बेंगलुरु में सरोगेसी की लागत 2026: खर्च, पैकेज व पूरी जानकारी

बेंगलुरु में सरोगेसी की लागत 2026: खर्च, पैकेज व पूरी जानकारी

बेंगलुरु में सरोगेसी की लागत 2026: खर्च, पैकेज व पूरी जानकारी

बेंगलुरु में सरोगेसी की कुल लागत 2026 में कितनी है?

Vinsfertility के इस ब्लॉग पोस्ट, "बेंगलुरु में सरोगेसी की लागत 2026: खर्च, पैकेज व पूरी जानकारी" में हम बेंगलुरु में सरोगेसी से जुड़े वित्तीय पहलुओं की पड़ताल करेंगे। भारत में सरोगेसी को नियंत्रित करने वाले कड़े कानूनों के तहत, इसकी लागत समझना इच्छुक माता-पिता के लिए बेहद ज़रूरी है। 2021 के सरोगेसी (रेगुलेशन) एक्ट के लागू होने के बाद, व्यावसायिक सरोगेसी पर प्रतिबंध लगा दिया गया है, जिसका अर्थ है कि सरोगेट माँ को बच्चे को जन्म देने के लिए कोई सीधा भुगतान नहीं किया जा सकता। लागत अब मुख्यतः चिकित्सा प्रक्रियाओं, सरोगेट की देखभाल, कानूनी औपचारिकताओं और बीमा प्रीमियम तक सीमित है।

2026 में बेंगलुरु में सरोगेसी की कुल अनुमानित लागत आमतौर पर ₹18 लाख से ₹25 लाख के बीच हो सकती है। इस रेंज में प्रमुख रूप से इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF) प्रक्रियाएँ, सरोगेट माँ की गर्भावस्था संबंधी सभी चिकित्सा देखभाल, अस्पताल व डिलीवरी के शुल्क, कानूनी सलाह व प्रक्रियाएँ, और सरोगेट माँ के लिए अनिवार्य बीमा कवर जैसे आवश्यक खर्च शामिल होते हैं। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि ये लागतें केवल सांकेतिक हैं और केस की विशिष्ट आवश्यकताओं, क्लीनिक की दरों और उत्पन्न होने वाली किसी भी अप्रत्याशित चिकित्सा जटिलता के आधार पर बदल सकती हैं।

लागत को प्रभावित करने वाले मुख्य कारक

बेंगलुरु में सरोगेसी की कुल लागत कई प्रमुख कारकों पर निर्भर करती है। भारत में लागू सरोगेसी (रेगुलेशन) एक्ट, 2021 के अनुसार, सरोगेसी केवल परोपकारी (altruistic) होनी चाहिए। इसका मतलब है कि इच्छुक माता-पिता सरोगेट माँ को गर्भावस्था से संबंधित चिकित्सा खर्च, बीमा और अन्य कानूनी रूप से अनुमत सहायता प्रदान करते हैं, लेकिन बच्चे को जन्म देने के लिए कोई मौद्रिक मुआवज़ा नहीं दिया जा सकता। निम्नलिखित मुख्य कारक लागत को प्रभावित करते हैं:

IVF साइकिल और भ्रूण स्थानांतरण प्रक्रियाएँ

  • IVF की संख्या: सरोगेसी प्रक्रिया में अक्सर IVF की आवश्यकता होती है। यदि पहला IVF चक्र सफल नहीं होता है, तो अतिरिक्त चक्रों की लागत बढ़ जाती है।
  • दवाइयाँ: IVF प्रक्रिया के लिए हार्मोनल दवाइयाँ, उत्तेजक और अन्य सहायक दवाएँ एक महत्वपूर्ण खर्च का हिस्सा होती हैं।
  • भ्रूण स्थानांतरण: सरोगेट माँ के गर्भाशय में भ्रूण स्थानांतरित करने की प्रक्रिया और संबंधित शुल्क।
  • डोनर गैमीट: यदि इच्छुक माता-पिता को डोनर अंडे या शुक्राणु की आवश्यकता होती है, तो उनकी लागत भी कुल खर्च में जुड़ जाती है।

सरोगेट की देखभाल और बीमा संबंधी खर्च

भारतीय कानून के तहत, इच्छुक माता-पिता को सरोगेट माँ की संपूर्ण गर्भावस्था के दौरान सभी चिकित्सा खर्च वहन करने होते हैं। इसमें नियमित जाँच, दवाइयाँ, अस्पताल में भर्ती, और डिलीवरी शामिल है। इसके अतिरिक्त, सरोगेसी (रेगुलेशन) रूल्स, 2022 और 2024 के संशोधनों के अनुसार, सरोगेट माँ के लिए 36 महीने का बीमा कवर अनिवार्य है। यह बीमा गर्भावस्था के दौरान या उससे संबंधित किसी भी जटिलता की स्थिति में उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करता है।

कानूनी और प्रशासनिक खर्च

सरोगेसी एक जटिल कानूनी प्रक्रिया है जिसमें कई दस्तावेज़ और न्यायालयी अनुमतियाँ शामिल होती हैं। इन खर्चों में कानूनी सलाह, शपथ पत्र तैयार करना, माता-पिता के लिए माता-पिता के आदेश (parentage order) प्राप्त करना, और अन्य प्रशासनिक शुल्क शामिल होते हैं। सरोगेसी (रेगुलेशन) एक्ट, 2021 के तहत सभी कानूनी आवश्यकताओं का पालन करना अनिवार्य है, जिसके लिए विशेषज्ञ कानूनी सहायता की आवश्यकता होती है।

अस्पताल और डिलीवरी शुल्क

सरोगेट माँ की प्रसवपूर्व देखभाल और बच्चे की डिलीवरी से जुड़े अस्पताल शुल्क भी कुल लागत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं। इसमें प्रसव कक्ष का उपयोग, चिकित्सा कर्मचारियों की फीस, और यदि आवश्यक हो तो नवजात शिशु की प्रारंभिक देखभाल शामिल है।

बेंगलुरु की लागत अन्य भारतीय शहरों (दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद) से तुलना

भारत में सरोगेसी की लागत, विशेष रूप से परोपकारी प्रकृति के कारण, अधिकांश प्रमुख महानगरीय शहरों में अपेक्षाकृत समान पैटर्न का पालन करती है। बेंगलुरु, दिल्ली, मुंबई और हैदराबाद जैसे शहरों में सरोगेसी के मूलभूत चिकित्सा और कानूनी खर्चों में बहुत अधिक अंतर नहीं होता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि पूरे देश में चिकित्सा प्रोटोकॉल और कानूनी ढाँचा ART (रेगुलेशन) एक्ट, 2021 और सरोगेसी (रेगुलेशन) एक्ट, 2021 द्वारा निर्धारित होता है। हालांकि, कुछ छोटे अंतर देखने को मिल सकते हैं, जो इन कारकों पर निर्भर करते हैं:

  • क्लीनिक की प्रतिष्ठा और अवसंरचना: उच्च-स्तरीय सुविधाओं और अनुभवी डॉक्टरों वाले क्लीनिकों की फीस थोड़ी अधिक हो सकती है।
  • स्थानीय परिचालन लागत: प्रत्येक शहर में क्लीनिकों के लिए परिचालन लागत (जैसे किराया, कर्मचारी वेतन) में भिन्नता हो सकती है, जो अप्रत्यक्ष रूप से लागत को प्रभावित कर सकती है।
  • बीमा प्रीमियम: बीमा कंपनियों की पॉलिसी और प्रीमियम दरें शहर-दर-शहर थोड़ी भिन्न हो सकती हैं।

कुल मिलाकर, इच्छुक माता-पिता को इन सभी शहरों में समग्र लागत के लिए समान बजट रखने की सलाह दी जाती है, क्योंकि अधिकांश खर्च कानून द्वारा अनिवार्य हैं। भारत में सरोगेसी की लागत और इसकी प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी के लिए आप अन्य स्रोतों से भी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

मुख्य बातें

  • बेंगलुरु में सरोगेसी की कुल लागत 2026 में ₹18 लाख से ₹25 लाख के बीच अनुमानित है, जिसमें IVF, सरोगेट की चिकित्सा देखभाल, कानूनी खर्च और बीमा शामिल है।
  • भारत में केवल परोपकारी सरोगेसी ही कानूनी है, जिसका अर्थ है कि सरोगेट माँ को बच्चे को जन्म देने के लिए कोई सीधा मौद्रिक भुगतान नहीं किया जाता, बल्कि उसके चिकित्सा और बीमा खर्च कवर किए जाते हैं।
  • लागत को प्रभावित करने वाले मुख्य कारकों में IVF चक्रों की संख्या, दवाइयाँ, सरोगेट की प्रसवपूर्व व प्रसवोत्तर देखभाल, अनिवार्य 36 माह का बीमा, और कानूनी व प्रशासनिक शुल्क शामिल हैं।
  • बेंगलुरु में सरोगेसी की लागत दिल्ली, मुंबई और हैदराबाद जैसे अन्य भारतीय शहरों के समान है, क्योंकि चिकित्सा और कानूनी ढाँचा राष्ट्रव्यापी रूप से विनियमित है।
  • अप्रत्याशित जटिलताएँ या अतिरिक्त IVF चक्रों की आवश्यकता कुल खर्च को बढ़ा सकती है, इसलिए एक लचीला बजट रखना महत्वपूर्ण है।

बेंगलुरु में सरोगेसी खर्च का विस्तृत ब्रेकडाउन (मद-वार)

बेंगलुरु में सरोगेसी की प्रक्रिया को समझने के लिए, कुल लागत के विस्तृत ब्रेकडाउन को जानना अत्यंत महत्वपूर्ण है। भारत में सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम, 2021 के तहत व्यावसायिक सरोगेसी प्रतिबंधित है, जिसका अर्थ है कि सरोगेट माँ को चिकित्सा खर्च और अनिवार्य बीमा के अतिरिक्त कोई वित्तीय मुआवजा नहीं दिया जाता है। इस प्रकार, 'लागत' मुख्य रूप से चिकित्सा प्रक्रियाओं, कानूनी औपचारिकताओं, बीमा और प्रशासनिक सेवाओं से संबंधित होती है। यहाँ बेंगलुरु में सरोगेसी के विभिन्न घटकों और उनकी अनुमानित लागत का विस्तृत विवरण दिया गया है:

मदअनुमानित रेंज (₹)टिप्पणी
ART क्लीनिक पंजीकरण और प्रारंभिक परामर्श5,000 – 15,000क्लिनिक में पंजीकरण और विशेषज्ञ के साथ शुरुआती सलाह।
इच्छुक कपल/महिला की प्रारंभिक जांच20,000 – 50,000विस्तृत मेडिकल टेस्ट, हार्मोन प्रोफाइल, आनुवंशिक स्क्रीनिंग, संक्रमण जांच।
IVF प्रक्रिया (दवाएं, अंडा पुनर्प्राप्ति, लैब शुल्क)1,50,000 – 3,00,000हार्मोन इंजेक्शन, अंडे निकालने की प्रक्रिया, शुक्राणु संग्रह (यदि आवश्यक हो), भ्रूण निर्माण और विकास।
भ्रूण स्थानांतरण (Embryo Transfer)30,000 – 60,000तैयार भ्रूण को सरोगेट के गर्भाशय में स्थानांतरित करना।
सरोगेट की प्रारंभिक जांच व मूल्यांकन20,000 – 40,000सरोगेट माँ के स्वास्थ्य की जांच, जिसमें शारीरिक, मनोवैज्ञानिक और संक्रमण संबंधी परीक्षण शामिल हैं।
सरोगेट का चिकित्सा खर्च (गर्भावस्था के दौरान)2,50,000 – 4,00,000नियमित जांच, अल्ट्रासाउंड, ब्लड टेस्ट, दवाएं, विटामिन और पूरक आहार।
डिलीवरी शुल्क (सामान्य/सिजेरियन)1,00,000 – 3,00,000अस्पताल के प्रकार, डिलीवरी के तरीके (नॉर्मल डिलीवरी या सिजेरियन सेक्शन) और शहर पर निर्भर करता है।
सरोगेट का 36 माह का स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम50,000 – 1,00,000कानून द्वारा अनिवार्य, डिलीवरी के बाद की जटिलताओं सहित 36 महीनों के लिए कवरेज।
कानूनी औपचारिकताएं और दस्तावेज़ीकरण70,000 – 1,50,000इच्छुक माता-पिता और सरोगेट के बीच अनुबंध, नोटरीकरण, हलफनामे और जन्म प्रमाण पत्र संबंधी कार्य।
काउंसलर/मनोवैज्ञानिक सहायता20,000 – 50,000इच्छुक माता-पिता और सरोगेट दोनों के लिए भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक समर्थन।
ART क्लीनिक/एजेंसी प्रशासनिक/समन्वय शुल्क2,00,000 – 4,00,000प्रक्रिया के समन्वय, प्रशासनिक कार्य, सरोगेट की निगरानी और संबंधित सेवाओं के लिए शुल्क।
अप्रत्याशित खर्च (जटिलताएँ, अतिरिक्त दवाएँ, NICU)1,00,000 – 5,00,000अप्रत्याशित चिकित्सा जटिलताओं या नवजात शिशु को विशेष देखभाल (NICU) की आवश्यकता होने पर।

स्रोत: सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम, 2021; अनुमानित लागत विभिन्न क्लीनिकों और व्यक्तिगत केस पर आधारित हैं।

IVF व भ्रूण स्थानांतरण, सरोगेट का मेडिकल केयर, अस्पताल/डिलीवरी शुल्क

सरोगेसी की लागत का एक बड़ा हिस्सा चिकित्सा प्रक्रियाओं और सरोगेट की देखभाल पर केंद्रित होता है। इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF) और भ्रूण स्थानांतरण इस यात्रा के शुरुआती और महत्वपूर्ण कदम हैं। इसमें हार्मोनल दवाएं, फॉलिकल मॉनिटरिंग, अंडे निकालने की प्रक्रिया और लैब में भ्रूण तैयार करना शामिल है। इसके बाद, तैयार भ्रूण को सरोगेट के गर्भाशय में स्थानांतरित किया जाता है। इन प्रक्रियाओं के लिए अत्याधुनिक उपकरण और विशेषज्ञ डॉक्टरों की आवश्यकता होती है, जो लागत में महत्वपूर्ण योगदान करते हैं।

सरोगेट के मेडिकल केयर में गर्भावस्था के पूरे नौ महीनों के दौरान नियमित और व्यापक जांच शामिल है। इसमें मासिक डॉक्टर विजिट, अल्ट्रासाउंड स्कैन, रक्त परीक्षण, आवश्यक दवाएं और गर्भावस्था के पूरक आहार शामिल हैं। भारत में सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम, 2021 के तहत यह सुनिश्चित करना अनिवार्य है कि सरोगेट माँ को गर्भावस्था के दौरान सर्वोत्तम चिकित्सा देखभाल मिले। किसी भी जटिलता की स्थिति में अतिरिक्त परीक्षण या उपचार की आवश्यकता हो सकती है, जिससे लागत बढ़ सकती है।

डिलीवरी शुल्क भी सरोगेसी की लागत का एक महत्वपूर्ण घटक है। इसमें अस्पताल का कमरा, ऑपरेशन थिएटर का उपयोग (यदि सिजेरियन हो), डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की फीस, दवाएं और डिलीवरी के बाद की देखभाल शामिल है। सामान्य डिलीवरी की तुलना में सिजेरियन सेक्शन में अक्सर अधिक खर्च आता है, क्योंकि इसमें अधिक समय, संसाधन और स्टाफ की आवश्यकता होती है। यह शुल्क चयनित अस्पताल और वहां की सुविधाओं के स्तर के अनुसार काफी भिन्न हो सकता है।

कानूनी फ़ीस, बीमा प्रीमियम और एजेंसी/क्लिनिक चार्ज का अलग-अलग विवरण

सरोगेसी प्रक्रिया में कानूनी पहलू अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं ताकि सभी पक्षों के अधिकारों और जिम्मेदारियों को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया जा सके। कानूनी फीस में इच्छुक माता-पिता और सरोगेट माँ के बीच सरोगेसी समझौते का मसौदा तैयार करना, नोटरीकरण, और न्यायिक प्रक्रियाओं के माध्यम से माता-पिता के अधिकारों को स्थापित करना शामिल है। इसमें बच्चे के जन्म प्रमाण पत्र पर माता-पिता का नाम दर्ज कराने और अन्य आवश्यक अदालत के आदेश प्राप्त करने की लागत भी शामिल हो सकती है। इन कानूनी औपचारिकताओं को 'भारत में सरोगेसी से जुड़े कानूनी पहलू' के तहत समझना आवश्यक है।

सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम, 2021 और उसके नियमों के तहत, सरोगेट माँ के लिए अनिवार्य रूप से 36 महीने का स्वास्थ्य बीमा कवर लेना आवश्यक है। यह बीमा गर्भावस्था के दौरान या डिलीवरी के बाद उत्पन्न होने वाली किसी भी जटिलता या बीमारी को कवर करता है। इसका उद्देश्य सरोगेट माँ को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करना है। 'सरोगेट मदर के लिए बीमा कवरेज' एक गैर-परक्राम्य खर्च है और इसकी लागत बीमा प्रदाता और कवरेज की विशिष्टताओं के आधार पर भिन्न हो सकती है।

कई ART (Assisted Reproductive Technology) क्लीनिक या सरोगेसी एजेंसियां समग्र प्रक्रिया को सुविधाजनक बनाने के लिए प्रशासनिक और समन्वय शुल्क लेती हैं। इन शुल्कों में सरोगेट माँ की पहचान और मिलान (कानूनी दिशानिर्देशों के भीतर), चिकित्सा अपॉइंटमेंट का समन्वय, दस्तावेज़ीकरण प्रबंधन, सरोगेट माँ की नियमित निगरानी और अन्य लॉजिस्टिक सहायता शामिल होती है। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि ये शुल्क सरोगेट को सीधे भुगतान नहीं हैं, बल्कि सेवा प्रदाताओं द्वारा प्रदान की जाने वाली प्रबंधन और प्रशासनिक सेवाओं के लिए हैं, क्योंकि व्यावसायिक सरोगेसी भारत में प्रतिबंधित है।

मुख्य बातें

  • बेंगलुरु में सरोगेसी की लागत मुख्य रूप से चिकित्सा प्रक्रियाओं, कानूनी औपचारिकताओं, बीमा प्रीमियम और प्रशासनिक सेवाओं पर केंद्रित होती है।
  • IVF, भ्रूण स्थानांतरण और सरोगेट की पूरी गर्भावस्था के दौरान चिकित्सा देखभाल कुल खर्च का एक बड़ा हिस्सा होते हैं।
  • सरोगेट माँ के लिए 36 महीने का अनिवार्य स्वास्थ्य बीमा कवर और कानूनी समझौते तैयार करने की फीस महत्वपूर्ण और गैर-परक्राम्य खर्च हैं।
  • ART क्लीनिकों द्वारा लिए जाने वाले प्रशासनिक और समन्वय शुल्क, सरोगेसी प्रक्रिया के सुचारु संचालन को सुनिश्चित करते हैं, लेकिन यह सरोगेट को भुगतान नहीं है।
  • अप्रत्याशित चिकित्सा जटिलताएँ या विशेष नवजात देखभाल (NICU) की आवश्यकता होने पर कुल लागत बढ़ सकती है।

सरोगेसी पैकेज में क्या-क्या शामिल और क्या बाहर होता है?

बेंगलुरु में सरोगेसी प्रक्रिया अपनाते समय, पैकेज की संरचना को समझना अत्यंत महत्वपूर्ण है। भारत में सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम, 2021 (Surrogacy (Regulation) Act, 2021) के अनुसार, केवल परोपकारी (altruistic) सरोगेसी की अनुमति है। इसका अर्थ है कि सरोगेट माँ को चिकित्सा व्यय और अनिवार्य बीमा के अलावा कोई भी मौद्रिक मुआवज़ा नहीं दिया जा सकता। इसलिए, पैकेज की संरचना इन कानूनी दिशानिर्देशों का पालन करती है, जिसमें चिकित्सा, कानूनी और प्रशासनिक खर्चों को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया जाता है।

All-inclusive बनाम बेसिक पैकेज: कवरेज में अंतर

सरोगेसी पैकेज को अक्सर 'बेसिक' या 'ऑल-इनक्लूसिव' के रूप में वर्गीकृत किया जाता है, लेकिन भारत में कानून के कारण इनके दायरे में महत्वपूर्ण अंतर होता है:

  • बेसिक पैकेज: इस पैकेज में आमतौर पर सरोगेसी प्रक्रिया के कुछ मुख्य घटक शामिल होते हैं। इसमें इच्छुक माता-पिता के लिए आईवीएफ (IVF) साइकिल (अंडाणु पुनर्प्राप्ति, शुक्राणु निषेचन, भ्रूण निर्माण), भ्रूण स्थानांतरण, और सरोगेट माँ की प्रारंभिक चिकित्सा जांच शामिल हो सकती है। हालांकि, सरोगेट की गर्भावस्था के दौरान की पूरी चिकित्सा देखभाल, डिलीवरी के खर्च, अनिवार्य बीमा, और कानूनी शुल्क जैसे कई महत्वपूर्ण पहलू इसमें शामिल नहीं होते।
  • ऑल-इनक्लूसिव (व्यापक) पैकेज: यह पैकेज कानूनी रूप से अनुमेय खर्चों की एक विस्तृत श्रृंखला को कवर करने का प्रयास करता है। इसमें आमतौर पर इच्छुक माता-पिता के लिए आईवीएफ साइकिल, सरोगेट माँ की स्क्रीनिंग और तैयारी, गर्भावस्था के दौरान नियमित चिकित्सा जांच, पोषण संबंधी सहायता, प्रसवकालीन देखभाल और डिलीवरी का खर्च शामिल होता है। इसके अतिरिक्त, सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम, 2021 के तहत सरोगेट माँ के लिए अनिवार्य 36 महीने का बीमा और कानूनी दस्तावेज तथा प्रक्रिया शुल्क भी अक्सर इस व्यापक पैकेज का हिस्सा होते हैं। यह महत्वपूर्ण है कि 'ऑल-इनक्लूसिव' का मतलब यह नहीं है कि इसमें सरोगेट को कोई अतिरिक्त भुगतान शामिल होगा, बल्कि यह सभी वैध और आवश्यक खर्चों को समेकित करने का प्रयास करता है। एक व्यापक सरोगेसी गाइड के लिए आप भारत में सरोगेसी प्रक्रिया के बारे में भी पढ़ सकते हैं।

    छुपे हुए या अतिरिक्त खर्च जिनका पहले से अनुमान ज़रूरी है

    सरोगेसी की लागत में अप्रत्याशित वृद्धि से बचने के लिए, उन अतिरिक्त खर्चों को समझना आवश्यक है जो पैकेज में शामिल नहीं हो सकते हैं या जिनकी पहले से उम्मीद नहीं की जा सकती:

    • असफल आईवीएफ/भ्रूण स्थानांतरण साइकिल: यदि पहली आईवीएफ साइकिल या भ्रूण स्थानांतरण सफल नहीं होता है, तो अतिरिक्त साइकिल के लिए दवाएँ, प्रक्रिया शुल्क और सरोगेट की पुनः तैयारी का खर्च बढ़ सकता है। यह एक महत्वपूर्ण जोखिम है जिसका पहले से अनुमान लगाना चाहिए।
    • अतिरिक्त दवाइयाँ: विशिष्ट चिकित्सा आवश्यकताओं के आधार पर, इच्छुक माता-पिता या सरोगेट माँ के लिए कुछ विशेष दवाइयों की आवश्यकता पड़ सकती है जो पैकेज के मानक दवा प्रोटोकॉल का हिस्सा न हों।
    • डोनर युग्मकों (Gametes) की आवश्यकता: यदि इच्छुक माता-पिता को चिकित्सा कारणों से डोनर अंडे या शुक्राणु की आवश्यकता होती है (जैसा कि Surrogacy (Regulation) Rules, 2022 के 2024 संशोधनों द्वारा अनुमत है), तो इसके लिए अलग से शुल्क देना होगा, जो पैकेज में शामिल नहीं होता।
    • गर्भावस्था में जटिलताएँ: यदि सरोगेट माँ को गर्भावस्था के दौरान कोई स्वास्थ्य जटिलता (जैसे उच्च रक्तचाप, गर्भावधि मधुमेह, या समय से पहले प्रसव का जोखिम) होती है, तो अतिरिक्त चिकित्सा देखभाल, अस्पताल में भर्ती, या विशिष्ट उपचार का खर्च बढ़ सकता है।
    • NICU (नवजात गहन चिकित्सा इकाई) का खर्च: यदि शिशु समय से पहले जन्म लेता है या जन्म के बाद उसे विशेष चिकित्सा देखभाल (जैसे NICU में भर्ती) की आवश्यकता होती है, तो इन लागतों को आमतौर पर इच्छुक माता-पिता द्वारा वहन किया जाता है और वे मानक सरोगेसी पैकेज का हिस्सा नहीं होतीं। यह एक संभावित लेकिन महत्वपूर्ण खर्च है।
    • एकाधिक गर्भधारण: हालांकि आमतौर पर एक ही भ्रूण का स्थानांतरण किया जाता है, यदि एकाधिक भ्रूण स्थानांतरित किए जाते हैं और जुड़वाँ या तीन बच्चे होते हैं, तो प्रसव की लागत और नवजात देखभाल में वृद्धि हो सकती है।
    • कानूनी अप्रत्याशित खर्च: कुछ मामलों में, कानूनी प्रक्रिया में अप्रत्याशित जटिलताएँ आ सकती हैं, जिससे अतिरिक्त कानूनी शुल्क लग सकते हैं।

    बेंगलुरु के पंजीकृत ART क्लीनिक पैकेज को कैसे संरचित करते हैं

    बेंगलुरु में पंजीकृत ART (Assisted Reproductive Technology) क्लीनिक, ART (विनियमन) अधिनियम, 2021 (ART (Regulation) Act, 2021) और सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम, 2021 के प्रावधानों का पालन करते हुए अपने पैकेजों को संरचित करते हैं। इन कानूनों का उद्देश्य प्रक्रिया में पारदर्शिता और नैतिकता सुनिश्चित करना है।

    क्लीनिक आमतौर पर निम्नलिखित घटकों को स्पष्ट रूप से अलग करते हैं:

    1. इच्छुक माता-पिता के चिकित्सा खर्च: इसमें उनके आईवीएफ चक्र, दवाएँ, प्रयोगशाला शुल्क और भ्रूण निर्माण से संबंधित खर्च शामिल होते हैं।
    2. सरोगेट माँ के चिकित्सा खर्च: इसमें सरोगेट की प्रारंभिक जांच, गर्भावस्था के दौरान की सभी चिकित्सा देखभाल, नियमित जांच, परीक्षण और प्रसव का खर्च शामिल होता है।
    3. अनिवार्य बीमा: कानून के तहत सरोगेट माँ के लिए 36 महीने का स्वास्थ्य बीमा अनिवार्य है, जो प्रसवोत्तर जटिलताओं को कवर करता है। इस प्रीमियम को पैकेज में शामिल किया जाता है।
    4. कानूनी और प्रशासनिक शुल्क: इसमें सरोगेसी समझौते का मसौदा तैयार करना, अदालती प्रक्रियाएँ, माता-पिता के आदेश प्राप्त करना और अन्य कानूनी औपचारिकताएँ शामिल होती हैं। साथ ही, क्लीनिक द्वारा प्रक्रिया के समन्वय, रिकॉर्ड रखने और कानूनी अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए प्रशासनिक शुल्क भी लिया जाता है।

    सभी पंजीकृत क्लीनिक एक विस्तृत लिखित अनुबंध प्रदान करते हैं जिसमें प्रत्येक खर्च घटक को स्पष्ट रूप से दर्शाया जाता है। इच्छुक माता-पिता को सलाह दी जाती है कि वे पैकेज में शामिल और बाहर किए गए सभी बिंदुओं को ध्यानपूर्वक समझें और कोई भी निर्णय लेने से पहले सभी संबंधित दस्तावेजों की समीक्षा करें।

    मुख्य बातें

    • भारत में केवल परोपकारी सरोगेसी कानूनी है, इसलिए सरोगेट को चिकित्सा और बीमा के अलावा कोई मौद्रिक भुगतान नहीं किया जाता।
    • 'बेसिक' पैकेज में अक्सर केवल कोर आईवीएफ और प्रारंभिक जांच शामिल होती है, जबकि 'ऑल-इनक्लूसिव' पैकेज में व्यापक चिकित्सा, कानूनी और प्रशासनिक खर्च शामिल हो सकते हैं।
    • अतिरिक्त खर्चों में असफल साइकिल, विशेष दवाएँ, डोनर युग्मक, गर्भावस्था की जटिलताएँ और NICU की आवश्यकता शामिल हो सकती है।
    • बेंगलुरु के पंजीकृत ART क्लीनिक कानून का पालन करते हुए पैकेजों को संरचित करते हैं, जिसमें चिकित्सा, बीमा और कानूनी शुल्क को स्पष्ट रूप से दर्शाया जाता है।
    • किसी भी सरोगेसी पैकेज को स्वीकार करने से पहले सभी खर्चों का विस्तृत लिखित अनुबंध समझना अत्यंत महत्वपूर्ण है।

    लागत बढ़ने के पीछे के कारण: एक साइकिल बनाम मल्टीपल साइकिल

    बेंगलुरु में सरोगेसी की कुल लागत कई कारकों पर निर्भर करती है, जिनमें से एक महत्वपूर्ण कारक है पूरी प्रक्रिया के दौरान लगने वाली आईवीएफ (IVF) साइकिलों की संख्या और उसमें उत्पन्न होने वाली संभावित जटिलताएँ। यह खंड उन मुख्य कारणों की पड़ताल करता है जिनकी वजह से सरोगेसी की लागत बढ़ सकती है, विशेषकर जब एक से अधिक चक्रों की आवश्यकता होती है या विशेष चिकित्सा सहायता की ज़रूरत पड़ती है। Vinsfertility जैसे प्लेटफ़ॉर्म व्यापक जानकारी प्रदान करते हैं, लेकिन वास्तविक खर्चों को समझना ज़रूरी है।

    पहली बार में सफलता न मिलने पर अतिरिक्त IVF साइकिल का खर्च

    इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) प्रक्रिया सरोगेसी का एक केंद्रीय चरण है, जहाँ अंडे और शुक्राणु को शरीर के बाहर निषेचित किया जाता है और फिर भ्रूण को सरोगेट के गर्भाशय में प्रत्यारोपित किया जाता है। यह ज़रूरी नहीं कि पहला आईवीएफ चक्र हमेशा सफल हो। कई बार, विभिन्न कारणों से, जैसे भ्रूण का प्रत्यारोपण न होना या प्रारंभिक गर्भावस्था का विफल हो जाना, अतिरिक्त आईवीएफ चक्रों की आवश्यकता पड़ सकती है। प्रत्येक अतिरिक्त आईवीएफ चक्र से लागत में वृद्धि होती है, क्योंकि इसमें निम्नलिखित खर्च फिर से शामिल होते हैं:

    • दवाइयाँ: अंडाशय को उत्तेजित करने वाली और गर्भाशय को तैयार करने वाली हार्मोनल दवाएँ।
    • मेडिकल जाँचें और मॉनिटरिंग: अल्ट्रासाउंड, रक्त परीक्षण और अन्य निदान प्रक्रियाएँ।
    • अंडा पुनर्प्राप्ति (Egg Retrieval): यह एक छोटी सर्जिकल प्रक्रिया है।
    • भ्रूण विज्ञान प्रयोगशाला शुल्क: निषेचन, भ्रूण कल्चर और चयन।
    • भ्रूण स्थानांतरण (Embryo Transfer): भ्रूण को सरोगेट के गर्भाशय में रखने की प्रक्रिया।

    इन सभी प्रक्रियाओं का खर्च हर नए चक्र के साथ जुड़ता जाता है, जिससे कुल सरोगेसी लागत में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।

    डोनर एग/स्पर्म की ज़रूरत होने पर बढ़ने वाली लागत

    कुछ मामलों में, इच्छुक माता-पिता को स्वयं के युग्मकों (gametes) का उपयोग करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। ऐसी स्थितियों में, डोनर एग (अंडाणु) या डोनर स्पर्म (शुक्राणु) की आवश्यकता पड़ सकती है। उदाहरण के लिए, यदि इच्छुक माँ के अंडे की गुणवत्ता खराब है, या अंडाणु उत्पन्न नहीं हो पा रहे हैं, या पुरुष साथी में गंभीर शुक्राणु संबंधी समस्याएँ हैं। Surrogacy (Regulation) Rules, 2022 में 2024 में हुए संशोधनों ने कुछ विशेष चिकित्सा स्थितियों में डोनर युग्मकों के उपयोग को संबोधित किया है, बशर्ते चिकित्सीय बोर्ड द्वारा इसकी सिफारिश की गई हो।[1]

    डोनर युग्मकों का उपयोग करने से सरोगेसी की कुल लागत में वृद्धि होती है क्योंकि इसमें निम्नलिखित अतिरिक्त शुल्क शामिल होते हैं:

    • डोनर की स्क्रीनिंग और चयन: डोनर की स्वास्थ्य जाँच, आनुवंशिक परीक्षण और मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन।
    • डोनर को मुआवज़ा: यद्यपि भारत में सरोगेट मदर को व्यावसायिक मुआवज़ा नहीं दिया जाता, डोनर एग या स्पर्म डोनर को उनके समय और असुविधा के लिए निर्धारित मुआवज़ा प्रदान किया जाता है।
    • युग्मकों का संग्रह: अंडे निकालने या शुक्राणु एकत्र करने की प्रक्रिया।
    • क्रायोप्रिजर्वेशन: यदि अतिरिक्त युग्मकों को भविष्य के उपयोग के लिए संरक्षित करना हो।

    ये सभी खर्च सरोगेसी प्रक्रिया की कुल वित्तीय रूपरेखा में एक महत्वपूर्ण घटक जोड़ते हैं।

    सरोगेट की आयु, स्वास्थ्य व गर्भावस्था जटिलताओं का खर्च पर असर

    सरोगेट माँ का चयन प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और उनकी आयु तथा स्वास्थ्य स्थिति लागत को सीधे प्रभावित कर सकती है। Surrogacy (Regulation) Act, 2021 के अनुसार, सरोगेट की आयु 25 से 35 वर्ष के बीच होनी चाहिए और उसका अपना एक बच्चा होना अनिवार्य है।[2]

    एक स्वस्थ सरोगेट माँ के साथ गर्भावस्था में जटिलताओं की संभावना कम होती है, लेकिन कुछ कारक लागत को बढ़ा सकते हैं:

    • गर्भावस्था से जुड़ी जटिलताएँ: यदि सरोगेट को गर्भकालीन मधुमेह, उच्च रक्तचाप (प्री-एक्लेमप्सिया), समय से पहले प्रसव पीड़ा या अन्य कोई समस्या होती है, तो उसे अधिक बार डॉक्टर के दौरे, विशेष जाँचों, अतिरिक्त दवाओं और संभवतः लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती रहने की आवश्यकता पड़ सकती है।
    • सीजेरियन सेक्शन (C-Section): यदि सामान्य प्रसव संभव न हो और सी-सेक्शन की आवश्यकता पड़े, तो अस्पताल का खर्च और संबंधित चिकित्सा शुल्क बढ़ जाते हैं।
    • नवजात शिशु की जटिलताएँ: यदि समय से पहले जन्म हो या नवजात शिशु को कोई स्वास्थ्य समस्या हो, तो नियोनेटल इंटेंसिव केयर यूनिट (NICU) में भर्ती की आवश्यकता पड़ सकती है, जिससे बहुत अधिक खर्च आता है।

    कानून के तहत, इच्छुक माता-पिता को सरोगेट माँ के लिए 36 महीने का स्वास्थ्य बीमा कवर प्रदान करना अनिवार्य है, जो गर्भावस्था से संबंधित और प्रसवोत्तर जटिलताओं सहित सभी चिकित्सा खर्चों को कवर करता है। हालांकि, अप्रत्याशित या गंभीर जटिलताएँ कुल लागत में वृद्धि कर सकती हैं, खासकर यदि वे बीमा कवरेज से अधिक हों या विशेष देखभाल की आवश्यकता हो। इन सभी संभावनाओं को ध्यान में रखना आवश्यक है, क्योंकि ये अप्रत्याशित खर्च सरोगेसी की कुल अनुमानित लागत को काफी हद तक बढ़ा सकते हैं। एक सफल सरोगेसी प्रक्रिया के लिए, सरोगेट माँ की उचित देखभाल और किसी भी संभावित जटिलता के लिए वित्तीय तैयारी महत्वपूर्ण है। सरोगेट मदर की योग्यता के बारे में और जानने के लिए आप सरोगेट मदर क्या है: भारत में योग्यता पर हमारे ब्लॉग को पढ़ सकते हैं।

    मुख्य बातें

    • पहली आईवीएफ साइकिल में सफलता न मिलने पर, हर अतिरिक्त साइकिल के लिए दवाओं, जाँचों और प्रक्रियाओं का खर्च फिर से वहन करना पड़ता है, जिससे कुल लागत बढ़ती है।
    • डोनर एग या स्पर्म की आवश्यकता होने पर डोनर की स्क्रीनिंग, मुआवज़ा और युग्मक संग्रह के अतिरिक्त शुल्क लगते हैं, जिससे लागत में वृद्धि होती है।
    • सरोगेट की आयु, स्वास्थ्य स्थिति और गर्भावस्था के दौरान होने वाली कोई भी जटिलता (जैसे समय से पहले जन्म या सी-सेक्शन) चिकित्सा खर्चों को बढ़ा सकती है, जिसमें अतिरिक्त जाँचें, दवाएँ और संभावित रूप से नवजात शिशु के लिए NICU खर्च शामिल हैं।
    • सरोगेट माँ के लिए अनिवार्य 36 माह का स्वास्थ्य बीमा कवर होने के बावजूद, अप्रत्याशित और गंभीर जटिलताएँ कुल खर्च को बढ़ा सकती हैं।

    2026 के कानून के अनुसार सरोगेसी में अनिवार्य खर्च कौन-से हैं?

    भारत में सरोगेसी की लागत को समझने के लिए, 2021 के सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम और इसके बाद के नियमों का पालन करना अनिवार्य है। ये कानून स्पष्ट रूप से उन खर्चों को निर्धारित करते हैं जिन्हें कानूनी तौर पर वहन किया जा सकता है और उन भुगतानों पर प्रतिबंध लगाते हैं जो पहले वाणिज्यिक सरोगेसी का हिस्सा थे। यह खंड 2026 तक लागू कानूनों के तहत अनिवार्य खर्चों और उनके लागत पर पड़ने वाले प्रभावों पर प्रकाश डालता है। Vinsfertility का लक्ष्य इस संवेदनशील विषय पर सटीक और विश्वसनीय जानकारी प्रदान करना है ताकि इच्छुक माता-पिता सूचित निर्णय ले सकें।

    मुख्य प्रावधान तालिका: कानून, प्रावधान और लागत पर प्रभाव

    अधिनियम/नियमप्रावधानलागत पर प्रभाव
    सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम, 2021केवल परोपकारी (Altruistic) सरोगेसी की अनुमति है; वाणिज्यिक सरोगेसी प्रतिबंधित।सरोगेट को कोई वित्तीय मुआवजा (किराया) नहीं दिया जा सकता। केवल चिकित्सा खर्च, बीमा और कुछ अन्य वैधानिक शुल्क ही अनुमत हैं, जिससे कुल लागत कम होती है।
    सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम, 2021इच्छुक युगल (Intending Couple) भारतीय नागरिक, कानूनी रूप से विवाहित होने चाहिए और उन्हें चिकित्सकीय रूप से बांझपन का प्रमाण देना होगा।पात्रता मानदंडों को पूरा करने के लिए आवश्यक चिकित्सा जांच और प्रमाणन की लागत। यह सुनिश्चित करता है कि सरोगेसी केवल चिकित्सकीय आवश्यकता पर आधारित हो।
    सरोगेसी (विनियमन) नियम, 2022सरोगेट माता के लिए अनिवार्य 36 महीने का बीमा कवर।यह बीमा प्रीमियम कुल सरोगेसी लागत का एक गैर-परक्राम्य हिस्सा है, जो सरोगेट के स्वास्थ्य और गर्भावस्था से संबंधित जटिलताओं को कवर करता है।
    सरोगेसी (विनियमन) नियम, 2022सरोगेट माता इच्छुक युगल की करीबी रिश्तेदार होनी चाहिए (अब संशोधित)।कानूनी फीस में बढ़ोतरी हो सकती है क्योंकि रिश्तेदार की पुष्टि और उससे संबंधित दस्तावेज़ तैयार करने की प्रक्रिया में अतिरिक्त कदम शामिल हो सकते हैं।
    सरोगेसी (विनियमन) (संशोधन) नियम, 2024चिकित्सकीय स्थिति में इच्छित युगल के एक सदस्य के युग्मक (gamete) के विफल होने पर दाता युग्मक के उपयोग की अनुमति।यदि दाता अंडे या शुक्राणु की आवश्यकता होती है, तो दाता युग्मक प्राप्त करने की अतिरिक्त लागत, जिसमें दाता का चयन, स्क्रीनिंग और मुआवजा शामिल है।
    सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी (विनियमन) अधिनियम, 2021सभी ART क्लीनिक और सरोगेसी क्लीनिकों का पंजीकरण और विनियमन अनिवार्य।पंजीकृत क्लीनिकों द्वारा प्रदान की जाने वाली सेवाएं मानकों के अनुरूप होती हैं, जिसके कारण उनकी फीस में एक निश्चित स्तर की गुणवत्ता और कानूनी अनुपालन की लागत शामिल होती है।

    स्रोत: सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम, 2021, सरोगेसी (विनियमन) नियम, 2022, सरोगेसी (विनियमन) (संशोधन) नियम, 2024

    सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम 2021 के तहत केवल परोपकारी सरोगेसी — व्यावसायिक भुगतान प्रतिबंधित

    भारत में, सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम, 2021, ने वाणिज्यिक सरोगेसी पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है। इस अधिनियम का मुख्य उद्देश्य सरोगेट माताओं के शोषण को रोकना और सरोगेसी को एक परोपकारी कार्य के रूप में स्थापित करना है। इसका मतलब यह है कि सरोगेट माता को बच्चे को जन्म देने के लिए कोई वित्तीय मुआवजा या 'भुगतान' नहीं किया जा सकता है। कानून केवल सरोगेट के चिकित्सा खर्चों, गर्भावस्था के दौरान पोषण संबंधी सहायता और गर्भावस्था के कारण होने वाली किसी भी जटिलता के लिए बीमा कवर की अनुमति देता है। इस प्रतिबंध से सरोगेसी की कुल लागत में काफी कमी आई है, क्योंकि सरोगेट को दिए जाने वाले महत्वपूर्ण मुआवजे का घटक अब मौजूद नहीं है। इच्छुक माता-पिता को केवल ART प्रक्रिया (IVF), सरोगेट की चिकित्सा देखभाल, डिलीवरी शुल्क और कानूनी प्रक्रियाओं से संबंधित खर्चों को कवर करना होता है।

    यह कानूनी ढांचा सुनिश्चित करता है कि सरोगेसी नैतिकता के दायरे में की जाए, जिसमें इच्छुक युगल और सरोगेट दोनों के अधिकारों और कल्याण को प्राथमिकता दी जाए। इस अधिनियम के बारे में अधिक जानकारी भारत में सरोगेसी के कानून और प्रक्रिया पर उपलब्ध है।

    सरोगेसी नियम 2022 व 2024 संशोधन: सरोगेट का 36 माह का बीमा कवर अनिवार्य

    सरोगेसी (विनियमन) नियम, 2022, और 2024 के संशोधनों ने सरोगेसी प्रक्रिया में कई महत्वपूर्ण प्रावधान जोड़े हैं, जिनमें से एक सरोगेट माता के लिए अनिवार्य बीमा कवर है। इन नियमों के अनुसार, इच्छुक युगल को सरोगेट माता के लिए कम से कम 36 महीने का बीमा कवर प्रदान करना होगा। यह बीमा सरोगेट को गर्भावस्था से उत्पन्न होने वाली किसी भी जटिलता, प्रसवोत्तर स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं या अन्य चिकित्सा आवश्यकताओं के लिए सुरक्षा प्रदान करता है। इस बीमा का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बच्चे के जन्म के बाद भी सरोगेट का स्वास्थ्य और कल्याण सुरक्षित रहे।

    यह बीमा प्रीमियम सरोगेसी की कुल लागत का एक अनिवार्य और गैर-परक्राम्य हिस्सा है। यह दर्शाता है कि कानून सरोगेट के दीर्घकालिक स्वास्थ्य के प्रति प्रतिबद्ध है। इसके अतिरिक्त, 2024 के संशोधन ने कुछ चिकित्सकीय स्थितियों में दाता युग्मक के उपयोग की अनुमति दी है, बशर्ते इच्छुक युगल में से एक साथी चिकित्सकीय रूप से बांझ हो। यह संशोधन उन जोड़ों के लिए सरोगेसी का दायरा बढ़ाता है जिन्हें पहले कानूनी जटिलताओं का सामना करना पड़ सकता था, लेकिन यह दाता युग्मक के चयन, स्क्रीनिंग और उपयोग से संबंधित अतिरिक्त लागतों को भी जोड़ता है। यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि इच्छुक माता-पिता इन कानूनी अनिवार्यताओं और उनसे जुड़े खर्चों से पूरी तरह अवगत हों।

    मुख्य बातें

    • भारत में सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम, 2021 के तहत केवल परोपकारी सरोगेसी की अनुमति है, जिससे सरोगेट को व्यावसायिक भुगतान प्रतिबंधित है।
    • सरोगेसी की लागत में मुख्य रूप से IVF प्रक्रिया, सरोगेट की चिकित्सा देखभाल, डिलीवरी खर्च, कानूनी शुल्क और बीमा प्रीमियम शामिल हैं।
    • सरोगेसी (विनियमन) नियम, 2022 के अनुसार, सरोगेट माता के लिए 36 महीने का अनिवार्य बीमा कवर प्रदान करना आवश्यक है, जो कुल लागत का एक निश्चित घटक है।
    • 2024 के संशोधनों ने कुछ चिकित्सकीय स्थितियों में दाता युग्मक के उपयोग की अनुमति दी है, जिससे ऐसे मामलों में दाता युग्मक से संबंधित अतिरिक्त लागतें जुड़ सकती हैं।
    • कानूनी अनुपालन सुनिश्चित करने और सरोगेट के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए सभी अनिवार्य खर्चों की स्पष्ट समझ महत्वपूर्ण है।

Frequently Asked Questions

भारत में सरोगेसी कानूनी है या नहीं, और किस प्रकार की सरोगेसी अनुमत है?

भारत में सरोगेसी कानूनी है, लेकिन केवल परोपकारी (altruistic) सरोगेसी की अनुमति है। सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम, 2021 के अनुसार, व्यावसायिक सरोगेसी (commercial surrogacy) अवैध है। परोपकारी सरोगेसी में, सरोगेट माँ को चिकित्सा व्यय और गर्भावस्था से संबंधित अन्य आवश्यक खर्चों के अलावा कोई आर्थिक मुआवजा नहीं दिया जाता है। इस प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य उन निःसंतान दंपतियों को सहायता प्रदान करना है जो चिकित्सकीय कारणों से गर्भधारण नहीं कर सकते और कानून द्वारा निर्धारित पात्रता मानदंडों को पूरा करते हैं।

भारत में कौन सरोगेसी करवा सकता है (इच्छुक दंपति की पात्रता)?

भारत में सरोगेसी केवल चिकित्सकीय रूप से सिद्ध बांझपन वाले भारतीय विवाहित निःसंतान दंपतियों, या विधवा/तलाकशुदा भारतीय महिलाओं के लिए अनुमत है। सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम, 2021 के तहत, इच्छुक दंपति को भारतीय नागरिक होना चाहिए और कम से कम पांच साल से शादीशुदा होना चाहिए। महिला की उम्र 25 से 50 वर्ष और पुरुष की 26 से 55 वर्ष के बीच होनी चाहिए। विधवा या तलाकशुदा महिला की उम्र 35 से 45 वर्ष के बीच होनी चाहिए और उसे चिकित्सकीय रूप से गर्भधारण करने में असमर्थ होना चाहिए। उन्हें पहले से कोई जैविक या दत्तक बच्चा नहीं होना चाहिए।

सरोगेट माँ बनने के लिए भारत में क्या शर्तें हैं?

भारत में सरोगेट माँ बनने के लिए कुछ सख्त पात्रता मानदंड निर्धारित किए गए हैं, जिनमें मुख्य रूप से इच्छुक माँ की उम्र, वैवाहिक स्थिति और स्वास्थ्य शामिल हैं। सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम, 2021 के अनुसार, सरोगेट माँ को इच्छुक दंपति की करीबी रिश्तेदार होनी चाहिए, विवाहित होनी चाहिए, और उसका अपना एक जैविक बच्चा होना चाहिए। उसकी उम्र 25 से 35 वर्ष के बीच होनी चाहिए। वह अपने जीवनकाल में केवल एक बार सरोगेट माँ बन सकती है। उसे चिकित्सकीय और मनोवैज्ञानिक रूप से स्वस्थ होना चाहिए और इच्छुक दंपति द्वारा उसके नाम पर 36 महीने का स्वास्थ्य बीमा कवर प्रदान किया जाना चाहिए।

सरोगेसी की पूरी प्रक्रिया में अनुमानित कितना समय लग सकता है?

सरोगेसी की पूरी प्रक्रिया में आमतौर पर 15 से 18 महीने का समय लग सकता है, जिसमें प्रारंभिक मूल्यांकन से लेकर बच्चे के जन्म और कानूनी प्रक्रियाएं शामिल होती हैं। यह समय सरोगेट माँ के चयन, मेडिकल और कानूनी जांच, ART प्रक्रिया (जैसे IVF), गर्भावस्था की अवधि (लगभग 9 महीने) और बच्चे के जन्म के बाद माता-पिता के रूप में कानूनी अधिकारों को स्थापित करने में लगने वाले समय पर निर्भर करता है। विभिन्न चरणों में लगने वाला समय व्यक्तिगत परिस्थितियों और क्लीनिक की कार्यप्रणाली के आधार पर थोड़ा भिन्न हो सकता है।

सरोगेसी प्रक्रिया के लिए कौन से आवश्यक दस्तावेज़ और प्रमाणपत्र चाहिए होते हैं?

सरोगेसी प्रक्रिया शुरू करने के लिए इच्छुक दंपति और सरोगेट माँ दोनों को कई आवश्यक दस्तावेज़ और राष्ट्रीय सरोगेसी बोर्ड से 'आवश्यकता प्रमाणपत्र' और 'पात्रता प्रमाणपत्र' प्राप्त करना होता है। इन दस्तावेज़ों में विवाह प्रमाण पत्र, पहचान पत्र, निवास प्रमाण पत्र, चिकित्सा रिपोर्ट जो बांझपन को दर्शाती हैं, मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन रिपोर्ट, और सरोगेट माँ की मेडिकल फिटनेस रिपोर्ट शामिल हैं। 'आवश्यकता प्रमाणपत्र' यह पुष्टि करता है कि दंपति को चिकित्सकीय रूप से सरोगेसी की आवश्यकता है, जबकि 'पात्रता प्रमाणपत्र' सरोगेट माँ और इच्छुक दंपति दोनों की कानूनी पात्रता को सत्यापित करता है।

भारत में परोपकारी सरोगेसी का अनुमानित खर्च क्या है और इसमें क्या-क्या शामिल होता है?

भारत में परोपकारी सरोगेसी का अनुमानित खर्च आम तौर पर ₹10 लाख से ₹18 लाख तक हो सकता है, जिसमें सरोगेट माँ को कोई वाणिज्यिक भुगतान शामिल नहीं होता है। इस लागत में IVF/ART प्रक्रियाएँ, सरोगेट माँ के गर्भावस्था के दौरान के चिकित्सा व्यय, नियमित जांच, प्रसव का खर्च, दवाएँ, कानूनी शुल्क, और सरोगेट माँ के लिए अनिवार्य स्वास्थ्य बीमा (36 महीने के लिए) जैसे आवश्यक खर्च शामिल होते हैं। इसमें सरोगेट माँ को 'देखभाल और आराम' के लिए दिए जाने वाले आवश्यक भत्ते भी शामिल हो सकते हैं, जो वाणिज्यिक भुगतान नहीं माना जाता। स्थान और क्लीनिक के अनुसार लागत में भिन्नता हो सकती है।

क्या सरोगेसी में डोनर गेमेट (शुक्राणु या अंडाणु) का उपयोग किया जा सकता है?

सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम, 2021 के प्रावधानों के अनुसार, सरोगेसी के लिए डोनर गेमेट (शुक्राणु या अंडाणु) का उपयोग कुछ विशिष्ट परिस्थितियों में ही अनुमत है। इच्छुक दंपति में से कम से कम एक का गेमेट आनुवंशिक रूप से बच्चे से संबंधित होना अनिवार्य है। यदि पुरुष बांझ है, तो डोनर स्पर्म का उपयोग किया जा सकता है, बशर्ते महिला का अंडाणु उपयोग किया जाए। इसी तरह, यदि महिला बांझ है, तो डोनर अंडाणु का उपयोग किया जा सकता है, बशर्ते पुरुष का शुक्राणु उपयोग किया जाए। पूर्ण डोनर सरोगेसी (जहां दोनों गेमेट डोनर के हों) की अनुमति नहीं है।

क्या अनिवासी भारतीय (NRI) या भारतीय मूल के व्यक्ति (OCI) भारत में सरोगेसी का विकल्प चुन सकते हैं?

नहीं, सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम, 2021 के तहत अनिवासी भारतीय (NRI) या भारतीय मूल के व्यक्ति (OCI) भारत में सरोगेसी का विकल्प नहीं चुन सकते हैं। यह कानून स्पष्ट रूप से बताता है कि सरोगेसी केवल भारतीय नागरिकता वाले निःसंतान दंपतियों या महिलाओं के लिए ही उपलब्ध है। इसका उद्देश्य सरोगेसी प्रक्रिया में जटिलताओं और बच्चों की नागरिकता से जुड़े मुद्दों से बचना है। विदेशी नागरिकों, NRI और OCI कार्ड धारकों के लिए भारत में सरोगेसी की सुविधा उपलब्ध नहीं है।

सरोगेसी प्रक्रिया के दौरान इच्छुक दंपतियों द्वारा की जाने वाली आम गलतियाँ और उनसे कैसे बचें?

इच्छुक दंपतियों द्वारा की जाने वाली आम गलतियों में अपंजीकृत क्लीनिक का चुनाव, कानूनी पहलुओं की अनदेखी और सरोगेट माँ के साथ स्पष्ट समझौते का अभाव शामिल हैं। इन गलतियों से बचने के लिए, सुनिश्चित करें कि आप केवल राष्ट्रीय ART और सरोगेसी बोर्ड द्वारा पंजीकृत क्लीनिक और ART बैंकों का ही चुनाव करें। प्रक्रिया शुरू करने से पहले सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम, 2021 और ART (विनियमन) अधिनियम, 2021 के सभी कानूनी प्रावधानों को पूरी तरह समझ लें। सरोगेट माँ के साथ एक विस्तृत और कानूनी रूप से बाध्यकारी समझौता करें, जिसमें सभी चिकित्सा, वित्तीय और नैतिक पहलुओं को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया हो।

मैं भारत में एक पंजीकृत ART क्लीनिक और सरोगेसी क्लीनिक की जाँच कैसे कर सकता हूँ?

आप राष्ट्रीय ART और सरोगेसी रजिस्ट्री की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर भारत में पंजीकृत ART और सरोगेसी क्लीनिकों की सूची की जाँच कर सकते हैं। असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (विनियमन) अधिनियम, 2021 के तहत सभी ART क्लीनिकों और ART बैंकों के लिए पंजीकरण अनिवार्य है। यह रजिस्ट्री सार्वजनिक रूप से उपलब्ध है और इच्छुक दंपतियों को यह सत्यापित करने में मदद करती है कि वे एक वैध और विनियमित सुविधा के साथ काम कर रहे हैं। पंजीकरण की पुष्टि करना प्रक्रिया की सुरक्षा और कानूनी वैधता सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है।

सरोगेसी प्रक्रिया में इच्छुक दंपति के लिए अनिवार्य बीमा कवर की क्या आवश्यकता है?

सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम, 2021 के अनुसार, इच्छुक दंपति को सरोगेट माँ के लिए 36 महीने का स्वास्थ्य बीमा कवर प्रदान करना अनिवार्य है। यह बीमा सरोगेट माँ को गर्भावस्था और प्रसव के दौरान किसी भी चिकित्सा जटिलता या पोस्ट-पार्टम स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों से सुरक्षा प्रदान करता है। यह सुनिश्चित करता है कि सरोगेट माँ को अपनी गर्भावस्था के कारण उत्पन्न होने वाली किसी भी स्वास्थ्य समस्या के लिए पर्याप्त चिकित्सा देखभाल मिल सके, जिससे उसके कल्याण को प्राथमिकता दी जा सके। यह प्रावधान सरोगेट माँ के हितों की रक्षा के लिए बनाया गया है।

परोपकारी सरोगेसी में सरोगेट माँ को आर्थिक मुआवजा न दिए जाने का क्या अर्थ है?

परोपकारी सरोगेसी में सरोगेट माँ को आर्थिक मुआवजा न दिए जाने का अर्थ है कि उसे गर्भावस्था और प्रसव के लिए कोई वाणिज्यिक 'फीस' या 'वेतन' नहीं मिलता है। इसके बजाय, इच्छुक दंपति सरोगेट माँ के गर्भावस्था से संबंधित सभी चिकित्सा खर्चों (दवाएँ, जांचें, अस्पताल के बिल) और उसे गर्भावस्था के दौरान होने वाली असुविधाओं या पोषक आहार के लिए आवश्यक भत्ते प्रदान करते हैं। इस प्रावधान का उद्देश्य सरोगेसी को मानवीय सहायता के रूप में बढ़ावा देना और इसके वाणिज्यिक शोषण को रोकना है, जैसा कि सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम, 2021 में निर्धारित है।
Dr. Sunita Singh Rathore

Dr. Sunita Singh Rathore

Dr. Sunita Singh Rathore is a highly experienced fertility specialist with over 15 years of expertise in assisted reproductive techniques. She has helped numerous couples achieve their dream of parenthood with a compassionate and patient-centric approach.