दिल्ली में सरोगेसी की कुल लागत 2026 में कितनी है?
Vinsfertility के इस विशेष ब्लॉग 'दिल्ली में सरोगेसी की लागत 2026: संपूर्ण खर्च व पैकेज गाइड' के पहले सेक्शन में हम भारत की राजधानी दिल्ली में सरोगेसी की कुल अनुमानित लागत पर विस्तृत चर्चा करेंगे। सरोगेसी एक जटिल चिकित्सा और कानूनी प्रक्रिया है, और इसकी लागत कई कारकों पर निर्भर करती है। यह समझना महत्वपूर्ण है कि 2021 के सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम के लागू होने के बाद भारत में परोपकारी (altruistic) सरोगेसी ही मान्य है, जिसका अर्थ है कि सरोगेट माँ को कोई व्यावसायिक शुल्क नहीं दिया जाता है।
दिल्ली में सरोगेसी की कुल लागत 2026 में आमतौर पर ₹15 लाख से ₹25 लाख के बीच रहने का अनुमान है। यह लागत सरोगेट माँ की चिकित्सा देखभाल, आईवीएफ (IVF) प्रक्रियाएं, कानूनी औपचारिकताएं, बीमा, और सरोगेट के पोषण व अन्य सहायता खर्चों को कवर करती है। यह केवल एक अनुमानित सीमा है और व्यक्तिगत चिकित्सा आवश्यकताओं तथा क्लिनिक के चुनाव के आधार पर इसमें भिन्नता आ सकती है।
सरोगेसी की लागत को प्रभावित करने वाले मुख्य कारक
सरोगेसी की कुल लागत कई प्रमुख कारकों से प्रभावित होती है, जिनकी स्पष्ट समझ संभावित माता-पिता के लिए आवश्यक है:
- आईवीएफ क्लिनिक का चुनाव और उसकी सेवाएँ: दिल्ली में कई फर्टिलिटी क्लिनिक हैं जो सरोगेसी सेवाएँ प्रदान करते हैं। प्रत्येक क्लिनिक की अपनी फीस संरचना, अनुभव और सफलता दर होती है। उच्च अनुभवी डॉक्टर, आधुनिक उपकरण और बेहतर सफलता दर वाले क्लीनिकों की फीस थोड़ी अधिक हो सकती है। इसमें प्रारंभिक परामर्श, डायग्नोस्टिक टेस्ट, आईवीएफ साइकिल, भ्रूण स्थानांतरण और प्रसव पूर्व देखभाल शामिल है। यह भी ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि यदि दाता अंडाणु या शुक्राणु की आवश्यकता होती है, तो यह लागत में वृद्धि कर सकता है।
- सरोगेट माँ के लिए सहायता और चिकित्सा बीमा: भारत में परोपकारी सरोगेसी कानून के तहत, सरोगेट माँ को कोई वित्तीय मुआवज़ा नहीं दिया जाता, लेकिन उसके चिकित्सा खर्च, पोषण संबंधी ज़रूरतें, गर्भावस्था के दौरान की देखभाल और 36 महीने का व्यापक बीमा कवर करना अनिवार्य है। इस बीमा में प्रसव के बाद की जटिलताओं को भी शामिल किया जाता है। सरोगेट की सहायता में मासिक भत्ता, पोषण संबंधी पूरक, कपड़े और परिवहन जैसी ज़रूरतें शामिल होती हैं, जो कुल लागत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनती हैं। भारत में सरोगेसी के नियम यह सुनिश्चित करते हैं कि सरोगेट मां को पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाएं मिलें।
- चिकित्सा जटिलताएँ और आवश्यक आईवीएफ साइकिल की संख्या: सरोगेसी की प्रक्रिया में कई मेडिकल चरण शामिल होते हैं, जिनमें आईवीएफ सबसे महत्वपूर्ण है। यदि पहला आईवीएफ चक्र सफल नहीं होता है, तो अतिरिक्त चक्रों की आवश्यकता हो सकती है, जिससे लागत बढ़ जाएगी। इसी तरह, गर्भावस्था के दौरान कोई अप्रत्याशित चिकित्सा जटिलता (जैसे उच्च-जोखिम वाली गर्भावस्था, जुड़वाँ गर्भ, सीज़ेरियन सेक्शन की आवश्यकता, या बच्चे के लिए नवजात गहन चिकित्सा इकाई (NICU) में देखभाल) होने पर अतिरिक्त खर्च हो सकता है। यह लागत व्यक्तिगत केस पर निर्भर करती है और पहले से अनुमान लगाना मुश्किल होता है। सरोगेट मदर की योग्यता और स्वास्थ्य भी प्रक्रिया की जटिलता को प्रभावित करते हैं।
भारत में परोपकारी सरोगेसी का वित्तीय पहलू: क्यों नहीं है कोई 'कमर्शियल फीस'?
भारत में 25 जनवरी 2022 से लागू हुए सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम, 2021 के तहत, व्यावसायिक सरोगेसी को पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है। इसका अर्थ है कि सरोगेट माँ को उसके द्वारा उठाए गए बच्चे के लिए कोई मौद्रिक मुआवज़ा या 'फीस' नहीं दी जा सकती। इस अधिनियम का उद्देश्य सरोगेट माताओं के शोषण को रोकना और सरोगेसी को एक परोपकारी कार्य के रूप में स्थापित करना है।
इसलिए, जब दिल्ली में सरोगेसी की लागत की बात की जाती है, तो इसमें मुख्य रूप से चिकित्सा प्रक्रियाएं (जैसे आईवीएफ और भ्रूण स्थानांतरण), सरोगेट माँ की चिकित्सा देखभाल (प्रसवपूर्व और प्रसवोत्तर), उनके लिए स्वास्थ्य बीमा कवर, कानूनी और प्रशासनिक खर्च, और गर्भावस्था के दौरान उनके पोषण व कल्याण के लिए किए जाने वाले आवश्यक व्यय शामिल होते हैं। इसमें सरोगेट को दी जाने वाली कोई 'कमर्शियल फीस' शामिल नहीं होती। यह कानूनी ढाँचा यह सुनिश्चित करता है कि सरोगेसी की प्रक्रिया नैतिक और पारदर्शी तरीके से पूरी हो। आर्ट (विनियमन) अधिनियम, 2021 भी प्रजनन क्लीनिकों के नियमन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
मुख्य बातें
- दिल्ली में सरोगेसी की अनुमानित लागत 2026 में ₹15 लाख से ₹25 लाख के बीच है, जो चिकित्सा, कानूनी और सरोगेट के सहायक खर्चों को कवर करती है।
- लागत को प्रभावित करने वाले मुख्य कारक क्लिनिक का चुनाव, सरोगेट के लिए चिकित्सा सहायता व बीमा, और संभावित चिकित्सा जटिलताएँ हैं।
- भारत में सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम, 2021 के कारण केवल परोपकारी सरोगेसी ही मान्य है; सरोगेट माँ को कोई व्यावसायिक फीस नहीं दी जाती।
- सभी खर्च सरोगेट माँ की स्वास्थ्य देखभाल, बीमा और आवश्यक पोषण तथा कल्याण पर केंद्रित होते हैं, न कि आर्थिक लाभ पर।
दिल्ली में सरोगेसी खर्च का पूरा ब्रेकडाउन (मद-दर-मद)
दिल्ली में परोपकारी सरोगेसी की कुल लागत कई अलग-अलग मदों से मिलकर बनती है, जिनमें चिकित्सा प्रक्रियाएँ, सरोगेट की देखभाल, कानूनी शुल्क और प्रशासनिक खर्च शामिल हैं। भारत में Surrogacy (Regulation) Act, 2021 और उसके बाद के संशोधनों के अनुसार, व्यावसायिक सरोगेसी प्रतिबंधित है, जिसका अर्थ है कि सरोगेट माता को बच्चे को जन्म देने के लिए कोई शुल्क या मुआवज़ा नहीं दिया जाता। इसके बजाय, सभी खर्च उसकी चिकित्सा, पोषण और बीमा से संबंधित होते हैं। 2026 में, दिल्ली में सरोगेसी से जुड़ी इन अलग-अलग लागतों को समझना इच्छुक माता-पिता के लिए आवश्यक है।
| मद | अनुमानित रेंज (₹) | टिप्पणी |
|---|---|---|
| IVF साइकिल और दवाएं | 2,50,000 - 4,50,000 | अंडाशय उत्तेजना, अंडाणु पुनर्प्राप्ति, भ्रूण निर्माण और संबंधित दवाएं शामिल हैं। |
| सरोगेट की स्क्रीनिंग और मूल्यांकन | 20,000 - 50,000 | चिकित्सा, मनोवैज्ञानिक और कानूनी जाँचें ताकि सरोगेट की पात्रता सुनिश्चित हो सके। |
| भ्रूण ट्रांसफर प्रक्रिया (प्रति प्रयास) | 40,000 - 70,000 | प्रत्येक भ्रूण ट्रांसफर प्रयास की लागत, जिसमें डॉक्टर की फीस और प्रयोगशाला शुल्क शामिल हैं। |
| सरोगेट का चिकित्सा बीमा (36 महीने) | 2,00,000 - 3,50,000 | अधिनियम के तहत अनिवार्य 36 महीने का व्यापक बीमा कवर। |
| सरोगेट का पोषण और मासिक सहायता | 1,20,000 - 2,00,000 | गर्भावस्था के दौरान पोषण संबंधी आवश्यकताओं और अन्य संबंधित खर्चों के लिए। (प्रति माह ₹10,000-₹20,000) |
| गर्भावस्था के दौरान चिकित्सा देखभाल | 50,000 - 1,00,000 | नियमित जाँच, अल्ट्रासाउंड, रक्त परीक्षण और अन्य प्रसवपूर्व देखभाल। |
| प्रसव खर्च (सामान्य या सिजेरियन) | 50,000 - 1,50,000 | अस्पताल का शुल्क, डॉक्टर की फीस और प्रसव से संबंधित अन्य खर्च। |
| कानूनी और प्रशासनिक शुल्क | 80,000 - 1,50,000 | सरोगेसी समझौते, नोटरी, कोर्ट की अनुमति और अभिभावक आदेश प्राप्त करने से संबंधित। |
| अंडाणु/शुक्राणु दाता (यदि आवश्यक हो) | 50,000 - 1,50,000 | यदि इच्छुक माता-पिता के युग्मक अनुपलब्ध हों और कानून द्वारा अनुमति हो। |
नोट: उपरोक्त लागतें अनुमानित हैं और क्लीनिक, चिकित्सा आवश्यकताओं व किसी भी संभावित जटिलता के आधार पर भिन्न हो सकती हैं।
IVF साइकिल, अंडाणु/शुक्राणु, भ्रूण ट्रांसफर की अलग-अलग लागत
सरोगेसी प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण हिस्सा इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF) उपचार है। इस लागत में कई चरण शामिल होते हैं, जिनकी कुल कीमत 2,50,000 से 4,50,000 रुपये तक हो सकती है। इसमें इच्छुक माता-पिता या दाता महिला के अंडाशय को उत्तेजित करने के लिए हार्मोनल दवाएं, अंडाणु पुनर्प्राप्ति की प्रक्रिया, शुक्राणु का संग्रह (जो इच्छुक पिता या दाता से हो सकता है), और प्रयोगशाला में अंडाणु व शुक्राणु का फर्टिलाइजेशन शामिल है। सफल फर्टिलाइजेशन के बाद बने भ्रूण को विकसित किया जाता है।
यदि इच्छुक माता-पिता को अंडाणु या शुक्राणु दाता की आवश्यकता होती है, तो यह खर्च अतिरिक्त होता है। Surrogacy (Regulation) (Amendment) Rules, 2024 के अनुसार, विशिष्ट चिकित्सकीय स्थितियों में दाता युग्मकों का उपयोग अनुमत है, और इसके लिए दाता के चयन, उनकी स्क्रीनिंग और युग्मक प्राप्त करने की लागत लगभग 50,000 से 1,50,000 रुपये हो सकती है। अंत में, निर्मित भ्रूण को सरोगेट माता के गर्भाशय में ट्रांसफर किया जाता है। प्रत्येक भ्रूण ट्रांसफर प्रयास की लागत लगभग 40,000 से 70,000 रुपये आती है। यदि पहला ट्रांसफर सफल नहीं होता है, तो दोबारा प्रयास के लिए यह लागत फिर से वहन करनी पड़ सकती है।
सरोगेट का चिकित्सा बीमा, पोषण व मासिक सहायता खर्च
भारत में सरोगेसी कानून सरोगेट माता के कल्याण को प्राथमिकता देता है। Surrogacy (Regulation) Act, 2021 के तहत, इच्छुक माता-पिता के लिए यह अनिवार्य है कि वे सरोगेट माता के लिए कम से कम 36 महीने का एक व्यापक स्वास्थ्य बीमा कवर प्रदान करें। यह बीमा गर्भावस्था से उत्पन्न होने वाली किसी भी जटिलता, प्रसव और प्रसव के बाद की देखभाल को कवर करता है, जिसकी अनुमानित लागत 2,00,000 से 3,50,000 रुपये हो सकती है।
इसके अतिरिक्त, सरोगेट के स्वास्थ्य और गर्भस्थ शिशु के उचित विकास के लिए गर्भावस्था के दौरान पर्याप्त पोषण और सहायता महत्वपूर्ण है। इच्छुक माता-पिता सरोगेट को मासिक सहायता प्रदान करते हैं, जो पोषण संबंधी जरूरतों (जैसे विशेष आहार, पूरक), उचित आराम सुनिश्चित करने के लिए संभावित आय हानि की भरपाई, और अन्य संबंधित खर्चों को कवर करती है। यह सहायता राशि प्रति माह लगभग 10,000 से 20,000 रुपये तक हो सकती है, जिससे गर्भावस्था की पूरी अवधि (लगभग 9 महीने) के लिए कुल 1,20,000 से 2,00,000 रुपये का खर्च आ सकता है। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि यह सहायता सरोगेट को 'शुल्क' नहीं है, बल्कि उसके स्वास्थ्य और भलाई को बनाए रखने के लिए एक सहायता है, जैसा कि कानून द्वारा निर्धारित है।
कानूनी, दस्तावेज़ीकरण व कोर्ट प्रक्रिया का खर्च
सरोगेसी की प्रक्रिया में कानूनी औपचारिकताएं एक अनिवार्य अंग हैं। भारत में सरोगेसी नियामक अधिनियम, 2021 के प्रभावी होने के बाद, पूरी प्रक्रिया को कानूनी रूप से मजबूत बनाना आवश्यक हो गया है। इसमें सरोगेसी समझौते का मसौदा तैयार करना शामिल है, जो इच्छुक माता-पिता और सरोगेट माता के अधिकारों और जिम्मेदारियों को स्पष्ट रूप से परिभाषित करता है। इस समझौते को नोटरीकृत कराना होता है।
इसके बाद, उपयुक्त प्राधिकारी और मेडिकल बोर्ड से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) प्राप्त करना, और फिर सक्षम कोर्ट से सरोगेसी की अनुमति तथा बच्चे के अभिभावक अधिकारों के लिए आदेश प्राप्त करना शामिल है। इन सभी कानूनी प्रक्रियाओं में वकीलों की फीस, कोर्ट शुल्क और अन्य प्रशासनिक खर्च शामिल होते हैं। इस पूरे कानूनी और दस्तावेज़ीकरण प्रक्रिया की लागत लगभग 80,000 से 1,50,000 रुपये तक हो सकती है। यह सुनिश्चित करता है कि सरोगेसी प्रक्रिया कानून के दायरे में हो और भविष्य में किसी भी विवाद से बचा जा सके, साथ ही जन्म के बाद बच्चे के कानूनी माता-पिता के रूप में इच्छुक माता-पिता को मान्यता मिल सके। इच्छुक माता-पिता दिल्ली में सरोगेसी से जुड़ी विस्तृत जानकारी के लिए सरोगेसी प्रक्रिया, कानून और लागत गाइड भी देख सकते हैं।
मुख्य बातें
- दिल्ली में सरोगेसी की लागत में IVF, सरोगेट का बीमा, पोषण, चिकित्सा देखभाल और कानूनी प्रक्रियाएं शामिल हैं।
- भारत में केवल परोपकारी सरोगेसी की अनुमति है, जहाँ सरोगेट को चिकित्सा खर्च और बीमा के अलावा कोई शुल्क नहीं मिलता।
- IVF साइकिल, दवाएँ और भ्रूण ट्रांसफर की लागत प्रक्रिया का एक बड़ा हिस्सा होती है, और दाता युग्मक (यदि आवश्यक हो) अतिरिक्त खर्च जोड़ते हैं।
- सरोगेट के लिए अनिवार्य 36 महीने का चिकित्सा बीमा और गर्भावस्था के दौरान पोषण व मासिक सहायता एक महत्वपूर्ण खर्च मद है।
- कानूनी समझौते, कोर्ट की अनुमति और दस्तावेज़ीकरण के लिए वकील की फीस और प्रशासनिक शुल्क आवश्यक होते हैं।
दिल्ली में उपलब्ध सरोगेसी पैकेज और उनमें क्या-क्या शामिल होता है?
दिल्ली में सरोगेसी की लागत 2026 पर केंद्रित इस गाइड में, Vinsfertility आपको विभिन्न प्रकार के सरोगेसी पैकेजों और उनमें शामिल सेवाओं को समझने में मदद करेगा। सरोगेसी एक जटिल प्रक्रिया है जिसमें कई चिकित्सा, कानूनी और प्रशासनिक चरण शामिल होते हैं। इन चरणों को सुविधाजनक बनाने के लिए, दिल्ली के फर्टिलिटी क्लीनिक आमतौर पर अलग-अलग प्रकार के पैकेज पेश करते हैं, जो इच्छुक माता-पिता की ज़रूरतों और बजट के अनुसार डिज़ाइन किए जाते हैं।
बेसिक बनाम कॉम्प्रिहेंसिव बनाम मल्टी-साइकिल पैकेज में अंतर
सरोगेसी पैकेज को मुख्य रूप से उनकी सेवाओं के विस्तार और कवरेज के आधार पर वर्गीकृत किया जा सकता है। यह समझना महत्वपूर्ण है कि भारत में सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम, 2021 के तहत केवल परोपकारी (altruistic) सरोगेसी की अनुमति है, जिसका अर्थ है कि सरोगेट माँ को चिकित्सा खर्च और बीमा के अलावा कोई मौद्रिक मुआवजा नहीं दिया जाता है। इसलिए, पैकेज की लागत मुख्य रूप से चिकित्सा प्रक्रियाओं, सरोगेट की देखभाल और कानूनी औपचारिकताओं से संबंधित होती है।
- बेसिक पैकेज: इस पैकेज में आमतौर पर सरोगेसी प्रक्रिया के सबसे आवश्यक घटक शामिल होते हैं। इसमें इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF) चक्र, भ्रूण स्थानांतरण (embryo transfer) शुल्क, सरोगेट की प्रारंभिक चिकित्सा जांच और गर्भावस्था के पहले कुछ महीनों की मानक चिकित्सा देखभाल शामिल हो सकती है। यह उन इच्छुक माता-पिता के लिए उपयुक्त हो सकता है जो अधिक किफायती विकल्प तलाश रहे हैं और बाद में आवश्यकतानुसार अतिरिक्त सेवाओं के लिए अलग से भुगतान करने को तैयार हैं। हालांकि, इसमें अक्सर एक से अधिक IVF प्रयासों या गर्भावस्था संबंधी जटिलताओं का खर्च शामिल नहीं होता।
- कॉम्प्रिहेंसिव पैकेज: यह पैकेज बेसिक पैकेज की तुलना में अधिक व्यापक कवरेज प्रदान करता है। इसमें आमतौर पर एक या एक से अधिक IVF चक्र, भ्रूण स्थानांतरण, सरोगेट की विस्तृत चिकित्सा जांच, गर्भावस्था के दौरान नियमित चिकित्सा देखभाल (जैसे प्रसवपूर्व जांच), डिलीवरी का खर्च, सरोगेट के लिए बीमा कवर, और कानूनी शुल्क शामिल होते हैं। कुछ कॉम्प्रिहेंसिव पैकेजों में सरोगेट के पोषण और जीवनशैली से संबंधित सहायता भी शामिल हो सकती है। यह उन लोगों के लिए डिज़ाइन किया गया है जो प्रक्रिया के अधिकांश पहलुओं को एक ही लागत में कवर करना चाहते हैं।
- मल्टी-साइकिल या प्रेगनेंसी-केंद्रित पैकेज: यह पैकेज विशेष रूप से उन मामलों के लिए होता है जहाँ पहली बार में गर्भावस्था स्थापित होने की संभावना कम हो सकती है। इसमें एक निश्चित मूल्य पर कई IVF चक्रों और भ्रूण स्थानांतरणों का एक पूर्व-निर्धारित संख्या शामिल हो सकती है, जब तक कि क्लिनिकल गर्भावस्था स्थापित न हो जाए। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि भारत में कोई भी क्लिनिक बच्चे के जन्म की 'गारंटी' नहीं दे सकता। ये पैकेज केवल क्लिनिकल गर्भावस्था स्थापित करने के प्रयासों की संख्या के लिए एक निश्चित लागत की पेशकश करते हैं।
पैकेज में आमतौर पर शामिल और बाहर रखी जाने वाली सेवाएँ
सरोगेसी पैकेज को अंतिम रूप देने से पहले, यह स्पष्ट रूप से समझना आवश्यक है कि उसमें क्या शामिल है और क्या नहीं।
आमतौर पर शामिल सेवाएँ:
- चिकित्सा प्रक्रियाएँ: इच्छुक माता-पिता के लिए IVF चक्र (अंडाणु पुनर्प्राप्ति, शुक्राणु एकत्रण, भ्रूण विकास), भ्रूण स्थानांतरण।
- सरोगेट की चिकित्सा देखभाल: सरोगेट की प्रारंभिक गहन चिकित्सा जांच, गर्भावस्था के दौरान नियमित प्रसवपूर्व जांच, दवाएँ, और डिलीवरी (सामान्य या सिजेरियन)।
- कानूनी सेवाएँ: सरोगेसी समझौते का मसौदा तैयार करना और पंजीकरण, कानूनी परामर्श, और कोर्ट से संबंधित प्रक्रियाएँ जो भारत के सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम, 2021 के तहत अनिवार्य हैं। यह अधिनियम परोपकारी सरोगेसी को ही अनुमति देता है।[1]
- सरोगेट का बीमा: अधिनियम के अनुसार, सरोगेट माँ के लिए 36 महीने का स्वास्थ्य बीमा कवर अनिवार्य है।[2]
- परामर्श: इच्छुक माता-पिता और सरोगेट के लिए मनोवैज्ञानिक परामर्श।
आमतौर पर बाहर रखी जाने वाली सेवाएँ:
- अतिरिक्त IVF चक्र: यदि पैकेज में मल्टी-साइकिल शामिल नहीं है, तो सफल गर्भावस्था के लिए एक से अधिक IVF प्रयास की लागत अतिरिक्त होगी।
- डोनर गेमेट्स (अंडाणु/शुक्राणु): यदि इच्छुक माता-पिता को डोनर अंडाणु या शुक्राणु की आवश्यकता होती है, तो उनकी लागत अलग से ली जाती है (कुछ विशेष मामलों में 2024 के नियमों के तहत अनुमति)।
- भ्रूण फ्रीजिंग और स्टोरेज: अतिरिक्त भ्रूणों को भविष्य के लिए फ्रीज करने और स्टोर करने का खर्च।
- जटिलताएँ: गर्भावस्था या डिलीवरी के दौरान उत्पन्न होने वाली गंभीर चिकित्सा जटिलताएँ (जैसे NICU में शिशु का प्रवेश, विशेष सर्जरी) जिनके लिए मानक कवरेज से अधिक की आवश्यकता होती है।
- व्यक्तिगत खर्च: इच्छुक माता-पिता के यात्रा, आवास या सरोगेट के लिए व्यक्तिगत रूप से प्रदान की जाने वाली कोई अतिरिक्त सहायता जो पैकेज का हिस्सा नहीं है।
भारत में सरोगेसी प्रक्रिया और कानून के बारे में अधिक जानने के लिए, आप भारत में सरोगेसी 2026: प्रक्रिया, कानून, खर्च व पात्रता पर हमारी विस्तृत गाइड देख सकते हैं।
छुपे हुए खर्च जिनके बारे में पहले पूछना ज़रूरी है
सरोगेसी की यात्रा शुरू करते समय, यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि आप सभी संभावित खर्चों से अवगत हों। कुछ ऐसे खर्च होते हैं जो पैकेज में स्पष्ट रूप से उल्लिखित नहीं होते हैं लेकिन बाद में सामने आ सकते हैं। इनसे बचने के लिए पहले ही विस्तृत चर्चा और लिखित स्पष्टीकरण प्राप्त करना आवश्यक है:
- विफल चक्रों की लागत: यदि पहला भ्रूण स्थानांतरण विफल रहता है और पैकेज में मल्टी-साइकिल शामिल नहीं है, तो प्रत्येक बाद के प्रयास के लिए शुल्क।
- चिकित्सा जटिलताएँ: गर्भावस्था के दौरान सरोगेट या शिशु के लिए अप्रत्याशित चिकित्सा जटिलताएँ, जैसे कि आपातकालीन सिजेरियन, प्री-टर्म डिलीवरी, या नवजात शिशु को गहन चिकित्सा इकाई (NICU) में रखने की आवश्यकता।
- दवाओं का खर्च: क्या पैकेज में सभी आवश्यक दवाएँ शामिल हैं, या कुछ महंगी दवाओं के लिए अलग से भुगतान करना होगा?
- कानूनी संशोधन या अतिरिक्त कार्यवाही: यदि कानूनी प्रक्रिया में कोई अप्रत्याशित बाधा आती है या अतिरिक्त दस्तावेज़ीकरण की आवश्यकता होती है।
- मनोवैज्ञानिक सहायता: क्या केवल प्रारंभिक परामर्श शामिल है, या आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त सत्रों की भी लागत शामिल है?
- आपातकालीन स्थिति में परिवहन: सरोगेट को आपातकालीन स्थिति में चिकित्सा सुविधा तक पहुंचाने का खर्च।
- अस्पताल में रहने की अवधि: क्या पैकेज में अस्पताल में रहने की एक निश्चित अवधि शामिल है, और यदि सरोगेट या शिशु को इससे अधिक समय तक रहना पड़ता है, तो अतिरिक्त शुल्क क्या होंगे?
क्लीनिक से सभी संभावित खर्चों की एक विस्तृत सूची मांगना और प्रत्येक मद को समझना बहुत महत्वपूर्ण है। इससे भविष्य में कोई अप्रिय आश्चर्य नहीं होगा और आप अपनी सरोगेसी यात्रा के लिए बेहतर वित्तीय योजना बना पाएंगे।
मुख्य बातें
- दिल्ली में सरोगेसी पैकेज बेसिक, कॉम्प्रिहेंसिव और मल्टी-साइकिल/प्रेगनेंसी-केंद्रित श्रेणियों में उपलब्ध हैं, जो कवरेज के स्तर में भिन्न होते हैं।
- भारत में परोपकारी सरोगेसी नियम लागू होने के कारण, पैकेजों की लागत मुख्य रूप से चिकित्सा प्रक्रियाओं, सरोगेट की देखभाल (बीमा सहित) और कानूनी औपचारिकताओं पर केंद्रित होती है।
- पैकेज में अक्सर IVF, भ्रूण स्थानांतरण, सरोगेट की जांच और बीमा शामिल होता है, जबकि अतिरिक्त IVF चक्र, डोनर गेमेट्स और अप्रत्याशित चिकित्सा जटिलताएँ आमतौर पर बाहर रखी जाती हैं।
- छुपे हुए खर्चों से बचने के लिए असफल चक्रों, चिकित्सा जटिलताओं, दवाओं और कानूनी संशोधनों जैसी संभावित अतिरिक्त लागतों के बारे में पहले से पूछताछ करना महत्वपूर्ण है।
दिल्ली बनाम अन्य शहरों में सरोगेसी लागत की तुलना
भारत में सरोगेसी की लागत कई कारकों पर निर्भर करती है, जिनमें चिकित्सा सुविधाओं का स्तर, विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता और संबंधित शहर का सामान्य जीवन-यापन खर्च शामिल हैं। दिल्ली, एक प्रमुख चिकित्सा केंद्र होने के नाते, अपनी उन्नत सुविधाओं और विशेषज्ञता के कारण सरोगेसी चाहने वाले जोड़ों के लिए एक पसंदीदा विकल्प रहा है। सरोगेसी के मूल सिद्धांतों और प्रक्रिया को समझने के लिए, आप सरोगेसी क्या है इस पर हमारी विस्तृत जानकारी देख सकते हैं। देश के अन्य बड़े शहरों में भी इसी तरह की सुविधाएँ उपलब्ध हैं, और लागत में कुछ भिन्नता देखी जा सकती है। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि भारत में केवल परोपकारी (altruistic) सरोगेसी ही कानूनी है, जिसका अर्थ है कि सरोगेट माँ को चिकित्सा खर्च और बीमा के अलावा कोई मौद्रिक मुआवज़ा नहीं मिलता है। इसलिए, 'लागत' मुख्य रूप से चिकित्सा प्रक्रियाओं, कानूनी प्रक्रियाओं और सरोगेट के चिकित्सा व पोषण संबंधी समर्थन को कवर करती है।
प्रमुख भारतीय शहरों में सरोगेसी की अनुमानित लागत तुलना
नीचे दी गई तालिका विभिन्न भारतीय शहरों में सरोगेसी की अनुमानित लागत रेंज और उनके मुख्य अंतरों का एक सामान्य अवलोकन प्रदान करती है। ये लागतें सांकेतिक हैं और व्यक्तिगत मामलों, क्लीनिकों तथा आवश्यक चिकित्सा सेवाओं के आधार पर भिन्न हो सकती हैं।
| शहर | अनुमानित लागत रेंज (₹) | मुख्य अंतर |
|---|---|---|
| दिल्ली | 15,00,000 - 25,00,000 | उच्च विशेषज्ञता, उन्नत चिकित्सा सुविधाएँ, विभिन्न प्रकार के क्लीनिकों की उपलब्धता। |
| मुंबई | 16,00,000 - 26,00,000 | जीवन-यापन की उच्च लागत, प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थान, समान विशेषज्ञता। |
| बेंगलुरु | 14,00,000 - 24,00,000 | उन्नत तकनीक-आधारित क्लीनिक, मेट्रोपॉलिटन सुविधाएं, दिल्ली/मुंबई से थोड़ी कम लागत। |
| चेन्नई | 13,00,000 - 23,00,000 | बेहतर चिकित्सा इंफ्रास्ट्रक्चर, तुलनात्मक रूप से कम जीवन-यापन लागत, गुणवत्तापूर्ण देखभाल। |
| हैदराबाद | 13,00,000 - 23,00,000 | तेज़ी से विकसित होता चिकित्सा केंद्र, आधुनिक सुविधाएँ, दक्षिण के अन्य शहरों के समान लागत। |
स्रोत: विभिन्न क्लीनिकों के अनुमानित औसत, बाज़ार अध्ययन। ये आँकड़े सांकेतिक हैं और वास्तविक लागत क्लीनिक, सेवाएँ व व्यक्तिगत आवश्यकताओं के आधार पर बदल सकती है।
दिल्ली NCR (गुरुग्राम, नोएडा) में लागत भिन्नता
दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में गुरुग्राम और नोएडा जैसे शहर भी आते हैं, जो दिल्ली से भौगोलिक रूप से निकट हैं। इन शहरों में भी कई उच्च गुणवत्ता वाले ART (असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी) और सरोगेसी क्लीनिक मौजूद हैं। दिल्ली NCR में लागत में मामूली भिन्नता देखी जा सकती है:
- गुरुग्राम: अक्सर दिल्ली के समान ही या उससे थोड़ी अधिक लागत हो सकती है, खासकर यदि क्लीनिक अंतरराष्ट्रीय मानकों की सेवाएँ प्रदान कर रहे हों। गुरुग्राम में जीवन-यापन का खर्च भी दिल्ली के कुछ हिस्सों के बराबर है।
- नोएडा: तुलनात्मक रूप से, नोएडा में सरोगेसी की कुल लागत दिल्ली या गुरुग्राम से थोड़ी कम हो सकती है, मुख्यतः परिचालन खर्चों और जीवन-यापन की लागत में अंतर के कारण। हालाँकि, चिकित्सा सुविधाओं और विशेषज्ञों की उपलब्धता दिल्ली के बराबर ही है।
इन क्षेत्रों में सरोगेसी की कुल लागत को प्रभावित करने वाले कारकों में विशिष्ट क्लीनिक की प्रतिष्ठा, उनके द्वारा प्रदान की जाने वाली अतिरिक्त सेवाएँ (जैसे परामर्श, पोषण विशेषज्ञ) और सरोगेट के लिए आवास की व्यवस्था शामिल हो सकती है।
दिल्ली में लागत अधिक/कम होने के व्यावहारिक कारण
दिल्ली में सरोगेसी की लागत को कई व्यावहारिक कारण प्रभावित करते हैं, जिससे यह अन्य शहरों की तुलना में कभी-कभी अधिक या कम हो सकती है:
- उन्नत चिकित्सा इंफ्रास्ट्रक्चर: दिल्ली में अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरण और तकनीक वाले कई उच्च-स्तरीय IVF और सरोगेसी क्लीनिक हैं। इन सुविधाओं के रखरखाव की लागत अक्सर अधिक होती है, जो कुल खर्च में जुड़ जाती है।
- विशेषज्ञों की उपलब्धता: भारत के सबसे अनुभवी फर्टिलिटी विशेषज्ञ और सरोगेसी डॉक्टर दिल्ली में कार्यरत हैं। उनकी विशेषज्ञता और सेवाओं के लिए शुल्क स्वाभाविक रूप से अधिक हो सकता है।
- जीवन-यापन की लागत: दिल्ली एक महानगर है जहाँ जीवन-यापन का खर्च, जिसमें किराया, भोजन और परिवहन शामिल है, अन्य छोटे शहरों की तुलना में अधिक है। यह सरोगेट के पोषण, आवास और दैनिक भत्ते (यदि कोई हो, अधिनियम के दायरे में) पर पड़ने वाले खर्च को प्रभावित करता है।
- कानूनी और प्रशासनिक शुल्क: दिल्ली में सरोगेसी के कानूनी पहलुओं से संबंधित शुल्क, जैसे दस्तावेज़ीकरण, न्यायालयीन प्रक्रियाएँ और कानूनी सलाह, अन्य शहरों की तुलना में भिन्न हो सकते हैं। Surrogacy (Regulation) Act, 2021 के तहत सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करना अनिवार्य है, जिसके लिए विशेषज्ञ कानूनी सहायता की आवश्यकता होती है। आप सरोगेसी के कानूनी पहलुओं के बारे में अधिक जानकारी Surrogacy (Regulation) Act, 2021 में देख सकते हैं।
- प्रतिस्पर्धा और पैकेज: दिल्ली में क्लीनिकों के बीच अधिक प्रतिस्पर्धा के कारण, कुछ क्लीनिक अधिक प्रतिस्पर्धी पैकेज या समावेशी सेवाएँ प्रदान कर सकते हैं, जिससे कुल लागत पर असर पड़ सकता है। सरोगेसी के विभिन्न पैकेज विकल्पों और उनके विस्तृत खर्च के लिए, आप भारत में सरोगेसी की लागत पर हमारा पूरा ब्रेकडाउन गाइड देख सकते हैं।
- सरोगेट का समर्थन और बीमा: सरोगेट माँ के लिए व्यापक चिकित्सा बीमा, नियमित पोषण संबंधी सहायता और आवश्यक मनोवैज्ञानिक परामर्श जैसी सुविधाओं का प्रावधान भी कुल लागत को प्रभावित करता है। भारतीय कानून के तहत सरोगेट के लिए 36 महीने का बीमा अनिवार्य है। इस संदर्भ में ICMR दिशानिर्देश भी महत्वपूर्ण हैं।
मुख्य बातें
- दिल्ली में सरोगेसी की अनुमानित लागत रेंज अन्य प्रमुख भारतीय शहरों (जैसे मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई, हैदराबाद) के समान ही है, लेकिन महानगरों में जीवन-यापन के खर्च के कारण थोड़ी अधिक हो सकती है।
- दिल्ली NCR (गुरुग्राम, नोएडा) में भी लागत में मामूली भिन्नता होती है, जहाँ नोएडा आमतौर पर दिल्ली और गुरुग्राम से थोड़ा अधिक किफ़ायती हो सकता है।
- दिल्ली में उच्च विशेषज्ञता, उन्नत चिकित्सा इंफ्रास्ट्रक्चर, अनुभवी विशेषज्ञों की उपलब्धता और जीवन-यापन की उच्च लागत सरोगेसी के कुल खर्च को प्रभावित करने वाले मुख्य व्यावहारिक कारण हैं।
- भारत में केवल परोपकारी सरोगेसी ही वैध है, इसलिए लागत मुख्य रूप से चिकित्सा प्रक्रियाओं, कानूनी प्रक्रियाओं और सरोगेट के चिकित्सा व पोषण संबंधी समर्थन पर केंद्रित होती है।
सरोगेसी की कुल लागत बढ़ाने वाले अतिरिक्त चिकित्सा खर्च
दिल्ली में सरोगेसी की लागत 2026 पर इस मार्गदर्शिका के पांचवें सेक्शन में, Vinsfertility का लक्ष्य उन अतिरिक्त चिकित्सा खर्चों पर प्रकाश डालना है जो सरोगेसी की कुल लागत को बढ़ा सकते हैं। सरोगेसी प्रक्रिया में कुछ अप्रत्याशित या वैकल्पिक चरण ऐसे होते हैं जिनके लिए अलग से भुगतान करना पड़ सकता है, और इनकी जानकारी होना वित्तीय योजना के लिए महत्वपूर्ण है।
असफल IVF साइकिल पर दोबारा प्रयास का खर्च
सरोगेसी प्रक्रिया में, गर्भाधान के लिए इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF) एक केंद्रीय भूमिका निभाता है। यह समझना महत्वपूर्ण है कि प्रत्येक IVF साइकिल की सफलता दर अलग-अलग होती है और यह कई कारकों पर निर्भर करती है। दुर्भाग्य से, पहली IVF साइकिल हमेशा सफल नहीं होती। जब ऐसा होता है, तो इच्छित माता-पिता को दोबारा प्रयास करने का विकल्प चुनना पड़ सकता है, जिससे लागत बढ़ जाती है।
प्रत्येक IVF साइकिल में कई घटक शामिल होते हैं, जिनमें अंडाणु उत्तेजना के लिए दवाएँ, लगातार निगरानी, अंडाणु पुनर्प्राप्ति (एग रिट्रीवल), शुक्राणु के साथ निषेचन और अंततः भ्रूण स्थानांतरण शामिल है। यदि पहला प्रयास विफल हो जाता है, तो अगले प्रयास में इन सभी चरणों या उनमें से अधिकांश के लिए फिर से भुगतान करना पड़ सकता है। दिल्ली में एक IVF साइकिल का अनुमानित खर्च ₹1,50,000 से ₹3,00,000 या इससे अधिक हो सकता है, जो क्लीनिक और आवश्यक उपचारों के प्रकार पर निर्भर करता है। सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम, 2021 के तहत, इच्छित दंपति को सरोगेसी का विकल्प चुनने के लिए चिकित्सा संकेत प्रस्तुत करना होता है, जिसमें अक्सर पूर्व में विफल IVF प्रयासों का इतिहास शामिल होता है।
जुड़वाँ गर्भ, सिजेरियन या NICU जैसी जटिलताओं का अतिरिक्त खर्च
गर्भावस्था और प्रसव के दौरान कुछ चिकित्सा जटिलताएँ उत्पन्न हो सकती हैं, जो सरोगेसी की कुल लागत में महत्वपूर्ण वृद्धि कर सकती हैं। इन जटिलताओं में शामिल हैं:
- जुड़वाँ गर्भ: हालाँकि चिकित्सा विशेषज्ञ आमतौर पर एकल भ्रूण स्थानांतरण की सलाह देते हैं ताकि जुड़वाँ गर्भ से जुड़ी जटिलताओं से बचा जा सके, कभी-कभी फिर भी जुड़वाँ गर्भधारण हो सकता है। जुड़वाँ गर्भ में सरोगेट माँ के लिए अधिक गहन चिकित्सा देखभाल, अतिरिक्त निगरानी और प्रसव के दौरान अधिक लागत की आवश्यकता होती है।
- सिजेरियन सेक्शन (C-Section): आदर्श रूप से, योनि प्रसव की उम्मीद की जाती है, लेकिन कई चिकित्सा कारणों से सिजेरियन सेक्शन आवश्यक हो सकता है। सिजेरियन सेक्शन में सामान्य प्रसव की तुलना में अस्पताल के अधिक शुल्क, संज्ञाहरण (एनेस्थीसिया) लागत और प्रसवोत्तर देखभाल के लिए अधिक खर्च होता है।
- NICU (नवजात गहन चिकित्सा इकाई) आवश्यकताएँ: समय से पहले जन्म (प्री-मैच्योर डिलीवरी) या नवजात शिशु में अन्य चिकित्सा जटिलताओं के कारण नवजात शिशु को NICU में भर्ती कराना पड़ सकता है। NICU में रहने का खर्च काफी अधिक होता है और यह कई दिनों या हफ्तों तक चल सकता है, जिससे समग्र चिकित्सा बिल में भारी वृद्धि होती है। सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम, 2021 के अनुसार, सरोगेट माँ के लिए व्यापक स्वास्थ्य बीमा अनिवार्य है, जो गर्भावस्था और प्रसव से संबंधित चिकित्सा जटिलताओं को कवर करता है। हालांकि, नवजात शिशु के लिए NICU जैसी देखभाल का खर्च इच्छित माता-पिता को वहन करना पड़ सकता है।
फ्रोज़न भ्रूण स्टोरेज और बाद के ट्रांसफर शुल्क
IVF प्रक्रिया के दौरान, एक से अधिक स्वस्थ भ्रूण अक्सर उत्पन्न होते हैं। इनमें से कुछ भ्रूणों को प्रारंभिक स्थानांतरण के लिए उपयोग किया जाता है, जबकि शेष को भविष्य के उपयोग के लिए क्रायोप्रिज़र्वेशन (फ्रीज) करके रखा जा सकता है। यह विकल्प इच्छित माता-पिता को भविष्य में एक और बच्चे की योजना बनाने या यदि पहला स्थानांतरण विफल हो जाता है, तो दोबारा प्रयास करने का अवसर प्रदान करता है।
फ्रोज़न भ्रूण के भंडारण के लिए वार्षिक शुल्क लिया जाता है। यह शुल्क क्लीनिक के आधार पर भिन्न हो सकता है लेकिन आमतौर पर प्रति वर्ष ₹10,000 से ₹25,000 तक हो सकता है। यदि बाद में इन फ्रोज़न भ्रूणों का उपयोग करने का निर्णय लिया जाता है, तो फ्रोज़न भ्रूण स्थानांतरण (FET) साइकिल से संबंधित अतिरिक्त शुल्क लगते हैं। FET साइकिल आमतौर पर ताज़ा IVF साइकिल की तुलना में कम महंगी होती है क्योंकि इसमें अंडाणु पुनर्प्राप्ति या डिम्बग्रंथि उत्तेजना दवाएँ शामिल नहीं होती हैं। हालांकि, इसमें भ्रूण को डीफ्रीज करने, एंडोमेट्रियल तैयारी के लिए दवाएँ और स्थानांतरण प्रक्रिया के लिए शुल्क शामिल होता है, जिसका अनुमानित खर्च ₹50,000 से ₹1,50,000 तक हो सकता है। इच्छित माता-पिता को इस लंबी अवधि की लागत के लिए भी योजना बनानी चाहिए।
भारत में सरोगेसी के कानूनी प्रावधानों और प्रक्रियाओं के बारे में अधिक जानकारी के लिए, आप भारत में सरोगेसी की प्रक्रिया और कानूनी प्रावधानों पर हमारे अन्य लेख पढ़ सकते हैं। सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम, 2021 के पूर्ण विवरण के लिए, आप इंडिया कोड की वेबसाइट पर अधिनियम देख सकते हैं।
मुख्य बातें
- सरोगेसी प्रक्रिया में बार-बार IVF के असफल होने पर, प्रत्येक नए प्रयास के लिए अतिरिक्त खर्च वहन करना पड़ता है।
- जुड़वाँ गर्भधारण, सिजेरियन डिलीवरी, या नवजात शिशु के लिए NICU की आवश्यकता जैसी चिकित्सा जटिलताएँ कुल लागत में महत्वपूर्ण वृद्धि कर सकती हैं।
- फ्रोज़न भ्रूण को भविष्य के उपयोग के लिए स्टोर करने पर वार्षिक शुल्क लगता है, और बाद में उनके स्थानांतरण (FET) के लिए भी अतिरिक्त खर्च होते हैं।
- इच्छित माता-पिता को इन संभावित अतिरिक्त चिकित्सा खर्चों के लिए पहले से ही वित्तीय योजना बनानी चाहिए।
2026 में दिल्ली में सरोगेसी कराने के लिए कानूनी खर्च और दस्तावेज़
दिल्ली में सरोगेसी की प्रक्रिया केवल चिकित्सा पहलुओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक जटिल कानूनी ढाँचे द्वारा भी शासित होती है। भारत में, Surrogacy (Regulation) Act, 2021 और उसके तहत बनाए गए नियम, साथ ही 2024 के संशोधन, सरोगेसी को पूरी तरह से परोपकारी (altruistic) बनाते हैं। इसका अर्थ है कि सरोगेट माँ को चिकित्सा खर्च और बीमा के अलावा कोई वित्तीय मुआवज़ा नहीं दिया जा सकता। इस कानूनी संरचना का पालन सुनिश्चित करने के लिए इच्छुक दंपतियों को कई कानूनी खर्च और दस्तावेज़ संबंधी प्रक्रियाओं से गुज़रना पड़ता है।
सरोगेसी अधिनियम 2021 और 2024 संशोधन के तहत अनिवार्य कानूनी खर्च
भारत में परोपकारी सरोगेसी की कानूनी आवश्यकताओं को पूरा करने में कई तरह के खर्च शामिल होते हैं। ये खर्च सीधे तौर पर सरोगेट माँ को किए गए किसी भी भुगतान से भिन्न होते हैं और प्रक्रिया की वैधता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक हैं:
- कानूनी परामर्श और दस्तावेज़ तैयार करना: इच्छुक दंपतियों को एक अनुभवी वकील से कानूनी सलाह लेनी होती है। वकील सरोगेसी समझौते (Surrogacy Agreement), सहमति पत्रों, हलफनामों और अन्य आवश्यक कानूनी दस्तावेज़ों का मसौदा तैयार करने में मदद करते हैं। इन सेवाओं की लागत वकील के अनुभव और दस्तावेज़ों की जटिलता पर निर्भर करती है, जो आमतौर पर ₹50,000 से ₹1,50,000 या इससे अधिक हो सकती है।
- अदालती और प्रशासनिक शुल्क: सरोगेसी प्रक्रिया के लिए जिला चिकित्सा बोर्ड (District Medical Board) से 'योग्यता प्रमाण पत्र' (Certificate of Eligibility) और 'आवश्यकता प्रमाण पत्र' (Certificate of Essentiality) प्राप्त करना अनिवार्य है। इसके अलावा, बच्चे के जन्म के बाद माता-पिता के रूप में मान्यता प्राप्त करने के लिए न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत से 'अभिभावकत्व आदेश' (Parentage Order) प्राप्त करना भी आवश्यक होता है। इन प्रमाणपत्रों और आदेशों को प्राप्त करने के लिए विभिन्न आवेदन शुल्क, हलफनामा शुल्क और नोटरी शुल्क लगते हैं, जिनकी कुल लागत ₹20,000 से ₹50,000 तक हो सकती है।
- सरोगेट माँ का अनिवार्य बीमा: Surrogacy (Regulation) Act, 2021 के तहत, इच्छुक दंपति को सरोगेट माँ के लिए 36 महीने की अवधि का स्वास्थ्य बीमा कराना अनिवार्य है। इस बीमा में सरोगेट माँ को गर्भावस्था के दौरान और बाद में होने वाली किसी भी जटिलता या चिकित्सा समस्या को कवर किया जाता है। इस बीमा का प्रीमियम एक महत्वपूर्ण कानूनी खर्च होता है, जो बीमा कंपनी और कवर की गई राशि के आधार पर भिन्न हो सकता है। यह आमतौर पर ₹1,00,000 से ₹3,00,000 या अधिक तक हो सकता है।
- चिकित्सा परीक्षण और प्रमाणपत्र शुल्क: कानून के अनुसार, इच्छुक दंपतियों को अपनी बांझपन (infertility) साबित करने के लिए और सरोगेट माँ को अपनी शारीरिक व मानसिक फिटनेस साबित करने के लिए विभिन्न चिकित्सा परीक्षण और प्रमाणपत्र प्रस्तुत करने होते हैं। ये परीक्षण, हालांकि चिकित्सकीय प्रकृति के होते हैं, पर कानूनी अनुपालन के लिए आवश्यक हैं और इन पर भी खर्च आता है, जो ₹10,000 से ₹30,000 तक हो सकता है।
सरोगेसी के लिए आवश्यक प्रमुख दस्तावेज़
दिल्ली में सरोगेसी की प्रक्रिया शुरू करने से पहले कई महत्त्वपूर्ण दस्तावेज़ों को तैयार करना और प्रस्तुत करना होता है। इन दस्तावेज़ों की सटीकता और पूर्णता प्रक्रिया की सफलता के लिए अत्यंत आवश्यक है:
- इच्छुक दंपति/महिला के दस्तावेज़:
- विवाह प्रमाण पत्र: इच्छुक दंपति के लिए यह अनिवार्य है।
- नागरिकता प्रमाण पत्र: दोनों भागीदारों या इच्छुक महिला का भारतीय नागरिक होने का प्रमाण।
- बांझपन का प्रमाण पत्र: एक पंजीकृत मेडिकल प्रैक्टिशनर द्वारा जारी किया गया प्रमाण पत्र जो यह पुष्टि करता हो कि दंपति को सरोगेसी की आवश्यकता क्यों है। यह प्रमाण पत्र उन चिकित्सा स्थितियों को स्पष्ट करता है जो प्राकृतिक गर्भधारण या अन्य सहायक प्रजनन तकनीकों को असंभव बनाती हैं।
- आयु प्रमाण पत्र: इच्छुक पति (26-55 वर्ष) और पत्नी (25-50 वर्ष) या इच्छुक विधवा/तलाकशुदा महिला (35-45 वर्ष) के लिए आयु का प्रमाण।
- पहचान और पते का प्रमाण: आधार कार्ड, पैन कार्ड, पासपोर्ट आदि।
- सरोगेट माँ के दस्तावेज़:
- विवाह प्रमाण पत्र और बच्चे का प्रमाण: सरोगेट माँ का विवाहित होना और उसका अपना एक बच्चा होना अनिवार्य है। उसे अपने बच्चे के जन्म प्रमाण पत्र या अन्य संबंधित दस्तावेज़ प्रस्तुत करने होंगे।
- आयु प्रमाण पत्र: सरोगेट माँ की आयु 25 से 35 वर्ष के बीच होनी चाहिए।
- मानसिक और शारीरिक फिटनेस का प्रमाण पत्र: एक पंजीकृत मेडिकल प्रैक्टिशनर और एक मनोवैज्ञानिक द्वारा जारी किया गया प्रमाण पत्र जो यह प्रमाणित करता हो कि सरोगेट माँ सरोगेसी की प्रक्रिया के लिए चिकित्सकीय और मानसिक रूप से फिट है।
- सहमति पत्र: सरोगेट माँ और उसके पति (यदि विवाहित हो) दोनों का सरोगेसी के लिए लिखित और सूचित सहमति पत्र।
- बीमा पॉलिसी: जैसा कि ऊपर बताया गया है, 36 महीने की स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी का प्रमाण।
- पहचान और पते का प्रमाण: आधार कार्ड, पैन कार्ड आदि।
- कानूनी दस्तावेज़:
- सरोगेसी समझौता: इच्छुक दंपति और सरोगेट माँ के बीच एक विस्तृत और विधिवत नोटरीकृत समझौता, जिसमें प्रक्रिया की सभी शर्तें, अधिकार और जिम्मेदारियाँ शामिल हों।
- जिला चिकित्सा बोर्ड से प्रमाण पत्र: 'योग्यता प्रमाण पत्र' और 'आवश्यकता प्रमाण पत्र'।
- न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा अभिभावकत्व आदेश: बच्चे के जन्म के बाद माता-पिता के रूप में इच्छुक दंपति की पहचान स्थापित करने के लिए आवश्यक।
यह समझना महत्वपूर्ण है कि 2024 के संशोधनों ने कुछ चिकित्सकीय स्थितियों में डोनर गैमीट (donor gamete) के उपयोग की अनुमति दी है, जिससे उन दंपतियों को राहत मिली है जिन्हें पहले इसका उपयोग करने की अनुमति नहीं थी। हालाँकि, इसके लिए भी अतिरिक्त दस्तावेज़ और कानूनी प्रक्रियाओं की आवश्यकता हो सकती है, जिनकी पुष्टि संबंधित बोर्ड से की जानी चाहिए। इन कानूनी और दस्तावेज़ संबंधी आवश्यकताओं का पालन करना दिल्ली में सरोगेसी की वैधता और पारदर्शिता के लिए महत्वपूर्ण है। भारत में सरोगेसी से जुड़े नियम और प्रक्रिया के बारे में अधिक जानने के लिए, इच्छुक व्यक्ति संबंधित कानूनों का अध्ययन कर सकते हैं।
मुख्य बातें
- भारत में सरोगेसी केवल परोपकारी है, जिसमें सरोगेट को चिकित्सा खर्च और बीमा के अलावा कोई मुआवज़ा नहीं मिलता।
- कानूनी खर्चों में वकील की फीस, दस्तावेज़ तैयार करने की लागत, अदालती/प्रशासनिक शुल्क और सरोगेट के लिए अनिवार्य 36 महीने का बीमा प्रीमियम शामिल है।
- सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम, 2021 और 2024 के संशोधन दिल्ली में सरोगेसी के कानूनी ढाँचे का आधार हैं।
- प्रक्रिया के लिए इच्छुक दंपति/महिला, सरोगेट माँ और कानूनी रूप से तैयार किए गए महत्त्वपूर्ण दस्तावेज़ों की एक लंबी सूची आवश्यक है।
- अभिभावकत्व आदेश (Parentage Order) प्राप्त करना बच्चे की कानूनी माता-पिता की पहचान स्थापित करने के लिए अनिवार्य है।
- चिकित्सा प्रमाणपत्र जैसे बांझपन का प्रमाण और सरोगेट की फिटनेस का प्रमाण कानूनी अनुपालन के लिए आवश्यक हैं।