
विशाखापट्टनम में 2026 में सरोगेसी की अनुमानित लागत आमतौर पर ₹10,00,000 से ₹18,00,000 तक हो सकती है। यह लागत भारत में लागू परोपकारी (altruistic) सरोगेसी कानून के तहत आने वाले विभिन्न खर्चों, जैसे आईवीएफ प्रक्रिया, सरोगेट के चिकित्सा व्यय, कानूनी शुल्क और अनिवार्य बीमा को दर्शाती है। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि सरोगेट माँ को कानून के अनुसार कोई मौद्रिक मुआवज़ा नहीं दिया जाता है, केवल उनके चिकित्सा और बीमा संबंधी खर्चों का वहन किया जाता है।
विशाखापट्टनम में सरोगेसी की लागत को समझना इच्छुक माता-पिता के लिए एक महत्वपूर्ण पहला कदम है, जो भारत में परिवार बनाने की योजना बना रहे हैं। यह ब्लॉग पोस्ट, Vinsfertility द्वारा प्रस्तुत, "विशाखापट्टनम में सरोगेसी की लागत 2026: खर्च, पैकेज व पूरी जानकारी" शीर्षक के तहत, आपको इस जटिल विषय पर व्यापक जानकारी प्रदान करेगा। 2021 के सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम और उसके बाद के नियमों के लागू होने के साथ, भारत में सरोगेसी का परिदृश्य बदल गया है, जिससे परोपकारी सरोगेसी ही एकमात्र कानूनी विकल्प रह गया है। नतीजतन, लागत संरचना अब मुख्य रूप से चिकित्सा प्रक्रियाओं, कानूनी औपचारिकताओं और सरोगेट के स्वास्थ्य संबंधी देखभाल पर केंद्रित है।
सरोगेसी की लागत को प्रभावित करने वाले मुख्य कारक
विशाखापट्टनम में सरोगेसी की कुल लागत कई कारकों पर निर्भर करती है। ये कारक केस-दर-केस भिन्न हो सकते हैं और अंतिम बिल को काफी हद तक प्रभावित करते हैं। इन प्रमुख कारकों को समझना इच्छित माता-पिता को बेहतर वित्तीय योजना बनाने में मदद कर सकता है।
1. क्लीनिक का चयन और सेवाएँ
वह प्रजनन क्लीनिक जिसे आप विशाखापट्टनम में चुनते हैं, लागत पर सीधा प्रभाव डालता है। प्रतिष्ठित क्लीनिक, जिनके पास अनुभवी विशेषज्ञ, आधुनिक उपकरण और उच्च सफलता दर होती है, उनकी फीस थोड़ी अधिक हो सकती है। इसमें आईवीएफ प्रक्रिया का शुल्क, लैब शुल्क, भ्रूणविज्ञानी का शुल्क और अन्य बुनियादी नैदानिक परीक्षण शामिल होते हैं। क्लीनिक की भौगोलिक स्थिति और उसके द्वारा प्रदान की जाने वाली अतिरिक्त सेवाओं की गुणवत्ता भी लागत को प्रभावित कर सकती है।
2. इच्छित माता-पिता का मेडिकल इतिहास
इच्छित माता-पिता का चिकित्सा इतिहास सरोगेसी की लागत को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित कर सकता है। यदि बांझपन के कारण जटिल हैं, तो अतिरिक्त परीक्षण, दवाइयाँ या विशेष आईवीएफ तकनीक की आवश्यकता हो सकती है। उदाहरण के लिए, यदि अंडा या शुक्राणु दाता (donor gamete) की आवश्यकता होती है (जो कुछ विशेष चिकित्सकीय स्थितियों में भारत में सरोगेसी (विनियमन) नियम, 2022/2024 के तहत अनुमत है), तो इससे लागत बढ़ सकती है। इसके अलावा, यदि पिछली आईवीएफ साइकिल विफल रही हैं, तो प्रक्रिया को दोहराने की लागत भी बढ़ेगी।
3. सरोगेट माँ का चिकित्सा और कानूनी खर्च
भारत में सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम, 2021 के अनुसार, सरोगेट माँ को कोई मौद्रिक मुआवज़ा नहीं दिया जा सकता है, लेकिन उनके सभी चिकित्सा खर्चों का वहन इच्छित माता-पिता द्वारा किया जाना अनिवार्य है। इसमें गर्भावस्था के दौरान की जाँचें, प्रसव का खर्च (सामान्य या सिज़ेरियन सेक्शन), गर्भावस्था से संबंधित जटिलताओं का इलाज और प्रसवोत्तर देखभाल शामिल है। इसके अलावा, सरोगेट माँ के लिए 36 महीने का अनिवार्य बीमा भी कराना होता है, जिसका प्रीमियम लागत में जुड़ता है। सरोगेसी के लिए आवश्यक कानूनी दस्तावेज़ों और समझौतों का मसौदा तैयार करने के लिए कानूनी शुल्क भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। आप सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम, 2021 के प्रावधानों में इसकी विस्तृत जानकारी देख सकते हैं।
4. अतिरिक्त आईवीएफ साइकिल या भ्रूण स्थानांतरण
यदि पहली आईवीएफ साइकिल सफल नहीं होती है या पहली बार में गर्भावस्था स्थापित नहीं होती है, तो अतिरिक्त आईवीएफ साइकिल या भ्रूण स्थानांतरण की आवश्यकता हो सकती है। प्रत्येक अतिरिक्त प्रयास में दवाइयाँ, क्लीनिक शुल्क और अन्य संबंधित खर्च शामिल होते हैं, जिससे कुल लागत में वृद्धि होती है। कई बार, एक सफल गर्भावस्था सुनिश्चित करने के लिए एकाधिक प्रयासों की आवश्यकता हो सकती है। सरोगेसी के नियमों और प्रक्रियाओं के बारे में अधिक जानने के लिए, आप सरोगेसी (विनियमन) नियम, 2022 का संदर्भ ले सकते हैं।
विशाखापट्टनम में सरोगेसी की लागत के बारे में अधिक जानकारी के लिए, आप जयपुर में सरोगेसी की लागत से संबंधित हमारे ब्लॉग को भी देख सकते हैं, जो आपको एक व्यापक दृष्टिकोण प्रदान करेगा।
मुख्य बातें
- विशाखापट्टनम में सरोगेसी की अनुमानित लागत 2026 में ₹10,00,000 से ₹18,00,000 के बीच हो सकती है।
- यह लागत आईवीएफ प्रक्रिया, सरोगेट के चिकित्सा खर्च, कानूनी औपचारिकताओं और अनिवार्य बीमा को कवर करती है।
- भारत में परोपकारी सरोगेसी ही वैध है, इसलिए सरोगेट माँ को कोई मौद्रिक मुआवज़ा नहीं मिलता।
- क्लीनिक का चयन, इच्छित माता-पिता का चिकित्सा इतिहास, और अतिरिक्त आईवीएफ साइकिल की आवश्यकता लागत को काफी प्रभावित करती है।
- कानूनी शुल्क और सरोगेट के 36 महीने के अनिवार्य बीमा का प्रीमियम कुल लागत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं।
विशाखापट्टनम में सरोगेसी का पूरा खर्च — मद-दर-मद ब्रेकडाउन
विशाखापट्टनम में सरोगेसी की लागत का मूल्यांकन करते समय, यह समझना महत्वपूर्ण है कि भारत में सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम, 2021 के तहत केवल परोपकारी (altruistic) सरोगेसी की अनुमति है। इसका अर्थ है कि सरोगेट माँ को गर्भावस्था और प्रसव संबंधी चिकित्सा खर्चों, अनिवार्य बीमा कवरेज और कुछ सहायक लागतों के अलावा कोई मौद्रिक मुआवज़ा नहीं दिया जा सकता। इच्छुक माता-पिता मुख्य रूप से चिकित्सा प्रक्रियाओं, कानूनी औपचारिकताओं और सरोगेट के स्वास्थ्य और कल्याण से जुड़े खर्चों को वहन करते हैं।
Vinsfertility के अनुसार, विशाखापट्टनम में सरोगेसी से जुड़ा कुल खर्च कई मदों में विभाजित होता है, जिसकी विस्तृत जानकारी नीचे दी गई तालिका में प्रस्तुत है। यह अनुमानित लागत विभिन्न कारकों जैसे क्लीनिक का चुनाव, व्यक्तिगत चिकित्सा आवश्यकताएँ और किसी भी संभावित जटिलता के आधार पर भिन्न हो सकती है।
| मद | अनुमानित रेंज (₹) | टिप्पणी |
|---|---|---|
| आईवीएफ (IVF) साइकिल व संबंधित प्रक्रियाएँ | 1,50,000 – 3,50,000 | इसमें अंडों की रिट्रीवल, निषेचन, भ्रूण संवर्धन और भ्रूण स्थानांतरण शामिल है। यदि इच्छुक माता-पिता अपने स्वयं के युग्मकों का उपयोग करते हैं। |
| सरोगेट की चिकित्सा सहायता व गर्भावस्था देखभाल | 80,000 – 2,00,000 | गर्भधारण से प्रसव तक सरोगेट की नियमित जाँच, आवश्यक सप्लीमेंट्स, आहार संबंधी सहायता और परामर्श। इसमें प्रसव का खर्च शामिल नहीं है जो बीमा द्वारा कवर किया जाता है। |
| कानूनी औपचारिकताएँ व समझौता | 60,000 – 1,20,000 | सरोगेसी समझौते का मसौदा तैयार करना, कानूनी सलाह, नोटरी शुल्क, अभिभावक आदेश प्राप्त करना और सभी आवश्यक कानूनी दस्तावेज़ों को अंतिम रूप देना। |
| दवाइयाँ व हार्मोनल सप्लीमेंट्स | 50,000 – 1,00,000 | इच्छुक माता-पिता और सरोगेट माँ के लिए आवश्यक दवाएँ, जैसे हार्मोनल इंजेक्शन, विटामिन और अन्य निर्धारित दवाएँ। |
| सरोगेट का अनिवार्य बीमा कवरेज (36 महीने) | 50,000 – 1,00,000 | सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम, 2021 के अनुसार सरोगेट माँ के लिए 36 महीने का स्वास्थ्य बीमा अनिवार्य है, जो गर्भावस्था और प्रसव के दौरान की सभी जटिलताओं को कवर करता है। |
| चिकित्सा जाँच व स्क्रीनिंग (दोनों पक्षों की) | 40,000 – 80,000 | इच्छुक माता-पिता और सरोगेट माँ दोनों के लिए आवश्यक प्रारंभिक रक्त परीक्षण, अल्ट्रासाउंड, संक्रमण परीक्षण और अन्य स्वास्थ्य जाँचें। |
| भ्रूण क्रायोप्रिज़र्वेशन (यदि आवश्यक हो) | 30,000 – 60,000 | यदि अतिरिक्त भ्रूण बच जाते हैं और उन्हें भविष्य में उपयोग के लिए संग्रहीत किया जाता है, तो इसके वार्षिक रखरखाव शुल्क के साथ प्रारंभिक लागत भी होती है। |
स्रोत: सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम, 2021 और संबंधित नियम; चिकित्सा प्रक्रियाओं के प्रचलित शुल्क के अनुमान।
छिपे हुए व अतिरिक्त खर्च जिन पर अक्सर ध्यान नहीं जाता
सरोगेसी की प्रक्रिया में कुछ ऐसे खर्च भी होते हैं जिन पर इच्छुक माता-पिता अक्सर शुरुआत में ध्यान नहीं देते, लेकिन वे कुल लागत में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। इनमें प्रारंभिक मनोवैज्ञानिक परामर्श शुल्क शामिल हो सकता है, जो भावनात्मक तैयारी के लिए आवश्यक है। इसके अतिरिक्त, यदि इच्छुक माता-पिता को यात्रा या आवास की आवश्यकता होती है, तो ये खर्च भी बजट में जोड़ने होंगे।
अक्सर, जेनेटिक टेस्टिंग या प्री-इम्प्लांटेशन जेनेटिक टेस्टिंग (PGT) जैसी उन्नत नैदानिक सेवाएँ, जो भ्रूण के स्वास्थ्य की जाँच के लिए की जाती हैं, अतिरिक्त लागत पर उपलब्ध होती हैं। यदि बच्चे में कोई चिकित्सा जटिलता पाई जाती है या समय से पहले जन्म होता है, तो नवजात शिशु की विशेष देखभाल के खर्च भी अप्रत्याशित रूप से बढ़ सकते हैं। इन सभी संभावित अतिरिक्त खर्चों को ध्यान में रखना महत्वपूर्ण है ताकि एक यथार्थवादी वित्तीय योजना बनाई जा सके।
एक से ज़्यादा एम्ब्रियो ट्रांसफर या असफल साइकिल पर बढ़ने वाली लागत
सरोगेसी प्रक्रिया की सफलता दर कई कारकों पर निर्भर करती है और यह हमेशा गारंटीकृत नहीं होती। प्रारंभिक लागत अनुमान आमतौर पर एक सफल भ्रूण स्थानांतरण और गर्भावस्था को मानते हैं। हालाँकि, यदि पहला भ्रूण स्थानांतरण सफल नहीं होता है, तो अतिरिक्त प्रयासों की आवश्यकता हो सकती है। प्रत्येक अतिरिक्त आईवीएफ साइकिल या भ्रूण स्थानांतरण के साथ क्लीनिक शुल्क, दवाइयाँ और प्रयोगशाला प्रक्रियाओं से जुड़े नए खर्च जुड़ जाते हैं।
कई प्रयासों की स्थिति में, इच्छुक माता-पिता को सरोगेट के लिए नई दवाइयों का भुगतान करना पड़ सकता है, और क्लीनिक भी प्रत्येक नए स्थानांतरण के लिए शुल्क ले सकता है। इसके अलावा, यदि सरोगेट को गर्भावस्था में प्रारंभिक अवस्था में गर्भपात का अनुभव होता है, तो भावनात्मक और वित्तीय दोनों तरह के अतिरिक्त बोझ पड़ सकते हैं। ऐसी स्थितियों में, कानूनी समझौते की समीक्षा और उसमें संशोधन की आवश्यकता भी हो सकती है, जिससे अतिरिक्त कानूनी शुल्क लग सकते हैं। इसलिए, यह सलाह दी जाती है कि बजट बनाते समय संभावित एकाधिक प्रयासों की लागत के लिए एक आकस्मिक निधि (contingency fund) का प्रावधान रखें।
मुख्य बातें
- भारत में केवल परोपकारी सरोगेसी वैध है, जिसमें सरोगेट को कोई मौद्रिक मुआवज़ा नहीं दिया जाता।
- सरोगेसी की लागत में मुख्य रूप से आईवीएफ प्रक्रिया, सरोगेट की चिकित्सा देखभाल, कानूनी शुल्क, दवाइयाँ और अनिवार्य 36 महीने का बीमा शामिल होता है।
- छिपे हुए खर्चों में मनोवैज्ञानिक परामर्श, उन्नत जेनेटिक परीक्षण, यात्रा और अप्रत्याशित चिकित्सा जटिलताएँ शामिल हो सकती हैं।
- यदि एक से अधिक भ्रूण स्थानांतरण या आईवीएफ साइकिल की आवश्यकता होती है, तो कुल लागत में काफी वृद्धि हो सकती है।
- सरोगेसी प्रक्रिया शुरू करने से पहले एक विस्तृत वित्तीय योजना बनाना और संभावित अतिरिक्त खर्चों के लिए तैयार रहना महत्वपूर्ण है।
विशाखापट्टनम के सरोगेसी पैकेज में क्या-क्या शामिल होता है?
भारत में सरोगेसी, विशेष रूप से परोपकारी (altruistic) सरोगेसी के कानूनी ढांचे के भीतर, इच्छुक माता-पिता के लिए एक जटिल यात्रा है। विशाखापट्टनम में सरोगेसी की लागत को समझने के लिए, यह जानना महत्वपूर्ण है कि विभिन्न पैकेज में क्या-क्या सेवाएँ शामिल होती हैं। ये पैकेज मुख्य रूप से चिकित्सा प्रक्रियाओं, कानूनी आवश्यकताओं और सरोगेट के कल्याण से संबंधित खर्चों को कवर करते हैं।
बेसिक बनाम कॉम्प्रिहेंसिव पैकेज में अंतर
सरोगेसी पैकेज को आमतौर पर 'बेसिक' और 'कॉम्प्रिहेंसिव' श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है, हालांकि क्लीनिक और व्यक्तिगत आवश्यकताओं के अनुसार इनमें भिन्नता हो सकती है।
बेसिक सरोगेसी पैकेज: यह मुख्य रूप से चिकित्सा प्रक्रियाओं के मूलभूत पहलुओं पर केंद्रित होता है। इसमें आमतौर पर इच्छुक माता-पिता के लिए इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF) प्रक्रिया शामिल होती है, जिसमें हार्मोनल दवाएँ, अंडा पुनर्प्राप्ति (egg retrieval), भ्रूण निर्माण और एक भ्रूण स्थानांतरण (embryo transfer) शामिल हो सकता है। सरोगेट महिला की प्रारंभिक स्क्रीनिंग और गर्भावस्था के कुछ शुरुआती चरण की देखभाल भी इसमें शामिल हो सकती है। यह पैकेज उन लोगों के लिए उपयुक्त हो सकता है जिनकी चिकित्सा आवश्यकताएं स्पष्ट हैं और वे कुछ सेवाओं का प्रबंधन स्वयं करने में सक्षम हैं, या जहाँ एक बहुत सीधा मामला अपेक्षित है।
कॉम्प्रिहेंसिव सरोगेसी पैकेज: यह पैकेज कहीं अधिक व्यापक होता है और सरोगेसी प्रक्रिया के लगभग सभी पहलुओं को कवर करने का प्रयास करता है। इसमें बेसिक पैकेज में शामिल सभी सेवाएँ तो होती ही हैं, साथ ही सरोगेट की विस्तृत चिकित्सा और मनोवैज्ञानिक स्क्रीनिंग, कानूनी परामर्श और दस्तावेज़ीकरण, सरोगेट के लिए अनिवार्य स्वास्थ्य बीमा, गर्भावस्था के दौरान नियमित एंटीनेटल चेक-अप, प्रसव संबंधी खर्च और कभी-कभी कुछ अतिरिक्त भ्रूण स्थानांतरण के प्रयास भी शामिल हो सकते हैं। कॉम्प्रिहेंसिव पैकेज का उद्देश्य इच्छुक माता-पिता को पूरी प्रक्रिया के दौरान मन की शांति प्रदान करना है, क्योंकि अधिकांश प्रमुख खर्च और व्यवस्थाएं एक साथ कवर हो जाती हैं।
पैकेज में शामिल और बाहर रहने वाली सेवाएँ
भारत में सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम, 2021 [1] के तहत केवल परोपकारी सरोगेसी की अनुमति है, जिसका अर्थ है कि सरोगेट माँ को चिकित्सा खर्च और बीमा कवरेज के अलावा कोई वित्तीय मुआवजा नहीं दिया जाता। इसलिए, सरोगेसी पैकेज में शामिल और बाहर रहने वाली सेवाओं का निर्धारण इसी कानूनी ढांचे के तहत होता है।
आमतौर पर पैकेज में शामिल सेवाएँ:
- इच्छुक माता-पिता के लिए IVF प्रक्रिया: इसमें अंडा पुनर्प्राप्ति, शुक्राणु एकत्र करना, भ्रूण विकास और प्रयोगशाला शुल्क शामिल हैं।
- सरोगेट महिला की चिकित्सा स्क्रीनिंग: इसमें शारीरिक और मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन शामिल है ताकि उसकी स्वास्थ्य और सरोगेसी के लिए उपयुक्तता सुनिश्चित की जा सके।
- भ्रूण स्थानांतरण: प्रारंभिक भ्रूण स्थानांतरण प्रक्रिया।
- सरोगेट की गर्भावस्था की देखभाल: गर्भावस्था के दौरान नियमित चेक-अप, सोनोग्राफी और आवश्यक दवाएं।
- प्रसव संबंधी खर्च: बच्चे के जन्म के समय के चिकित्सा खर्च।
- कानूनी परामर्श और दस्तावेज़ीकरण: इच्छुक माता-पिता और सरोगेट के बीच कानूनी समझौते तैयार करना और आवश्यक अदालती प्रक्रियाओं में सहायता।
- सरोगेट का अनिवार्य स्वास्थ्य बीमा: सरोगेट (विनियमन) नियम, 2022 के अनुसार सरोगेट महिला के लिए 36 महीने का स्वास्थ्य बीमा कवरेज [2]।
- यदि आवश्यक हो, तो कुछ क्लीनिक प्रारंभिक मनोवैज्ञानिक परामर्श भी प्रदान कर सकते हैं।
आमतौर पर पैकेज से बाहर रहने वाली सेवाएँ:
- डोनर गेमेट (अंडाणु या शुक्राणु) की लागत: यदि इच्छुक माता-पिता को डोनर की आवश्यकता होती है, तो यह खर्च पैकेज से अलग होता है।
- अतिरिक्त IVF साइकिल या भ्रूण स्थानांतरण: यदि पहला प्रयास असफल रहता है, तो बाद के प्रयासों के लिए अतिरिक्त शुल्क लग सकता है।
- आनुवंशिक परीक्षण: प्री-जेनेटिक टेस्टिंग (PGT) जैसी उन्नत परीक्षण विधियाँ आमतौर पर अतिरिक्त शुल्क पर उपलब्ध होती हैं।
- गर्भावस्था की जटिलताएँ: यदि सरोगेट को गंभीर चिकित्सा जटिलताएँ होती हैं जिनके लिए विशेष या विस्तारित उपचार की आवश्यकता होती है जो बीमा कवरेज से अधिक हो, तो यह अतिरिक्त लागत का कारण बन सकता है।
- नवजात शिशु की विशेष देखभाल: यदि बच्चे को जन्म के बाद नवजात गहन चिकित्सा इकाई (NICU) की आवश्यकता होती है, तो यह खर्च पैकेज में शामिल नहीं होता।
- गैर-चिकित्सीय खर्च: जैसे कि सरोगेट के लिए पोषण संबंधी पूरक, कपड़े, या यात्रा के खर्च जो चिकित्सा प्रोटोकॉल का हिस्सा नहीं हैं।
गारंटी/मल्टी-अटेम्प्ट पैकेज की सच्चाई और सीमाएँ
सरोगेसी में 'गारंटी' पैकेज का विचार जटिलताओं से भरा है। चिकित्सा प्रक्रिया होने के नाते, किसी भी परिणाम की 100% गारंटी नहीं दी जा सकती। भारत में परोपकारी सरोगेसी के नियम [1] भी ऐसे 'गारंटी' पैकेजों के प्रचलन को हतोत्साहित करते हैं, क्योंकि वे सरोगेसी को एक वाणिज्यिक उद्यम के रूप में पेश करने की संभावना रखते हैं, जो वर्तमान कानूनों के खिलाफ है।
इसके बजाय, कुछ क्लीनिक 'मल्टी-अटेम्प्ट' पैकेज प्रदान कर सकते हैं। इन पैकेजों में आमतौर पर एक निश्चित संख्या में IVF साइकिल या भ्रूण स्थानांतरण शामिल होते हैं, जो एक निर्धारित अवधि के भीतर या जब तक गर्भावस्था स्थापित न हो जाए, तब तक किए जा सकते हैं (हालांकि यह भी कुछ सीमाओं के अधीन होता है)। इनका उद्देश्य यह होता है कि यदि पहला प्रयास सफल न हो, तो इच्छुक माता-पिता को बार-बार पूरी लागत का भुगतान न करना पड़े।
इन पैकेजों की सीमाएँ:
- उच्च प्रारंभिक लागत: मल्टी-अटेम्प्ट पैकेज की प्रारंभिक लागत सिंगल-अटेम्प्ट पैकेज की तुलना में काफी अधिक होती है।
- परिणाम की कोई गारंटी नहीं: भले ही इसमें कई प्रयास शामिल हों, यह जीवित बच्चे के जन्म की गारंटी नहीं देता। चिकित्सा परिणाम कई कारकों पर निर्भर करते हैं।
- पात्रता मानदंड: क्लीनिक इन पैकेजों के लिए इच्छुक माता-पिता और सरोगेट दोनों के लिए सख्त पात्रता मानदंड निर्धारित कर सकते हैं।
- प्रयासों की संख्या पर सीमा: आमतौर पर इन पैकेजों में प्रयासों की एक निश्चित ऊपरी सीमा होती है (जैसे 2 या 3 भ्रूण स्थानांतरण)।
- कानूनी अनुपालन: यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि ऐसे पैकेज भारतीय सरोगेसी कानूनों का पूरी तरह से पालन करते हों, विशेष रूप से यह सुनिश्चित करते हुए कि वे सरोगेट को किसी भी प्रकार के व्यावसायिक भुगतान का मार्ग नहीं बनाते हैं।
इच्छुक माता-पिता को ऐसे पैकेजों की शर्तों को ध्यान से समझना चाहिए और किसी भी निर्णय पर पहुंचने से पहले सभी संभावित परिदृश्यों पर विचार करना चाहिए। पारदर्शिता और स्पष्टता इस प्रक्रिया में अत्यंत महत्वपूर्ण है।
मुख्य बातें
- सरोगेसी पैकेज में बेसिक और कॉम्प्रिहेंसिव विकल्प होते हैं, जिनमें कॉम्प्रिहेंसिव अधिक सेवाएँ (कानूनी, बीमा, अधिक चिकित्सा देखभाल) प्रदान करता है।
- भारत में सरोगेसी पैकेज केवल चिकित्सा प्रक्रियाओं, सरोगेट के स्वास्थ्य बीमा, कानूनी खर्चों और अन्य सहायक सेवाओं को कवर करते हैं; सरोगेट को कोई वित्तीय मुआवजा नहीं दिया जाता।
- पैकेज में डोनर गेमेट, अतिरिक्त IVF साइकिल, विशेष आनुवंशिक परीक्षण या गर्भावस्था की जटिलताओं से जुड़े अतिरिक्त खर्च आमतौर पर शामिल नहीं होते।
- 'गारंटी' सरोगेसी पैकेज भारत में कानूनी रूप से अनुपयुक्त हैं; इसके बजाय 'मल्टी-अटेम्प्ट' पैकेज कुछ प्रयासों को कवर कर सकते हैं, लेकिन वे भी जीवित जन्म की गारंटी नहीं देते और उनकी अपनी सीमाएँ होती हैं।
- सरोगेसी पैकेज का चयन करते समय, सभी शामिल और बाहर रहने वाली सेवाओं को ध्यान से समझना और कानूनी अनुपालन सुनिश्चित करना आवश्यक है।
विशाखापट्टनम में सरोगेसी का खर्च देश के अन्य शहरों से कैसे अलग है?
Vinsfertility के इस खंड में, हम विशाखापट्टनम में सरोगेसी की लागत 2026 की तुलना भारत के कुछ अन्य प्रमुख शहरों से करेंगे। भारत में सरोगेसी केवल परोपकारी (altruistic) प्रकृति की है, जिसका अर्थ है कि सरोगेट माँ को चिकित्सा खर्च, बीमा और कुछ अन्य अनुमोदित भत्तों के अलावा कोई मौद्रिक मुआवज़ा नहीं दिया जाता। इसलिए, लागत मुख्य रूप से इच्छुक माता-पिता के लिए आईवीएफ (IVF) प्रक्रियाओं, सरोगेट माँ की चिकित्सा देखभाल, कानूनी शुल्क और अनिवार्य बीमा प्रीमियम से बनी होती है।
प्रमुख भारतीय शहरों में सरोगेसी की अनुमानित लागत की तुलना
नीचे दी गई तालिका विशाखापट्टनम की अनुमानित सरोगेसी लागत को हैदराबाद, चेन्नई, बेंगलुरु और दिल्ली जैसे शहरों से तुलना करती है। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि ये केवल सांकेतिक रेंज हैं और व्यक्तिगत मामलों, क्लीनिक की सुविधाओं और किसी भी अतिरिक्त चिकित्सा जटिलता के आधार पर वास्तविक लागत भिन्न हो सकती है।
| शहर | अनुमानित सरोगेसी लागत रेंज (₹) | प्रमुख कारक (यह सीमा क्या कवर करती है) |
|---|---|---|
| विशाखापट्टनम | ₹4,00,000 - ₹7,50,000 | आईवीएफ (यदि आवश्यक हो), सरोगेट की चिकित्सा जांच व देखभाल, कानूनी शुल्क, अनिवार्य 36 माह का बीमा, दवाओं का खर्च, प्रसव |
| हैदराबाद | ₹4,50,000 - ₹8,00,000 | आईवीएफ (यदि आवश्यक हो), सरोगेट की चिकित्सा जांच व देखभाल, कानूनी शुल्क, अनिवार्य 36 माह का बीमा, दवाओं का खर्च, प्रसव |
| चेन्नई | ₹4,50,000 - ₹8,00,000 | आईवीएफ (यदि आवश्यक हो), सरोगेट की चिकित्सा जांच व देखभाल, कानूनी शुल्क, अनिवार्य 36 माह का बीमा, दवाओं का खर्च, प्रसव |
| बेंगलुरु | ₹5,00,000 - ₹9,00,000 | आईवीएफ (यदि आवश्यक हो), सरोगेट की चिकित्सा जांच व देखभाल, कानूनी शुल्क, अनिवार्य 36 माह का बीमा, दवाओं का खर्च, प्रसव |
| दिल्ली | ₹5,00,000 - ₹9,00,000 | आईवीएफ (यदि आवश्यक हो), सरोगेट की चिकित्सा जांच व देखभाल, कानूनी शुल्क, अनिवार्य 36 माह का बीमा, दवाओं का खर्च, प्रसव |
स्रोत: विभिन्न क्लीनिकों और विशेषज्ञों के अनुमानित औसत पर आधारित। व्यक्तिगत लागत भिन्न हो सकती है।
विशाखापट्टनम में लागत अपेक्षाकृत कम या ज़्यादा क्यों हो सकती है?
सरोगेसी की लागत कई कारकों पर निर्भर करती है, और एक शहर से दूसरे शहर में इसमें अंतर आना स्वाभाविक है। विशाखापट्टनम में सरोगेसी का खर्च अन्य महानगरों की तुलना में थोड़ा कम होने के कुछ संभावित कारण हो सकते हैं, जबकि कुछ स्थितियाँ ऐसी भी हैं जहाँ यह तुलनीय या अधिक हो सकता है।
कम लागत की संभावना के कारण:
- कम परिचालन लागत: विशाखापट्टनम जैसे शहरों में क्लीनिकों और अस्पतालों के लिए किराये, कर्मचारियों के वेतन और बुनियादी ढाँचे की परिचालन लागत दिल्ली या बेंगलुरु जैसे बड़े महानगरों की तुलना में कम हो सकती है। यह बचत अक्सर सेवाओं की लागत में परिलक्षित होती है।
- जीवन-यापन का खर्च: सरोगेट माँ की गर्भावस्था के दौरान देखभाल और सहायता से जुड़े खर्च, जो अप्रत्यक्ष रूप से लागत में शामिल होते हैं (जैसे पोषण संबंधी ज़रूरतें, परिवहन आदि), विशाखापट्टनम में कम हो सकते हैं। हालांकि सरोगेट को कोई सीधा व्यावसायिक भुगतान नहीं किया जाता, पर उसकी समग्र देखभाल से जुड़े खर्चों में अंतर आ सकता है।
- प्रतिस्पर्धा का स्तर: कुछ विशिष्ट क्षेत्रों में, यदि प्रतिस्पर्धा का स्तर कम है, तो क्लीनिकों के पास अपनी सेवाओं की लागत तय करने में अधिक लचीलापन हो सकता है, जिससे कीमतें थोड़ी कम हो सकती हैं। हालाँकि, सेवा की गुणवत्ता पर कभी समझौता नहीं किया जाना चाहिए।
ज़्यादा लागत की संभावना के कारण:
- विशेषज्ञता की उपलब्धता: यदि किसी इच्छुक माता-पिता को अत्यधिक विशिष्ट आईवीएफ प्रक्रियाओं या जटिल चिकित्सा प्रबंधन की आवश्यकता होती है जो विशाखापट्टनम में आसानी से उपलब्ध नहीं है, तो उन्हें बड़े शहरों में यात्रा करनी पड़ सकती है, जिससे समग्र लागत बढ़ सकती है। हालांकि, कई आधुनिक फर्टिलिटी क्लीनिक अब विशाखापट्टनम में उच्च गुणवत्ता वाली सेवाएँ प्रदान करते हैं।
- व्यक्तिगत चिकित्सा आवश्यकताएं: किसी भी शहर में, यदि सरोगेट माँ या शिशु को गर्भावस्था के दौरान या प्रसव के बाद कोई अप्रत्याशित चिकित्सा जटिलताएँ आती हैं, तो अतिरिक्त परीक्षण, उपचार या लंबे समय तक अस्पताल में रहने से लागत में काफी वृद्धि हो सकती है।
- कानूनी और प्रशासनिक आवश्यकताएँ: भारत में परोपकारी सरोगेसी की अनुमति देने वाले सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम, 2021 के तहत निर्धारित कानूनी प्रक्रियाएँ और दस्तावेज़ीकरण सभी शहरों में समान हैं। हालाँकि, स्थानीय कानूनी पेशेवरों की फीस में मामूली अंतर हो सकता है, जिससे कुल खर्च थोड़ा प्रभावित हो सकता है।
कुल मिलाकर, विशाखापट्टनम भारत में सरोगेसी के लिए एक लागत प्रभावी विकल्प प्रस्तुत कर सकता है, खासकर यदि आप तुलनीय गुणवत्ता वाली चिकित्सा सेवाओं की तलाश में हैं। हालांकि, लागत की तुलना करते समय, क्लीनिक की विश्वसनीयता, चिकित्सा टीम का अनुभव, सरोगेट माँ के लिए सहायता प्रणाली और सफलता दर जैसे कारकों को प्राथमिकता देना महत्वपूर्ण है। सरोगेसी के खर्चों के बारे में अधिक जानने के लिए, आप अहमदाबाद में सरोगेसी की लागत से संबंधित जानकारी भी देख सकते हैं।
मुख्य बातें
- विशाखापट्टनम में सरोगेसी की अनुमानित लागत (₹4,00,000 - ₹7,50,000) भारत के अन्य प्रमुख शहरों जैसे हैदराबाद, चेन्नई, बेंगलुरु और दिल्ली की तुलना में अक्सर प्रतिस्पर्धी होती है।
- लागत में यह अंतर मुख्य रूप से शहर में क्लीनिकों की परिचालन लागत, जीवन-यापन के खर्च और स्थानीय बाजार की प्रतिस्पर्धा पर निर्भर करता है।
- सरोगेसी का कुल खर्च आईवीएफ प्रक्रियाओं, सरोगेट माँ की चिकित्सा देखभाल, कानूनी शुल्क और अनिवार्य 36 माह के बीमा प्रीमियम से मिलकर बनता है, क्योंकि परोपकारी सरोगेसी में कोई व्यावसायिक भुगतान नहीं होता।
- व्यक्तिगत चिकित्सा आवश्यकताएँ और अप्रत्याशित जटिलताएँ किसी भी शहर में सरोगेसी की अंतिम लागत को बढ़ा सकती हैं।
- लागत की तुलना करते समय, क्लीनिक की विशेषज्ञता, सफल परिणाम और सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम, 2021 का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित करना सबसे महत्वपूर्ण है।
2026 में भारत के सरोगेसी कानून लागत को कैसे प्रभावित करते हैं?
भारत में सरोगेसी के लिए कानूनी ढाँचा, विशेष रूप से सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम, 2021 और इसके बाद के नियम (सरोगेसी (विनियमन) नियम, 2022 और 2024 के संशोधन), सरोगेसी से जुड़ी लागत को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित करते हैं। इन कानूनों का मुख्य उद्देश्य परोपकारी (altruistic) सरोगेसी को बढ़ावा देना और व्यावसायिक सरोगेसी को पूरी तरह प्रतिबंधित करना है। इससे पहले, सरोगेसी की लागत में सरोगेट माँ को दिया जाने वाला ‘मुआवज़ा’ एक बड़ा हिस्सा होता था, लेकिन अब यह बदल गया है।
केवल परोपकारी (Altruistic) सरोगेसी का असर लागत पर
भारत में सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम, 2021 के लागू होने के साथ, व्यावसायिक सरोगेसी को प्रतिबंधित कर दिया गया है। इसका मतलब है कि सरोगेट माँ को बच्चे को गर्भ धारण करने या जन्म देने के लिए किसी भी प्रकार का मौद्रिक भुगतान, इनाम या वित्तीय लाभ प्रदान करना कानूनी रूप से निषिद्ध है। यह प्रावधान सरोगेसी की कुल लागत को सीधे प्रभावित करता है क्योंकि सरोगेट को दिए जाने वाले 'मुआवजे' का एक बड़ा हिस्सा अब शामिल नहीं होता है। इसके बजाय, अब इच्छुक माता-पिता को सरोगेट महिला के चिकित्सा खर्च, दवाइयाँ, गर्भावस्था के दौरान पोषण संबंधी सहायता और अनिवार्य बीमा कवर जैसे आवश्यक और वैध खर्चों को वहन करना होता है। यह बदलाव सरोगेसी को आर्थिक रूप से अधिक पारदर्शी और नैतिकता-आधारित बनाता है, जिससे कुल खर्च का पैटर्न बदल जाता है।
सरोगेट महिला का अनिवार्य बीमा व चिकित्सा खर्च
सरोगेसी (विनियमन) नियम, 2022 और इसके बाद के संशोधनों (जैसे 2024) के अनुसार, इच्छुक माता-पिता के लिए सरोगेट महिला के लिए एक अनिवार्य बीमा पॉलिसी खरीदना अनिवार्य है। इस बीमा में गर्भावस्था के दौरान होने वाली सभी जटिलताओं, प्रसवोपरांत देखभाल और प्रसव के बाद 36 महीने तक की चिकित्सा संबंधी कवरेज शामिल होनी चाहिए। यह सुनिश्चित करता है कि सरोगेट महिला को किसी भी संभावित स्वास्थ्य जोखिम से पर्याप्त सुरक्षा मिले। इस बीमा की लागत सरोगेसी प्रक्रिया के कुल खर्च का एक महत्वपूर्ण और अनिवार्य हिस्सा बन गई है। इसके अतिरिक्त, सरोगेट महिला की गर्भावस्था से संबंधित सभी चिकित्सा प्रक्रियाएं, दवाइयां, अस्पताल में भर्ती होने का खर्च और सामान्य स्वास्थ्य जांच की लागत भी इच्छुक माता-पिता को ही उठानी पड़ती है। इन कानूनी आवश्यकताओं ने सरोगेसी की लागत संरचना में बीमा और चिकित्सा खर्चों के हिस्से को बढ़ा दिया है।
कमर्शियल सरोगेसी पर रोक से जुड़े वैध बनाम अवैध खर्च
सरोगेसी अधिनियम 2021 के तहत व्यावसायिक सरोगेसी पर पूर्ण प्रतिबंध है। इसका अर्थ यह है कि सरोगेट महिला या उसके परिवार को गर्भधारण, गर्भावस्था या बच्चे के जन्म के लिए कोई भी 'मुआवजा' या 'आर्थिक लाभ' देना पूरी तरह से अवैध है। इसके बावजूद, कुछ खर्च वैध और कानून सम्मत माने जाते हैं। वैध खर्चों में निम्नलिखित शामिल हैं:
- सरोगेट महिला की गर्भावस्था से संबंधित सभी चिकित्सा प्रक्रियाएं, टेस्ट और दवाएं।
- गर्भावस्था के दौरान सरोगेट के लिए पोषण संबंधी सहायता।
- सरोगेट के स्वास्थ्य के लिए 36 महीने का अनिवार्य बीमा कवर।
- सरोगेसी प्रक्रिया से संबंधित कानूनी दस्तावेजीकरण और सलाहकार शुल्क।
- आईवीएफ (IVF) या एआरटी (ART) प्रक्रिया से जुड़े क्लीनिक और डॉक्टर के शुल्क।
इसके विपरीत, सरोगेट महिला को बच्चे को जन्म देने के लिए सीधे नकद भुगतान या किसी अन्य प्रकार का वित्तीय लाभ देना अवैध है। ऐसे किसी भी गैर-कानूनी भुगतान में शामिल होने पर कानूनी दंड और कठोर परिणाम हो सकते हैं। भारत में सरोगेसी और एआरटी कानून यह सुनिश्चित करते हैं कि सभी प्रक्रियाएं नैतिक रूप से हों और सरोगेट महिला का शोषण न हो। इस कानूनी प्रतिबंध के कारण, विशाखापट्टनम सहित भारत में सरोगेसी की लागत अब केवल वास्तविक चिकित्सा, कानूनी और सहायता खर्चों तक ही सीमित है, जिससे वित्तीय लेनदेन में पारदर्शिता और जवाबदेही आती है।
मुख्य बातें
- भारत में 2021 के सरोगेसी अधिनियम ने व्यावसायिक सरोगेसी पर प्रतिबंध लगा दिया है, जिससे सरोगेट माँ को मौद्रिक मुआवजा देना अवैध हो गया है।
- इच्छुक माता-पिता अब सरोगेट महिला के अनिवार्य चिकित्सा खर्च, दवाइयों, पोषण संबंधी सहायता और 36 महीने के बीमा का ही भुगतान करते हैं।
- सरोगेट का अनिवार्य बीमा कवर और गर्भावस्था से संबंधित चिकित्सा व्यय सरोगेसी की कुल लागत का एक महत्वपूर्ण और वैध हिस्सा बन गए हैं।
- किसी भी प्रकार का अवैध वित्तीय भुगतान कानूनी दंड को आकर्षित कर सकता है; केवल कानून द्वारा अनुमत खर्च ही मान्य हैं।
सरोगेट महिला का बीमा और मेडिकल खर्च — किसकी ज़िम्मेदारी?
सरोगेसी की प्रक्रिया में इच्छुक माता-पिता के लिए सरोगेट महिला के स्वास्थ्य और कल्याण को सुनिश्चित करना सर्वोच्च प्राथमिकता होती है। भारत में लागू सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम, 2021 और उसके तहत बनाए गए नियमों के अनुसार, सरोगेट महिला के बीमा और चिकित्सा खर्चों का प्रावधान स्पष्ट रूप से निर्धारित है। यह सुनिश्चित करता है कि सरोगेट को सर्वोत्तम चिकित्सा देखभाल मिले और इच्छुक माता-पिता को अपनी वित्तीय जिम्मेदारियों की स्पष्ट समझ हो।
सरोगेट के 36 महीने के अनिवार्य बीमा का खर्च
सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम, 2021 की धारा 4(iii)(a)(III) में यह अनिवार्य किया गया है कि इच्छुक माता-पिता सरोगेट महिला के लिए कम से कम 36 महीने की अवधि के लिए सामान्य बीमा कवर उपलब्ध कराएँ। यह बीमा सरोगेट महिला को गर्भावस्था के दौरान या प्रसव के बाद होने वाली किसी भी जटिलता, बीमारी या मृत्यु के जोखिम को कवर करता है। इसका उद्देश्य सरोगेट महिला को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करना है। इस अनिवार्य बीमा कवरेज की लागत अलग-अलग बीमा प्रदाताओं और कवरेज के दायरे के आधार पर भिन्न हो सकती है। सामान्यतः, भारत में 36 महीने के लिए ऐसे विशिष्ट बीमा प्लान का अनुमानित खर्च ₹50,000 से ₹1,50,000 तक हो सकता है, जो पॉलिसी के कवरेज और कंपनी पर निर्भर करता है। यह लागत इच्छुक माता-पिता द्वारा वहन की जाती है और यह सरोगेसी की कुल लागत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह प्रावधान सरोगेट महिला के स्वास्थ्य और सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है, साथ ही भविष्य में उत्पन्न होने वाली किसी भी अप्रत्याशित स्वास्थ्य समस्या के लिए वित्तीय बोझ को इच्छुक माता-पिता पर डालता है, ताकि सरोगेट को कोई अतिरिक्त खर्च न उठाना पड़े।
गर्भावस्था और प्रसव के दौरान चिकित्सा व्यय
बीमा कवरेज के अतिरिक्त, सरोगेसी की पूरी प्रक्रिया के दौरान सरोगेट महिला के सभी चिकित्सा खर्च इच्छुक माता-पिता द्वारा वहन किए जाते हैं। इसमें सरोगेट के नियमित चिकित्सकीय परीक्षण, दवाइयाँ, अल्ट्रासाउंड, आवश्यक रक्त परीक्षण और अन्य निदान प्रक्रियाएँ शामिल हैं। गर्भावस्था की शुरुआत से लेकर प्रसव तक (चाहे वह सामान्य प्रसव हो या सिजेरियन सेक्शन) अस्पताल के खर्च भी इसी मद में आते हैं। प्रसव के बाद की देखभाल, जिसमें सरोगेट महिला की रिकवरी से संबंधित चेक-अप और दवाइयाँ शामिल हैं, का खर्च भी इच्छुक माता-पिता को उठाना होता है। यदि गर्भावस्था या प्रसव के दौरान कोई जटिलता उत्पन्न होती है जिसके लिए अतिरिक्त चिकित्सा हस्तक्षेप या लंबे समय तक अस्पताल में रहने की आवश्यकता होती है, तो इन सभी खर्चों का वहन भी इच्छुक माता-पिता द्वारा ही किया जाता है। Surrogacy (Regulation) Rules, 2022 के नियम 5 के उप-नियम (j) में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि इच्छुक युगल/महिला को सरोगेट महिला के सभी चिकित्सा और अन्य स्वास्थ्य संबंधी खर्चों को वहन करना होगा। यह सुनिश्चित करता है कि सरोगेट को बिना किसी वित्तीय चिंता के सर्वोत्तम संभव देखभाल प्राप्त हो।
इच्छुक माता-पिता की वित्तीय ज़िम्मेदारियाँ
भारत में परोपकारी (altruistic) सरोगेसी मॉडल के तहत, सरोगेट महिला को बच्चे को जन्म देने के लिए कोई मौद्रिक मुआवज़ा नहीं दिया जाता। हालांकि, अधिनियम इच्छुक माता-पिता पर सरोगेसी से संबंधित सभी आवश्यक खर्चों का बोझ डालता है। इसमें न केवल बीमा और चिकित्सा खर्च शामिल हैं, बल्कि कानूनी शुल्क, एआरटी प्रक्रिया (जैसे आईवीएफ) की लागत, आवश्यक दवाएँ और सरोगेट महिला के आहार एवं पोषण से संबंधित कुछ विशिष्ट व्यय भी शामिल हो सकते हैं, जिनका उल्लेख कानूनी समझौते में होता है। सरोगेसी की प्रक्रिया शुरू करने से पहले, इच्छुक माता-पिता और सरोगेट महिला के बीच एक विस्तृत कानूनी समझौता (सरोगेसी समझौता) करना अनिवार्य होता है। इस समझौते में बीमा कवरेज, चिकित्सा खर्चों के प्रावधान, प्रसवोत्तर देखभाल और किसी भी अन्य संबंधित खर्चों की सभी वित्तीय जिम्मेदारियों का स्पष्ट रूप से उल्लेख होता है। यह समझौता दोनों पक्षों के अधिकारों और कर्तव्यों को सुनिश्चित करता है और भविष्य में किसी भी विवाद से बचने में मदद करता है। विशाखापट्टनम में सरोगेसी की तलाश कर रहे इच्छुक माता-पिता के लिए यह महत्वपूर्ण है कि वे इन सभी कानूनी और वित्तीय पहलुओं को पूरी पारदर्शिता के साथ समझें और Surrogacy (Regulation) Act, 2021 के प्रावधानों का पूर्णतः पालन करें। इसी तरह की विस्तृत जानकारी आप लखनऊ में सरोगेसी की लागत से संबंधित हमारे ब्लॉग पोस्ट में भी प्राप्त कर सकते हैं।
मुख्य बातें
- भारत में सरोगेसी कानून के तहत, सरोगेट महिला के लिए 36 महीने का अनिवार्य बीमा कवरेज इच्छुक माता-पिता द्वारा प्रदान किया जाता है।
- गर्भावस्था, प्रसव और प्रसवोत्तर देखभाल से जुड़े सभी चिकित्सा खर्चों का वहन इच्छुक माता-पिता ही करते हैं, जिसमें अस्पताल के बिल और दवाएँ शामिल हैं।
- परोपकारी सरोगेसी मॉडल के तहत, सरोगेट महिला को कोई मौद्रिक मुआवज़ा नहीं मिलता है, केवल चिकित्सा और संबंधित खर्चों की प्रतिपूर्ति की जाती है।
- सरोगेसी प्रक्रिया से पहले एक विस्तृत कानूनी समझौता करना आवश्यक है जिसमें सभी वित्तीय जिम्मेदारियों का स्पष्ट उल्लेख हो।
- इन सभी प्रावधानों का उद्देश्य सरोगेट महिला के स्वास्थ्य और कल्याण को सुनिश्चित करते हुए इच्छुक माता-पिता के लिए एक स्पष्ट कानूनी और वित्तीय ढाँचा स्थापित करना है।