भारत में सरोगेसी का कुल खर्च 2026 में कितना है? (₹16 लाख से ₹25 लाख की रेंज)
Vinsfertility के इस "2026 में भारत में सरोगेसी की लागत: पूरा खर्च ब्रेकडाउन गाइड" ब्लॉग में, हम सरोगेसी से जुड़े वित्तीय पहलुओं की विस्तृत जानकारी प्रदान करेंगे। 2026 में भारत में सरोगेसी की कुल लागत आमतौर पर ₹16 लाख से ₹25 लाख तक रहने का अनुमान है। यह अनुमानित रेंज परोपकारी (altruistic) सरोगेसी मॉडल पर आधारित है, जहाँ सरोगेट माँ को किसी भी प्रकार का वाणिज्यिक मुआवज़ा नहीं दिया जाता, बल्कि उनके चिकित्सा खर्च, अनिवार्य बीमा और गर्भावस्था संबंधी अन्य आवश्यक व्ययों की प्रतिपूर्ति की जाती है।
भारत में सरोगेसी की दिशा में कदम बढ़ाने वाले इच्छुक माता-पिता के लिए यह जानना अत्यंत महत्वपूर्ण है कि इस प्रक्रिया में कौन-कौन से खर्च शामिल होते हैं। 2021 के सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम के लागू होने के बाद, देश में केवल परोपकारी सरोगेसी ही कानूनी रूप से मान्य है, जिसने खर्च की संरचना को पूरी तरह से बदल दिया है।
किन कारकों पर निर्भर करता है सरोगेसी का खर्च?
भारत में सरोगेसी का कुल खर्च कई महत्वपूर्ण कारकों पर निर्भर करता है, जो प्रत्येक मामले की विशिष्टताओं के अनुसार भिन्न हो सकते हैं:
- भौगोलिक स्थान: सरोगेसी प्रक्रिया की लागत शहर के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। बड़े मेट्रो शहरों जैसे दिल्ली, मुंबई या बेंगलुरु में, जहाँ चिकित्सा सुविधाएं और विशेषज्ञों की फीस अधिक होती है, वहां कुल खर्च छोटे शहरों की तुलना में अधिक होने की संभावना रहती है। हालांकि, आवश्यक चिकित्सा प्रक्रियाओं और कानूनी प्रावधानों के तहत लागत का एक बड़ा हिस्सा निर्धारित रहता है।
- क्लीनिक का चयन और उसकी सेवाएं: सरोगेसी के लिए चुने गए क्लीनिक की प्रतिष्ठा, वहां उपलब्ध तकनीक का स्तर, विशेषज्ञों की योग्यता और प्रदान की जाने वाली अतिरिक्त सेवाओं के आधार पर भी लागत में अंतर आ सकता है। उन्नत IVF लैब, अनुभवी भ्रूणविज्ञानी (embryologists) और उच्च सफलता दर वाले क्लीनिकों की फीस अधिक हो सकती है। यह महत्वपूर्ण है कि क्लीनिक ART (विनियमन) अधिनियम, 2021 के तहत पंजीकृत हो।
- चिकित्सीय जटिलताएं: सरोगेसी प्रक्रिया के दौरान उत्पन्न होने वाली चिकित्सा जटिलताएं खर्च को सीधे प्रभावित करती हैं। उदाहरण के लिए, यदि इच्छुक माता-पिता को एक से अधिक IVF साइकिल की आवश्यकता होती है, या यदि सरोगेट माँ को गर्भावस्था के दौरान किसी विशेष चिकित्सा उपचार या अतिरिक्त निगरानी की ज़रूरत पड़ती है, तो कुल लागत बढ़ सकती है। इसमें गर्भावस्था संबंधी जटिलताएं या समयपूर्व प्रसव शामिल हो सकते हैं। दाता गैमीट (donor gametes) के उपयोग की आवश्यकता भी लागत में वृद्धि कर सकती है, खासकर 2024 के संशोधनों के बाद कुछ विशेष चिकित्सकीय स्थितियों में।
2021 कानून के बाद कमर्शियल सरोगेसी बंद: अब लागत किन मदों में बँटी है?
भारत सरकार ने सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम, 2021 को 25 जनवरी 2022 से लागू किया, जिसने देश में कमर्शियल सरोगेसी को पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया। इस कानून का मुख्य उद्देश्य सरोगेट माताओं के शोषण को रोकना और इच्छुक माता-पिता के अधिकारों की रक्षा करना है। इस अधिनियम के तहत, सरोगेसी अब केवल परोपकारी आधार पर ही की जा सकती है। इसका अर्थ है कि सरोगेट माँ को गर्भावस्था के लिए किसी भी प्रकार का मौद्रिक मुआवज़ा नहीं दिया जाता है।
हालांकि, परोपकारी सरोगेसी में भी कुछ अनिवार्य खर्च होते हैं, जिनकी प्रतिपूर्ति इच्छुक माता-पिता को करनी होती है। ये खर्च मुख्य रूप से निम्नलिखित मदों में बँटे होते हैं:
- IVF और ART प्रक्रिया का खर्च: इसमें डिम्ब पुनर्प्राप्ति (egg retrieval), शुक्राणु संग्रह (sperm collection), इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF), भ्रूण विकास (embryo development) और भ्रूण ट्रांसफर (embryo transfer) जैसी प्रक्रियाएं शामिल हैं। यह सरोगेसी लागत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होता है।
- सरोगेट माँ का चिकित्सा खर्च: इसमें गर्भावस्था के दौरान सरोगेट माँ की सभी चिकित्सा जांचें, दवाएं, नियमित परामर्श, अल्ट्रासाउंड, आवश्यक अस्पताल में भर्ती और प्रसव का खर्च शामिल होता है। जन्म के बाद की देखभाल का खर्च भी इसमें शामिल है।
- अनिवार्य बीमा कवर: अधिनियम के अनुसार, इच्छुक माता-पिता को सरोगेट माँ के लिए 36 महीने का अनिवार्य स्वास्थ्य बीमा कवर प्रदान करना होता है। यह बीमा गर्भावस्था के बाद सरोगेट माँ को किसी भी प्रकार की जटिलता या स्वास्थ्य संबंधी समस्या से सुरक्षा प्रदान करता है। सरोगेसी (विनियमन) नियम, 2022 में इस बीमा के विस्तृत प्रावधान दिए गए हैं।
- कानूनी और प्रशासनिक खर्च: इसमें पात्रता प्रमाणपत्र (Eligibility Certificate) प्राप्त करने, विभिन्न हलफनामे तैयार करने, अदालत से पैरेंटेज ऑर्डर (Parentage Order) प्राप्त करने और अन्य सभी कानूनी औपचारिकताओं को पूरा करने का खर्च शामिल है। इस प्रक्रिया में एक वकील की सेवाएं लेना अनिवार्य होता है।
- सरोगेट माँ के पोषण और कल्याण संबंधी खर्च: गर्भावस्था के दौरान सरोगेट माँ को उचित पोषण और देखभाल की आवश्यकता होती है। अधिनियम के तहत, इच्छुक माता-पिता इन आवश्यक व्ययों की प्रतिपूर्ति के लिए जिम्मेदार होते हैं। इसमें गर्भावस्था के दौरान उनके आहार, कुछ यात्रा व्यय और आरामदायक जीवन शैली से जुड़े अन्य स्वीकृत खर्च शामिल हो सकते हैं।
मुख्य बातें
- 2026 में भारत में सरोगेसी का अनुमानित कुल खर्च ₹16 लाख से ₹25 लाख के बीच है।
- यह लागत परोपकारी सरोगेसी मॉडल पर आधारित है, जहाँ सरोगेट माँ को कोई वाणिज्यिक मुआवज़ा नहीं मिलता।
- खर्च मुख्य रूप से IVF/ART प्रक्रिया, सरोगेट की चिकित्सा देखभाल, 36 महीने का अनिवार्य बीमा और कानूनी प्रक्रियाओं में बँटा होता है।
- शहर, क्लीनिक की विशिष्टताएं और किसी भी चिकित्सा जटिलता जैसे कारक कुल लागत को प्रभावित कर सकते हैं।
- सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम, 2021 ने कमर्शियल सरोगेसी को प्रतिबंधित कर दिया है, जिससे खर्च की संरचना बदल गई है।
2026 में भारत में सरोगेसी लागत का पूरा खर्च ब्रेकडाउन
भारत में सरोगेसी की प्रक्रिया में कई घटक शामिल होते हैं, और प्रत्येक का अपना खर्च होता है। Vinsfertility के इस खंड में, '2026 में भारत में सरोगेसी की लागत: पूरा खर्च ब्रेकडाउन गाइड' में, हम इन घटकों को विस्तार से समझेंगे ताकि इच्छुक माता-पिता लागत संरचना को पूरी तरह से समझ सकें। सरोगेसी (रेगुलेशन) एक्ट, 2021 के लागू होने के बाद, भारत में केवल परोपकारी (altruistic) सरोगेसी की अनुमति है, जिसका अर्थ है कि सरोगेट माँ को किसी भी प्रकार का आर्थिक मुआवज़ा नहीं दिया जाता। इसके बजाय, सभी खर्च सरोगेट की चिकित्सा देखभाल, पोषण, बीमा और अन्य आवश्यक सुविधाओं पर केंद्रित होते हैं।
सरोगेसी लागत के विभिन्न मदों का अनुमानित ब्रेकडाउन
सरोगेसी से जुड़े कुल खर्च में विभिन्न सेवाएं और चरण शामिल होते हैं। नीचे दी गई तालिका में इन मदों और उनकी अनुमानित लागत रेंज को दर्शाया गया है:
| मद | अनुमानित रेंज (₹) | टिप्पणी |
|---|---|---|
| IVF/ART प्रक्रिया (भ्रूण निर्माण व ट्रांसफर) | ₹4,00,000 - ₹8,00,000 | इसमें अंडा पुनर्प्राप्ति, शुक्राणु एकत्रण, इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन, भ्रूण कल्चर और स्थानांतरण शामिल है। कई साइकल लगने पर खर्च बढ़ सकता है। |
| सरोगेट की मेडिकल जांच व तैयारी | ₹50,000 - ₹1,00,000 | सरोगेट की स्वास्थ्य जांच, मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन और प्रारंभिक दवाएं शामिल हैं। |
| सरोगेट का अनिवार्य बीमा कवर (36 महीने) | ₹30,000 - ₹60,000 | Surrogacy Act, 2021 के अनुसार सरोगेट के लिए 36 महीने का स्वास्थ्य बीमा अनिवार्य है। |
| सरोगेट की गर्भावस्था और प्रसव देखभाल | ₹2,50,000 - ₹4,50,000 | नियमित जांच, दवाएं, अस्पताल के शुल्क और प्रसव (सामान्य/सिजेरियन) का खर्च। |
| सरोगेट के पोषण, यात्रा व अन्य खर्च की प्रतिपूर्ति | ₹1,50,000 - ₹3,00,000 | गर्भावस्था में पोषण, यात्रा और दैनिक आवश्यकताओं के लिए कानूनी रूप से अनुमत खर्चों की प्रतिपूर्ति। |
| कानूनी शुल्क व दस्तावेज़ीकरण | ₹1,00,000 - ₹2,00,000 | सरोगेसी समझौते, पात्रता प्रमाणपत्र, अभिभावक आदेश व अन्य कानूनी प्रक्रियाओं के लिए फीस। |
| क्लीनिक/अस्पताल प्रशासनिक व परामर्श शुल्क | ₹1,50,000 - ₹3,00,000 | प्रक्रिया का समन्वय, परामर्श, प्रशासनिक सहायता और मेडिकल टीम का शुल्क। |
| दवाइयां व हार्मोन सपोर्ट (इच्छुक माता/डोनर/सरोगेट) | ₹1,00,000 - ₹2,00,000 | IVF प्रक्रिया के लिए हार्मोन इंजेक्शन, दवाएं और गर्भावस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक दवाएं। |
| गैमीट/भ्रूण फ्रीजिंग व स्टोरेज (यदि आवश्यक) | ₹40,000 - ₹80,000 | अतिरिक्त भ्रूणों के भंडारण या डोनर गैमीट की आवश्यकता पड़ने पर। |
| अनुमानित कुल लागत (योग) | ₹12,70,000 - ₹24,90,000 | यह कुल अनुमानित रेंज है, जो विभिन्न कारकों और क्लीनिकों के अनुसार भिन्न हो सकती है। |
स्रोत: Surrogacy (Regulation) Act, 2021 के प्रावधानों पर आधारित अनुमानित कीमतें, जो क्लीनिक और व्यक्तिगत परिस्थितियों के अनुसार भिन्न हो सकती हैं।
Surrogacy (Regulation) Act, 2021एकमुश्त बनाम चरणबद्ध भुगतान का अंतर
भारत में सरोगेसी प्रक्रिया के लिए भुगतान आमतौर पर एकमुश्त न होकर चरणबद्ध तरीके से किया जाता है। यह दृष्टिकोण इच्छुक माता-पिता के लिए वित्तीय प्रबंधन को आसान बनाता है और यह सुनिश्चित करता है कि भुगतान प्रक्रिया के महत्वपूर्ण पड़ावों (जैसे IVF की शुरुआत, भ्रूण स्थानांतरण, गर्भावस्था की पुष्टि, और बच्चे का जन्म) से जुड़ा हो। प्रत्येक चरण के सफल समापन पर संबंधित खर्च का भुगतान किया जाता है। इससे प्रक्रिया में पारदर्शिता आती है और दोनों पक्षों के लिए जवाबदेही बनी रहती है। कुछ छोटे या विशिष्ट मदों के लिए एकमुश्त भुगतान हो सकता है, लेकिन समग्र सरोगेसी कार्यक्रम के लिए चरणबद्ध भुगतान ही मानक है।
किन मदों में अप्रत्याशित (hidden) खर्च आ सकता है
योजना बनाने के बावजूद, सरोगेसी प्रक्रिया में कुछ अप्रत्याशित खर्च भी सामने आ सकते हैं। इन संभावनाओं को समझना वित्तीय नियोजन के लिए महत्वपूर्ण है:
- एक से अधिक IVF साइकल की आवश्यकता: यदि पहली IVF साइकल सफल नहीं होती है, तो अतिरिक्त साइकल के लिए दवाएं, लैब शुल्क और प्रक्रिया की लागत बढ़ सकती है।
- चिकित्सकीय जटिलताएं: सरोगेट या बच्चे के स्वास्थ्य से जुड़ी अप्रत्याशित जटिलताएं (जैसे समय से पहले प्रसव, सिजेरियन या NICU देखभाल) कुल लागत बढ़ा सकती हैं।
- डोनर गैमीट की आवश्यकता: यदि इच्छुक माता-पिता के गैमीट उपयुक्त न हों, तो डोनर गैमीट का उपयोग अतिरिक्त खर्च ला सकता है। ART (Regulation) Act, 2021 के तहत इसके नियम हैं।
- कानूनी या प्रशासनिक जटिलताएं: अप्रत्याशित कानूनी अड़चनें या दस्तावेज़ीकरण में लगने वाला अतिरिक्त समय वकील की फीस व प्रशासनिक खर्च बढ़ा सकता है।
- यात्री और आवास खर्च: यदि इच्छुक माता-पिता दूसरे शहर/देश से हों, तो प्रक्रिया के दौरान यात्रा और आवास के खर्च बढ़ सकते हैं।
- मनोवैज्ञानिक परामर्श: यदि सरोगेट या इच्छुक माता-पिता को पैकेज से बाहर अतिरिक्त मनोवैज्ञानिक सहायता की आवश्यकता हो, तो यह अतिरिक्त खर्च है। भारत में सरोगेसी से जुड़ी प्रक्रिया और नियमों के बारे में अधिक जानने के लिए आप सरोगेसी प्रक्रिया, कानून और लागत गाइड देख सकते हैं।
मुख्य बातें
- भारत में सरोगेसी का खर्च मुख्य रूप से IVF/ART प्रक्रिया, सरोगेट की चिकित्सा देखभाल, बीमा और कानूनी प्रक्रियाओं में बँटा होता है।
- Surrogacy (Regulation) Act, 2021 के तहत सरोगेट को कोई आर्थिक मुआवज़ा नहीं दिया जाता, बल्कि उसकी चिकित्सा और अन्य आवश्यक खर्चों की प्रतिपूर्ति की जाती है।
- भुगतान आमतौर पर प्रक्रिया के विभिन्न चरणों से जुड़ा होता है, न कि एकमुश्त।
- अतिरिक्त IVF साइकल, चिकित्सा जटिलताएं, या कानूनी अड़चनें अप्रत्याशित खर्चों का कारण बन सकती हैं।
- सरोगेट के लिए 36 महीने का स्वास्थ्य बीमा कवर कानूनी रूप से अनिवार्य है।
IVF और ART प्रक्रिया का खर्च: सरोगेसी लागत का सबसे बड़ा हिस्सा
भारत में सरोगेसी के कुल खर्च का एक महत्वपूर्ण हिस्सा असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (ART) प्रक्रियाओं पर खर्च होता है, जिसमें इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF) केंद्रीय भूमिका निभाता है। सरोगेसी रेगुलेशन एक्ट, 2021 के तहत, इच्छुक माता-पिता को चिकित्सा आवश्यकताओं के कारण सरोगेसी का विकल्प चुनना होता है, जिसका अर्थ है कि ART प्रक्रिया एक अनिवार्य कदम है। इन प्रक्रियाओं में अंडे की उत्तेजना, डिम्ब/शुक्राणु पुनर्प्राप्ति, फर्टिलाइज़ेशन, भ्रूण विकास और अंततः सरोगेट के गर्भाशय में भ्रूण ट्रांसफर शामिल हैं।
डिम्ब/शुक्राणु पुनर्प्राप्ति, फर्टिलाइज़ेशन और भ्रूण ट्रांसफर का अनुमानित खर्च
सरोगेसी प्रक्रिया की शुरुआत अक्सर इंटेंडेड मदर से या डोनर से डिम्ब पुनर्प्राप्त करने और इंटेंडेड फादर से या डोनर से शुक्राणु प्राप्त करने से होती है। इन गैमीट्स को फिर लैब में फर्टिलाइज किया जाता है ताकि भ्रूण तैयार हो सकें। यह पूरी प्रक्रिया कई चरणों में होती है, और प्रत्येक चरण की अपनी लागत होती है:
- ओवरीयन स्टिमुलेशन (Ovarian Stimulation) और मॉनिटरिंग: इसमें इंटेंडेड मदर या डिम्ब डोनर को अंडे के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए हार्मोनल इंजेक्शन दिए जाते हैं। इस चरण में दवाएं, रक्त परीक्षण और अल्ट्रासाउंड स्कैन शामिल होते हैं, जिनका खर्च ₹60,000 से ₹1,50,000 तक हो सकता है।
- डिम्ब पुनर्प्राप्ति (Egg Retrieval): यह एक छोटी सर्जिकल प्रक्रिया है जो एनेस्थीसिया के तहत की जाती है ताकि परिपक्व डिम्बों को अंडाशय से निकाला जा सके। इस प्रक्रिया का खर्च आमतौर पर ₹40,000 से ₹80,000 के बीच आता है।
- शुक्राणु पुनर्प्राप्ति (Sperm Retrieval): यदि इंटेंडेड फादर के शुक्राणु प्राकृतिक रूप से प्राप्त नहीं हो पाते हैं, तो सर्जिकल तरीके (जैसे TESA/PESA) से शुक्राणु पुनर्प्राप्ति की जाती है, जिसकी अतिरिक्त लागत ₹30,000 से ₹70,000 तक हो सकती है।
- फर्टिलाइज़ेशन और भ्रूण विकास (Fertilization and Embryo Culture): प्राप्त डिम्ब और शुक्राणु को लैब में इन विट्रो फर्टिलाइज़ेशन (IVF) या इंट्रासाइटोप्लाज्मिक स्पर्म इंजेक्शन (ICSI) तकनीक का उपयोग करके फर्टिलाइज किया जाता है। इसके बाद भ्रूणों को कुछ दिनों तक विकसित किया जाता है। इस चरण का खर्च ₹70,000 से ₹1,20,000 तक हो सकता है।
- भ्रूण ट्रांसफर (Embryo Transfer): विकसित भ्रूणों को सावधानीपूर्वक सरोगेट मदर के गर्भाशय में ट्रांसफर किया जाता है। यह प्रक्रिया अपेक्षाकृत कम लागत वाली होती है, लगभग ₹20,000 से ₹40,000।
कुल मिलाकर, एक मानक IVF साइकिल, जिसमें ये सभी चरण शामिल हैं, उसका खर्च ₹2,50,000 से ₹4,50,000 या अधिक हो सकता है, जो क्लीनिक, शहर और उपयोग की जाने वाली विशिष्ट तकनीकों पर निर्भर करता है।
एक से अधिक IVF साइकिल की ज़रूरत पड़ने पर बढ़ता खर्च
सरोगेसी प्रक्रिया में एक ही IVF साइकिल से सफलता मिलने की कोई गारंटी नहीं होती। कई बार, भ्रूण के आरोपण (implantation) में विफलता, भ्रूण की खराब गुणवत्ता, या अन्य चिकित्सा कारणों से एक से अधिक IVF साइकिल की आवश्यकता पड़ सकती है। प्रत्येक अतिरिक्त IVF साइकिल, चाहे वह ताज़े गैमीट्स के साथ हो या पहले से फ्रोज़न भ्रूणों के साथ, ऊपर वर्णित चरणों में से कुछ या सभी को दोहराने का मतलब है, जिससे लागत में सीधे वृद्धि होती है।
उदाहरण के लिए, यदि पहली साइकिल सफल नहीं होती है और दूसरी पूर्ण IVF साइकिल की आवश्यकता होती है, तो पहली साइकिल के बराबर या उससे थोड़ा कम खर्च फिर से वहन करना पड़ सकता है, क्योंकि डिम्ब पुनर्प्राप्ति और फर्टिलाइजेशन के चरण दोहराए जाएंगे। इस प्रकार, सफलता प्राप्त होने तक लगने वाली साइकिलों की संख्या सरोगेसी के कुल खर्च को काफी हद तक प्रभावित कर सकती है।
फ्रोज़न एम्ब्रियो स्टोरेज और डोनर गैमीट का अतिरिक्त खर्च
सरोगेसी प्रक्रिया में कुछ अन्य मदें भी लागत में जुड़ती हैं, खासकर यदि अतिरिक्त सेवाएं या विशिष्ट आवश्यकताएं हों।
फ्रोज़न एम्ब्रियो स्टोरेज (Frozen Embryo Storage)
अक्सर एक IVF साइकिल के दौरान एक से अधिक व्यवहार्य भ्रूण तैयार हो जाते हैं। भविष्य के उपयोग के लिए इन अतिरिक्त भ्रूणों को क्रायोप्रिजर्वेशन (फ्रीजिंग) द्वारा संग्रहित किया जा सकता है। यह विशेष रूप से तब उपयोगी होता है जब पहली भ्रूण ट्रांसफर साइकिल असफल हो जाती है या यदि इंटेंडेड पेरेंट्स भविष्य में और बच्चे चाहते हैं। फ्रोजन भ्रूणों को ट्रांसफर करने की प्रक्रिया को फ्रोजन एम्ब्रियो ट्रांसफर (FET) कहा जाता है, जो ताजे भ्रूण ट्रांसफर की तुलना में कम खर्चीला होता है क्योंकि इसमें ओवरीयन स्टिमुलेशन और डिम्ब पुनर्प्राप्ति की आवश्यकता नहीं होती। हालांकि, भ्रूणों को स्टोर करने के लिए वार्षिक शुल्क लिया जाता है, जो आमतौर पर ₹10,000 से ₹25,000 प्रति वर्ष हो सकता है।
डोनर गैमीट (Donor Gametes) का अतिरिक्त खर्च
कुछ मामलों में, इंटेंडेड पेरेंट्स के अपने गैमीट्स (डिम्ब या शुक्राणु) सरोगेसी के लिए उपयुक्त नहीं हो पाते हैं। असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (रेगुलेशन) एक्ट, 2021 [1] और उसके बाद के संशोधनों के अनुसार, कुछ विशेष चिकित्सा स्थितियों में डोनर गैमीट्स का उपयोग किया जा सकता है। यदि डोनर डिम्ब या शुक्राणु की आवश्यकता होती है, तो इससे लागत बढ़ जाती है:
- डिम्ब डोनर का खर्च: डिम्ब डोनर की स्क्रीनिंग, चिकित्सा जाँच, ओवरीयन स्टिमुलेशन और डिम्ब पुनर्प्राप्ति की प्रक्रिया से जुड़े खर्च होते हैं। यह खर्च ₹1,00,000 से ₹2,50,000 या अधिक हो सकता है।
- शुक्राणु डोनर का खर्च: शुक्राणु डोनर की स्क्रीनिंग और शुक्राणु प्राप्त करने का खर्च तुलनात्मक रूप से कम होता है, जो ₹10,000 से ₹30,000 के बीच हो सकता है।
यह महत्वपूर्ण है कि डोनर गैमीट से जुड़ी सभी प्रक्रियाएं ART एक्ट, 2021 के प्रावधानों के तहत पूरी तरह से विनियमित और कानूनी होनी चाहिए।
मुख्य बातें
- IVF और ART प्रक्रियाएं सरोगेसी की कुल लागत का सबसे बड़ा हिस्सा बनाती हैं, जिसमें ओवरीयन स्टिमुलेशन, गैमीट पुनर्प्राप्ति, फर्टिलाइजेशन और भ्रूण ट्रांसफर शामिल हैं।
- एक पूर्ण IVF साइकिल का अनुमानित खर्च ₹2,50,000 से ₹4,50,000 तक हो सकता है, जो क्लीनिक और उपचार की जटिलता पर निर्भर करता है।
- यदि पहली बार में सफलता नहीं मिलती है तो एक से अधिक IVF साइकिल की आवश्यकता हो सकती है, जिससे कुल खर्च में महत्वपूर्ण वृद्धि होती है।
- भ्रूणों को क्रायोप्रिजर्वेशन द्वारा संग्रहित करने पर वार्षिक स्टोरेज शुल्क (₹10,000 से ₹25,000) लगता है, जो भविष्य के ट्रांसफर के लिए उपयोगी है।
- कुछ चिकित्सीय स्थितियों में डोनर डिम्ब या शुक्राणु का उपयोग करने पर अतिरिक्त खर्च आता है, जो डिम्ब डोनर के लिए ₹1,00,000-₹2,50,000 और शुक्राणु डोनर के लिए ₹10,000-₹30,000 तक हो सकता है।
सरोगेट मदर का मुआवज़ा और देखभाल खर्च — कानूनी रूप से क्या अनुमति है?
भारत में सरोगेसी के कुल खर्च को समझने में सरोगेट मदर से जुड़े व्यय एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। हालांकि, 2021 के सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम के लागू होने के बाद, सरोगेट मदर को दिए जाने वाले भुगतानों के संबंध में महत्वपूर्ण बदलाव हुए हैं। यह धारा भारत में सरोगेसी की लागत के ब्रेकडाउन गाइड का एक अभिन्न अंग है, जिसमें सरोगेट मदर के खर्चों से संबंधित कानूनी प्रावधानों पर विस्तार से चर्चा की गई है। Vinsfertility का उद्देश्य इस संवेदनशील विषय पर सटीक और विश्वसनीय जानकारी प्रदान करना है।सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम, 2021 के तहत परोपकारी सरोगेसी: 'मुआवज़ा' बनाम 'खर्च प्रतिपूर्ति'
25 जनवरी, 2022 से लागू हुए सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम, 2021 ने भारत में कमर्शियल सरोगेसी (व्यावसायिक सरोगेसी) पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। इसका अर्थ है कि अब सरोगेट मदर को बच्चे को जन्म देने के लिए किसी भी प्रकार का मौद्रिक मुआवज़ा, इनाम या पारिश्रमिक नहीं दिया जा सकता। यह कानून सरोगेट माताओं के शोषण को रोकने और सरोगेसी को एक परोपकारी कार्य के रूप में स्थापित करने के लिए बनाया गया है।अधिनियम के अनुसार, भारत में केवल परोपकारी सरोगेसी (altruistic surrogacy) की अनुमति है। परोपकारी सरोगेसी में, सरोगेट मदर इच्छुक दंपत्ति या महिला की रिश्तेदार होती है और वह केवल चिकित्सा खर्च, बीमा कवरेज और गर्भावस्था व प्रसव से संबंधित अन्य आवश्यक खर्चों की प्रतिपूर्ति प्राप्त करती है। 'मुआवज़ा' शब्द का अर्थ किसी सेवा या नुकसान के लिए भुगतान की गई राशि से है, जबकि 'खर्च प्रतिपूर्ति' का अर्थ किसी के द्वारा किए गए वास्तविक खर्चों को वापस चुकाना है। यह कानूनी रूप से महत्वपूर्ण अंतर है जो यह सुनिश्चित करता है कि सरोगेट मदर को उसकी निस्वार्थ सेवा के लिए आर्थिक रूप से लाभान्वित नहीं किया जाता, बल्कि केवल उसकी स्वास्थ्य और कल्याण संबंधी आवश्यकताओं को पूरा किया जाता है। अधिनियम के प्रावधानों को यहाँ देखा जा सकता है: Surrogacy (Regulation) Act, 2021।सरोगेट का 36 महीने का अनिवार्य बीमा कवर खर्च
सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम, 2021 के तहत, इच्छुक दंपत्ति या महिला के लिए यह अनिवार्य है कि वे सरोगेट मदर को कम से कम 36 महीने (3 वर्ष) का व्यापक बीमा कवरेज प्रदान करें। यह बीमा कवर सरोगेट मदर के स्वास्थ्य और कल्याण को गर्भावस्था, प्रसव और प्रसवोत्तर अवधि के दौरान किसी भी जटिलता से बचाने के लिए डिज़ाइन किया गया है।इस बीमा पॉलिसी में आमतौर पर प्रसवोत्तर जटिलताएं, स्वास्थ्य संबंधी खर्च और अधिनियम में निर्दिष्ट अन्य जोखिम शामिल होते हैं। यह सुनिश्चित करता है कि सरोगेट मदर को गर्भावस्था या प्रसव के परिणामस्वरूप होने वाली किसी भी अप्रत्याशित चिकित्सा स्थिति का सामना करने पर वित्तीय बोझ न पड़े। इस अनिवार्य बीमा का खर्च सरोगेसी की कुल लागत का एक महत्वपूर्ण घटक है। इसकी अनुमानित लागत विभिन्न बीमा प्रदाताओं और प्रदान किए गए कवरेज के दायरे के आधार पर ₹3 लाख से ₹5 लाख तक हो सकती है, जिसमें स्वास्थ्य बीमा के सामान्य प्रीमियम और सरोगेसी से संबंधित विशिष्ट जोखिम शामिल होते हैं। यह खर्च सरोगेसी प्रक्रिया की शुरुआत से पहले ही इच्छुक माता-पिता द्वारा वहन किया जाता है।मेडिकल जाँच, पोषण, यात्रा और प्रसव-संबंधी देखभाल का खर्च
परोपकारी सरोगेसी के तहत, इच्छुक दंपत्ति या महिला कानूनी रूप से सरोगेट मदर के कई आवश्यक खर्चों को कवर करने के लिए जिम्मेदार होते हैं। इन खर्चों का उद्देश्य सरोगेट मदर को गर्भावस्था के दौरान सर्वोत्तम संभव देखभाल और समर्थन प्रदान करना है। इनमें प्रमुख रूप से निम्नलिखित शामिल हैं:- मेडिकल जाँच और प्रक्रियाएँ: इसमें प्रारंभिक स्क्रीनिंग, गर्भावस्था के दौरान नियमित जाँचें, अल्ट्रासाउंड स्कैन, रक्त परीक्षण और अन्य सभी आवश्यक चिकित्सा प्रक्रियाएँ शामिल हैं। ये सभी जाँचें बच्चे और सरोगेट मदर दोनों के स्वास्थ्य की निगरानी के लिए महत्वपूर्ण हैं।
- पोषण संबंधी सहायता: एक स्वस्थ गर्भावस्था के लिए उचित पोषण अत्यंत महत्वपूर्ण है। इच्छुक माता-पिता सरोगेट मदर की आहार संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पोषण संबंधी पूरक और विशेष आहार के खर्चों की प्रतिपूर्ति करते हैं।
- यात्रा खर्च: सरोगेट मदर को विभिन्न चिकित्सा नियुक्तियों, जाँचों और प्रसव के लिए क्लीनिक या अस्पताल जाने की आवश्यकता होती है। इन यात्राओं से संबंधित परिवहन और आवास (यदि आवश्यक हो) के खर्चों की प्रतिपूर्ति भी की जाती है।
- प्रसव-संबंधी देखभाल: इसमें प्रसव (सामान्य या सिजेरियन सेक्शन) का पूरा खर्च, अस्पताल में रहने का खर्च, दवाओं का खर्च और प्रसव के तुरंत बाद की देखभाल शामिल है। यह सुनिश्चित करता है कि बच्चे का जन्म सुरक्षित वातावरण में हो और सरोगेट मदर को उचित पोस्ट-पार्टम देखभाल मिले।
मुख्य बातें
- भारत में सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम, 2021 के तहत केवल परोपकारी सरोगेसी ही कानूनी रूप से मान्य है, जिसमें सरोगेट को कोई मौद्रिक मुआवज़ा नहीं मिलता।
- सरोगेट मदर को केवल गर्भावस्था, प्रसव और प्रसवोत्तर देखभाल से संबंधित वास्तविक खर्चों की प्रतिपूर्ति की जाती है, न कि 'मुआवज़ा' दिया जाता है।
- इच्छुक माता-पिता को सरोगेट मदर के लिए 36 महीने का अनिवार्य स्वास्थ्य बीमा कवर प्रदान करना होगा, जिसकी लागत ₹3 लाख से ₹5 लाख तक हो सकती है।
- मेडिकल जाँच, पोषण संबंधी सहायता, यात्रा खर्च और प्रसव-संबंधी सभी देखभाल के खर्च इच्छुक माता-पिता द्वारा वहन किए जाते हैं।
- सभी खर्चों का उद्देश्य सरोगेट मदर के स्वास्थ्य और सुरक्षा को सुनिश्चित करना है और इनकी निगरानी सख्त कानूनी प्रावधानों के तहत होती है।
कानूनी और दस्तावेज़ी प्रक्रिया का खर्च (एलिजिबिलिटी सर्टिफिकेट से लेकर पैरेंटेज ऑर्डर तक)
भारत में परोपकारी सरोगेसी की प्रक्रिया में केवल चिकित्सा ही नहीं, बल्कि एक विस्तृत कानूनी और दस्तावेज़ी प्रक्रिया भी शामिल है। यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि पूरी प्रक्रिया भारतीय सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम, 2021 और सहायक ART (विनियमन) अधिनियम, 2021 के अनुरूप हो। इन कानूनी चरणों में विभिन्न प्रमाणपत्रों की प्राप्ति, कानूनी समझौतों का मसौदा तैयार करना और न्यायालय से पितृत्व आदेश प्राप्त करना शामिल है, और इन सभी में अनुमानित लागतें होती हैं।
पात्रता प्रमाणपत्र (Eligibility Certificate) और अनिच्छुकता प्रमाणपत्र की फीस
सरोगेसी की प्रक्रिया शुरू करने से पहले, इच्छुक दम्पत्ति/महिला और सरोगेट माता दोनों को कानून के अनुसार पात्रता प्रमाणपत्र प्राप्त करना अनिवार्य है। यह प्रमाणपत्र संबंधित प्राधिकरण द्वारा जारी किया जाता है।
- इच्छुक दम्पत्ति/महिला के लिए पात्रता प्रमाणपत्र: इसमें यह साबित करने के लिए विभिन्न चिकित्सा जांचें शामिल होती हैं कि इच्छुक दम्पत्ति को चिकित्सीय रूप से सरोगेसी की आवश्यकता है (जिसे अनिच्छुकता प्रमाणपत्र भी कहा जाता है)। इसमें बांझपन का प्रमाण और अन्य चिकित्सा रिपोर्ट शामिल होती हैं। इन जांचों और रिपोर्टों को संकलित करने में खर्च होता है। अधिनियम के तहत निर्धारित आयु (पुरुष के लिए 26-55 वर्ष, महिला के लिए 25-50 वर्ष; विधवा/तलाकशुदा महिला के लिए 35-45 वर्ष) और अन्य शर्तों की पुष्टि भी की जाती है।
- सरोगेट माता के लिए पात्रता प्रमाणपत्र: सरोगेट माता के लिए भी ऐसे ही व्यापक चिकित्सा और मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन की आवश्यकता होती है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वह शारीरिक और मानसिक रूप से सरोगेसी के लिए फिट है। उसे कम से कम एक अपना बच्चा होना चाहिए और वह 25-35 वर्ष की आयु वर्ग में होनी चाहिए। इन जांचों और प्रमाणपत्रों को प्राप्त करने से संबंधित प्रशासनिक और चिकित्सा शुल्क प्रक्रियात्मक खर्च का हिस्सा होते हैं।
इन प्रमाणपत्रों के लिए सीधे तौर पर कोई सरकारी 'फीस' नहीं होती, लेकिन इन्हें प्राप्त करने की प्रक्रिया में होने वाले मेडिकल टेस्ट (जैसे रक्त जांच, हार्मोनल प्रोफाइल, अल्ट्रासाउंड, मनोवैज्ञानिक परामर्श आदि) और रिपोर्ट तैयार करने की लागत इस मद में आती है।
वकील, हलफनामा और कोर्ट से पैरेंटेज ऑर्डर का खर्च
कानूनी प्रक्रिया सरोगेसी की आधारशिला है, जो इच्छुक माता-पिता और सरोगेट मां दोनों के अधिकारों और जिम्मेदारियों की रक्षा करती है।
- कानूनी परामर्श और दस्तावेज़ तैयार करना: इसमें सरोगेसी समझौते का मसौदा तैयार करना शामिल है, जो सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम, 2021 के प्रावधानों के अनुरूप होना चाहिए। यह समझौता चिकित्सा प्रक्रियाओं, सरोगेट की देखभाल, गर्भावस्था के दौरान होने वाले खर्चों की प्रतिपूर्ति, और बच्चे के जन्म के बाद माता-पिता के अधिकारों को स्पष्ट रूप से परिभाषित करता है। एक अनुभवी वकील इस जटिल दस्तावेज़ को तैयार करने और सभी कानूनी आवश्यकताओं का अनुपालन सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- हलफनामे और नोटरी शुल्क: इच्छुक माता-पिता और सरोगेट माता दोनों को विभिन्न हलफनामों पर हस्ताक्षर करने की आवश्यकता होती है, जो उनकी पात्रता और समझौते की शर्तों की पुष्टि करते हैं। इन हलफनामों को नोटरीकृत कराने में शुल्क लगता है। इसके अतिरिक्त, स्टांप शुल्क भी लागू हो सकता है।
- पैरेंटेज ऑर्डर का खर्च: बच्चे के जन्म के बाद, इच्छुक माता-पिता को संबंधित मजिस्ट्रेट की अदालत से एक पैरेंटेज ऑर्डर प्राप्त करना होता है। यह आदेश बच्चे की कानूनी पितृत्व को स्थापित करता है और उन्हें जन्म प्रमाण पत्र में अपने नाम दर्ज कराने की अनुमति देता है। इस अदालत की प्रक्रिया में वकील की फीस, कोर्ट फाइलिंग शुल्क और अन्य प्रशासनिक लागतें शामिल होती हैं। यह खर्च भौगोलिक स्थिति और वकील के अनुभव के आधार पर ₹50,000 से ₹1,50,000 या अधिक तक हो सकता है।
ART/Surrogacy Board पंजीकरण व अनुपाल
भारत में सरोगेसी सेवाओं की पेशकश करने वाले सभी ART (असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी) क्लीनिक और सरोगेसी क्लीनिकों को ART (विनियमन) अधिनियम, 2021 और सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम, 2021 के तहत स्थापित नेशनल ART एंड सरोगेसी बोर्ड या स्टेट ART एंड सरोगेसी बोर्ड के साथ पंजीकृत होना अनिवार्य है।
- क्लीनिक पंजीकरण: इन बोर्डों के साथ क्लीनिकों के पंजीकरण के लिए एक निर्धारित शुल्क होता है। यह शुल्क सीधे तौर पर इच्छुक माता-पिता द्वारा वहन नहीं किया जाता है, बल्कि यह क्लीनिक की परिचालन लागत का हिस्सा होता है, जो अंततः सरोगेसी सेवाओं के समग्र खर्च को प्रभावित करता है।
- अनुपालन और मानक: क्लीनिकों को अधिनियमों और नियमों द्वारा निर्धारित सख्त मानकों और दिशानिर्देशों का पालन करना होता है। इसमें सुविधाओं का रखरखाव, योग्य कर्मचारियों को नियुक्त करना, गोपनीयता बनाए रखना और नैतिक आचरण सुनिश्चित करना शामिल है। अनुपालन सुनिश्चित करने में प्रशासनिक लागतें और निरंतर ऑडिट शामिल होते हैं, जो यह सुनिश्चित करते हैं कि सरोगेसी की प्रक्रिया सुरक्षित और कानूनी दायरे में हो। इच्छुक माता-पिता को हमेशा यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वे एक पंजीकृत और नियमों का पालन करने वाले क्लीनिक का चयन कर रहे हैं। इस बात की अधिक जानकारी के लिए आप भारत में सरोगेसी 2026: प्रक्रिया, कानून, खर्च व पात्रता गाइड देख सकते हैं।
मुख्य बातें
- कानूनी प्रक्रिया परोपकारी सरोगेसी का एक अनिवार्य हिस्सा है, जिसमें विभिन्न प्रमाणपत्र और न्यायालय का आदेश शामिल है।
- पात्रता और अनिच्छुकता प्रमाणपत्रों के लिए चिकित्सा जांच व प्रशासनिक शुल्क लगते हैं।
- वकील की फीस, हलफनामे और पैरेंटेज ऑर्डर प्राप्त करने का खर्च कुल सरोगेसी लागत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होता है, जो ₹50,000 से ₹1,50,000 या अधिक हो सकता है।
- सभी ART और सरोगेसी क्लीनिकों को राष्ट्रीय/राज्य बोर्डों के साथ पंजीकृत होना चाहिए, जो एक अप्रत्यक्ष लागत है।
- कानूनी अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए एक योग्य वकील का चुनाव और पंजीकृत क्लीनिक का चयन अत्यंत महत्वपूर्ण है।